आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर ढीमरखेड़ा में सवर्ण समाज की सभा, एसडीएम को सौंपा ज्ञापन

रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
*उमरियापान*। आरक्षण व्यवस्था की समीक्षा और उसमें सुधार की मांग को लेकर मंगलवार को ढीमरखेड़ा तहसील में सवर्ण समाज द्वारा शांतिपूर्ण जनसभा आयोजित की गई । कार्यक्रम के बाद राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को ज्ञापन सौंपा गया । कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में भेड़ा वाले ब्रह्मनंद दास जी महाराज उपस्थित रहे ।
सभा में वक्ताओं ने स्पष्ट किया कि आंदोलन किसी जाति या समुदाय के विरोध में नहीं, बल्कि ‘आरक्षण विरोध नहीं, आरक्षण सुधार’ की मांग को लेकर है । उन्होंने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को समान अवसर मिलना चाहिए और आरक्षण व्यवस्था की समय-समय पर समीक्षा आवश्यक है ।
*आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग*
ज्ञापन में आरक्षण का आधार आर्थिक स्थिति को बनाने, सभी वर्गों के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को अवसर देने तथा आरक्षित वर्ग में क्रीमीलेयर लागू करने की मांग की गई । वक्ताओं ने कहा कि गरीबी की कोई जाति नहीं होती, इसलिए जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं और अवसरों का लाभ पहुंचना चाहिए ।
*यूजीसी नियमों और एससी-एसटी एक्ट पर भी मांग*
समाज की ओर से यूजीसी के नए नियमों में किए गए बदलावों पर पुनर्विचार अथवा रोलबैक की मांग रखी गई । साथ ही एससी-एसटी एक्ट को लेकर वर्ष 2018 में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों पर पुनर्विचार कर उन्हें लागू करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही ।
*सवर्ण आयोग के गठन की मांग*
सवर्ण समाज ने आर्थिक रूप से कमजोर और मेधावी युवाओं की समस्याओं के समाधान के लिए सवर्ण आयोग के गठन की मांग की । वक्ताओं ने शिक्षा, रोजगार, छात्रवृत्ति और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में जरूरतमंद युवाओं को बेहतर अवसर देने की बात कही ।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि “भूख की कोई जाति नहीं होती और आंसुओं का कोई धर्म नहीं होता । उन्होंने प्रतिभा और आर्थिक जरूरत के आधार पर अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया । कार्यक्रम के अंत में प्रतिनिधिमंडल ने शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से ज्ञापन सौंपकर सरकार से सभी वर्गों के हित में आरक्षण नीति की समीक्षा करने की अपील की ।



