मध्य प्रदेश

ढीमरखेड़ा में घर पर अधिक प्रसव के मामलों पर स्वास्थ्य विभाग की टीम ने की समीक्षा

जबलपुर क्षेत्रीय निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं की टीम ने CHC- PHC, आशा व एएनएम के कार्यों की जांच की, घर पर प्रसव कराने वाले परिवारों से भी किया संपर्क
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
*उमरियापान* । ढीमरखेड़ा ब्लॉक क्षेत्र में संस्थागत प्रसव की अपेक्षा घर पर होने वाले प्रसव की संख्या अधिक पाए जाने को लेकर स्वास्थ्य विभाग गंभीर नजर आ रहा है ।  इसी क्रम में जबलपुर क्षेत्रीय निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं (आरडी) कार्यालय की टीम ने ढीमरखेड़ा ब्लॉक का निरीक्षण एवं समीक्षा की ।  प्रभा सिंह एवं ज्योति लिल्हारे के नेतृत्व में पहुंची टीम ने स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अमले को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए ।
*सरकार का प्रमुख लक्ष्य शत-प्रतिशत*

संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करना है, ताकि मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम किया जा सके ।  ढीमरखेड़ा क्षेत्र में घर पर होने वाले प्रसव के आंकड़े अधिक सामने आने के बाद उच्च स्तरीय टीम ने क्षेत्र की वास्तविक स्थिति की जांच की। टीम ने स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों, आशा कार्यकर्ताओं एवं एएनएम द्वारा गर्भवती महिलाओं की निगरानी और संस्थागत प्रसव के लिए किए जा रहे प्रयासों की समीक्षा की ।
*दुर्गम इलाकों में परिवहन बड़ी चुनौती*
ढीमरखेड़ा ब्लॉक का बड़ा हिस्सा वनांचल एवं दुर्गम क्षेत्रों में आता है ।  कई गांवों में खराब सड़क, समय पर परिवहन सुविधा नहीं मिलना, एंबुलेंस अथवा जननी एक्सप्रेस की देरी तथा जागरूकता की कमी के कारण गर्भवती महिलाओं को समय पर अस्पताल पहुंचाने में परेशानी आती है ।  ऐसी परिस्थितियों में कुछ परिवार घर पर ही प्रसव कराने का विकल्प चुन लेते हैं ।
*हाई रिस्क गर्भवतियों की पहले से होगी पहचान*
निरीक्षण के दौरान टीम ने स्वास्थ्य अमले को निर्देश दिए कि गर्भवती महिलाओं की नियमित ट्रैकिंग की जाए तथा उच्च जोखिम वाली गर्भवतियों की पहचान समय रहते कर ली जाए ।  प्रसव की संभावित तिथि से पहले ही ऐसी महिलाओं को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया ।  साथ ही जननी सुरक्षा योजना के तहत मिलने वाली प्रोत्साहन राशि और संस्थागत प्रसव से संबंधित योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए गए ।
*घर-घर पहुंची टीम, परिवारों को दी समझाइश*
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने घर पर प्रसव हुए हितग्राहियों के घर-घर जाकर संपर्क भी किया ।  टीम ने परिवारों से प्रसव के दौरान आने वाली परेशानियों की जानकारी ली और संस्थागत प्रसव के लाभों के बारे में समझाइश दी ।  टीम ने ग्रामीण परिवारों से अपील की कि गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच कराएं और प्रसव के लिए समय रहते स्वास्थ्य केंद्र पहुंचें, ताकि मां और नवजात दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके ।

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