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Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 13 सितम्बर 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 13 सितम्बर 2024
13 सितम्बर 2024 दिन शुक्रवार को भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि है। आज पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र से चलकर सूर्यदेवता उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर जायेंगे। यह संक्रान्ति रात्रि में अर्थात 14 सितम्बर को रात्रि 01:00 AM पर होगा। इसका विवरण इस प्रकार है, चं-सू. एवं पु.-स्त्री. योग है। अश्व वाहन एवं नीरा नाड़ी है, जिसका स्वामी शुक्र है। इससे हल्का-फुल्का वर्षा का योग रहेगा। आज पुनः-पुनः रवियोग ही है।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_

☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष दशमी तिथि 10:30 PM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी – दशमी के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 09:35 PM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र है तो राशि स्वामी शुक्र। तथा इसका वैदिक देवता अपस अर्थात् जल देवता है।
⚜️ योग – सौभाग्य योग 08:48 PM तक, उसके बाद शोभन योग
प्रथम करण : तैतिल – 11:07 ए एम तक
द्वितीय करण : गर – 10:30 पी एम तक वणिज
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 10:30 से 12:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:51:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 06:09:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:32 ए एम से 05:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:56 ए एम से 06:05 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:52 ए एम से 12:41 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:21 पी एम से 03:10 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:28 पी एम से 06:51 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:28 पी एम से 07:38 पी एम
💧 अमृत काल : 04:51 पी एम से 06:26 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:54 पी एम से 12:40 ए एम, सितम्बर 14
💮 रवि योग : पूरे दिन
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में छैने से बनी मिठाई चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/रवियोग/ सूर्य उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश/तेजा दशमी बाबा रामदेव प्राकट्योत्सव/ विश्व भाईचारा एवं क्षमादान दिवस, प्रसिद्ध क्रान्तिकारी जतीन्द्रनाथ दास स्मृति दिवस, राष्ट्रीय सीलिएक जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय अंधविश्वास का विरोध दिवस, राष्ट्रीय डूडल दिवस, विश्व सेप्सिस दिवस, अंतर्राष्ट्रीय चॉकलेट दिवस, भारतीय अभिनेत्री महिमा चौधरी जन्म दिवस, राष्ट्रीय महिला दिवस, राष्ट्रीय मूंगफली दिवस, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात धनदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं।
🏘️ Vastu tips 🛕
घर के मेन गेट पर कुछ चीजों के रखने से सुख- समृद्धि चली जाती है और ऐसे घर में मां लक्ष्मी कभी प्रवेश नहीं करती हैं। लेकिन अगर आप चाहते है मां लक्ष्मी हमेशा आपसे प्रसन्न रहें तो घर के मुख्य द्वार पर इन चीजों को भूलकर भी न रखें।
झाडू: सनातन धर्म में झाडू को लक्ष्मी मानकर पूजा की जाती है। जैसे दिवाली के समय घनतेरस में होता है। दरवाजे पर झाडू रखने से वो पैरों में आती है, जो गलत है। इसलिए इसे कभी घर के दरवाजे पर झाडू नहीं रखना चाहिए, ऐसा करने से मां लक्ष्मी नाराज हो जाती हैं।
मनीप्लांट:घरों में समृद्धि लाने वाले मनीप्लांट को बहुत से लोग अक्सर मेन गेट पर लंबी लताओं वाले पौधे के साथ रख देते हैं। मनीप्लांट को बाहर नहीं, घर के अंदर रखना चाहिए।
कांटेदार पौधे; कुछ लोग अपने घरों की सुंदरता बढ़ाने के लिए दरवाजे पर कांटेदार पौधे रख देते है, जो गलत है। ऐसा करने से मां लक्ष्मी रूठ जाती है और रिश्तों में दरार आने की संभावना और ज्यादा बढ़ जाती है।
कूड़ा कचरा: घरों की सफाई करने के बाद लोग अक्सर कूड़ा कचरा अपने दरवाजे के साइड में जमा कर रख देते है। यह दरिद्रता का सूचक है। जिन घरों के सामने गंदगी होती है, वहाँ लक्ष्मी कभी नहीं आती हैं।
जूते-चप्पल: आमतौर पर लोग घर में प्रवेश करने से पहले गेट पर या उसके आसपास जूते-चप्पल बाहर उतार देते हैं। वास्तु के अनुसार, ऐसा करने से व्यक्ति को पाप लगता है। वहाँ लक्ष्मी कभी नहीं आती हैं।
🔏 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
गहरी श्वास के लाभ:

तनाव कम करना: गहरी श्वास लेने से शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ती है, जिससे तनाव और चिंता के स्तर में कमी आती है। जब आप गहरी श्वास लेते हैं, तो आपके दिमाग में ताजगी आती है और आप अधिक रिलैक्स महसूस करते हैं।
रक्त संचार में सुधार: गहरी श्वास लेने से रक्त का संचार बेहतर होता है, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों तक ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की पहुंच अधिक प्रभावी होती है। इससे हृदय स्वस्थ रहता है और ब्लड प्रेशर नियंत्रित रहता है।
इम्यून सिस्टम मजबूत करना: गहरी श्वास लेने से शरीर में टॉक्सिन्स को बाहर निकालने की प्रक्रिया तेज होती है, जिससे आपका इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और आप बीमारियों से लड़ने में अधिक सक्षम होते हैं।
पाचन तंत्र में सुधार: गहरी श्वास लेने से पाचन तंत्र को भी लाभ मिलता है। यह पेट के अंगों में रक्त के प्रवाह को बढ़ाता है, जिससे खाना अच्छे से पचता है और गैस, कब्ज जैसी समस्याओं में राहत मिलती है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
खसखस को दर्द निवारक के रूप में प्रयोग किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला ओपियम एल्कलॉइड्स सभी प्रकार के दर्द को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। खास तौर से इसका प्रयोग मांसपेशियों के दर्द में किया जाता है। खसखस का तेल भी बाजार में उपलब्ध होता है, जिसका प्रयोग दर्द वाले स्थान पर किया जाता है।
सांस संबंधी तकलीफ होने पर भी खसखस काफी फायदेमंद होता है। इसके साथ ही यह खांसी को कम कर सांस संबंधी समस्याओं में लंबे समय तक आराम दिलाने में भी मदद करता है।
अगर आप नींद न आने की समस्या से परेशान हैं, तो सोने से पहले खसखस का गर्म दूध पीना आपके लिए बेहद फायदेमंद हो सकता है। यह अनिद्रा की समस्या को दूर करता है। यह आपको नींद लेने के लिए प्रेरित करेगा।
खसखस फाइबर का बेहतरीन स्त्रोत है, जिसका प्रयोग करने से कब्ज की समस्या नहीं होती। इसके अलावा यह बेहतर पाचन में भी मदद करता है और शरीर को उर्जा देने के लिए भी बहुत लाभदायक होता है।
गुर्दे की पथरी में इलाज के तौर पर भी खसखस को सेवन किया जाता है। इसमें पाया जाने वाला ओक्सलेट्स, शरीर में मौजूद अतिरिक्त कैल्शियम का अवशोषण कर गुर्दे में पथरी बनने से रोकता है।
खसखस मानसिक तनाव से मुक्ति दिलाने के साथ-साथ त्वचा पर होने वाली झुर्रियों को भी कम करने में मदद करता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में होते हैं, जो आपको जवां बनाए रखने में मदद करते है।
📖 गुरु भक्ति योग_
🕯️
हर भगवान के साथ एक पशु को जोड़ कर भारतीय मनीषियों ने प्रकृति और उसमें रहने वाले जीवों की रक्षा का एक संदेश दिया है। हर पशु किसी न किसी भगवान का प्रतिनिधि है, उनका वाहन है, इसलिए इनकी हिंसा नहीं करनी चाहिए। मूलत: इसके पीछे एक यही संदेश सबसे बड़ा है।
आपको क्या लगता है? गणेश जी ने चूहों को यूं ही चुन लिया? या नंदी शिव की सवारी यूं ही बन गए? भगवानों ने अपनी सवारी बहुत ही विशेष रूप से चुनी। यहां तक कि उनके वाहन उनकी चारित्रिक विशेषताओं को भी बताते हैं।
भगवान गणेश और मूषक गणेश जी का वाहन है मूषक। मूषक शब्द संस्कृत के मूष से बना है जिसका अर्थ है लूटना या चुराना। सांकेतिक रूप से मनुष्य का दिमाग मूषक, चुराने वाले यानी चूहे जैसा ही होताहै। यह स्वार्थ भाव से गिरा होता है। गणेश जी का चूहे पर बैठना इस बातका संकेत है कि उन्होंने स्वार्थ परविजय पाई है और जनकल्याण के भाव को अपने भीतर जागृत किया है।
शिव और नंदी जैसे शिव भोलेभाले, सीधे चलने वाले लेकिन कभी-कभी भयंकर क्रोध करने वाले देवता हैं तो उनका वाहन हैं नंदी बैल। संकेतों की भाषा में बैल शक्ति, आस्था व भरोसे का प्रतीक होता है। इसके अतिरिक्त भगवान के शिव का चरित्र मोह माया और भौतिक इच्छाओं से परे रहने वाला बताया गयाहै। सांकेतिक भाषा में बैल यानी नंदी इन विशेषताओं को पूरी तरह चरितार्थ करते हैं। इसलिए शिव का वाहन नंदी हैं।
कार्तिकेय और मयूर कार्तिकेय का वाहन है मयूर। एक कथा के अनुसार यह वाहन उनको भगवान विष्णु से भेंट में मिला था। भगवान विष्णु ने कार्तिकेय की साधक क्षमताओं को देखकर उन्हें यह वाहन दिया था, जिसका सांकेतिक अर्थ था कि अपने चंचल मन रूपी मयूर को कार्तिकेय ने साध लिया है। वहीं एक अन्य कथा में इसे दंभ के नाशक के तौरपर कार्तिकेय के साथ बताया गया है।
मां दुर्गा और उनका शेर दुर्गा तेज, शक्ति और सामथ्र्य का प्रतीक है तो उनके साथ सिंह है। शेर प्रतीक है क्रूरता, आक्रामकता और शौर्य का। यह तीनों विशेषताएं मां दुर्गा के आचरण में भी देखने को मिलती है। यह भी रोचक है कि शेर की दहाड़ को मां दुर्गा की ध्वनि ही माना जाता है, जिसके आगे संसार की बाकी सभी आवाजें कमजोर लगती हैं।
मां सरस्वती और हंस संकेतों की भाषा में पवित्रता और जिज्ञासा का प्रतीक है जो कि ज्ञान की देवी मां सरस्वती के लिए सबसे बेहतर वाहन है। मां सरस्वती काहंस पर विराजमान होना यह बताता है कि ज्ञान से ही जिज्ञासा को शांत किया जा सकता है और पवित्रता को जस का तस रखा जा सकता है।
भगवान विष्णु और गरुण प्रतीक हैं दिव्य शक्तियों और अधिकार के। भगवद् गीता में कहा गया है कि भगवान विष्णु में ही सारा संसार समाया है। सुनहरे रंग का बड़ेआकार का यह पक्षी भी इसी ओर संकेत करता है। भगवान विष्णु की दिव्यता और अधिकार क्षमता के लिए यह सबसे सही प्रतीक है।
मां लक्ष्मी के वाहन उल्लू को सबसे अजीब चयन माना जाता है। कहा जाता है कि उल्लू ठीक से देख नहीं पाता, लेकिन ऐसा सिर्फ दिन के समय होता है। उल्लू शुभता और धन-संपत्ति के प्रतीक होते हैं।
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⚜️ दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।

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