मध्य प्रदेश

दोषियो के दोष से भय बंधित हुई न्याय पालिका

चैनल एवं पत्रकार पर ही मानहानि का दावा करने की कोशिश
रिपोर्टर : प्रशांत जोशी
रायसेन । एक और जहां भारत का संबिधान भारतीय गणराज्य में निवासरत हर व्यक्ति को अपने विचार, विमर्श रखने की निष्पक्ष स्वतंत्रता प्रदान करता है, तो वही लोकतंत्र का चतुर्थ आधार स्तंभ कहे जाने वाली पत्रकारिता इस स्वतंत्रता का सुनियोजित तरीके से पालन कर हर वर्ग के मुद्दे को निस्पक्षता से सबके सामने पेश करती है । लेकिन समय की पराकाष्ठा, सत्ताधारियों की सत्ता का रुआब, धनवानाे द्वारा अपने धन का मीडिया पर नाजायज दवाब, दवंगियो की दबंगई कई बार मीडिया के इस नैतिक कार्य में खलल पैदा करती है ।
मामला मध्य प्रदेश के जिला विदिशा में होने वाले अपराधो की तीव्र वृद्धि में हुए एक और इजाफे का है, जहां शराब व्यापारी ऊदल यादव द्वारा कभी सरकारी ठेके पर उचित मूल्य दर से ज्यादा पैसों में शराब बेची जा रही है तो कभी शराब की कालाबाजारी की जा रही है। व्यापारी द्वारा विदिशा शहर के सभी 9 सरकारी ठेको को नीलामी के दौरान अपने अधीन करने का उद्देश्य कालाबाजारी का अमिट साम्राज्य खड़ा करना था । जब लोगो ने इस साम्राज्य को खड़ा करने में व्यापारी की मदद नही की तो गुस्साए व्यापारी के लोगो ने किशोर बालक को दिन दहाड़े बीच सड़क पर बोलेरो कार से तो घसीटा ही साथ में जब मीडिया द्वारा इस खबर को प्रसारित किया गया तो पीड़ित की मां के दिए हुए ब्यान अनुसार कैमरा मैन मनोज परिहार नामक व्यक्ति द्वारा चैनल एवं एडिटर इन चीफ अभिषेक मालवीय चैनल के विदिशा ब्यूरो चीफ रंजीत सिंह ठाकुर पर मानहानि का केश करने की बात कही जा रही है ।
धनवान व्यापारी शहर की कानून व्यवस्था को अपने निजी फायदे के अनुसार उपयोग करते हुए संविधान में वर्णित न्याय पालिका के नियम कानूनों को दिन प्रतिदिन अपने रूतबे तले रौंदता जा रहा है”
अनैतिक गतिविधियों में दिन रात लीन रहने वाले लोगों द्वारा किए गए अपराध को अगर मीडिया आपके और हमारे सामने उजागर करती है तो उन्ही लोगो द्वारा मीडिया पर अपने पैसे और नाजायज ताकत का मालिकाना हक जता कर अपने जुर्म के छुपाना भारतीय गणराज्य में वर्णित अधिकारो का अपमान करती है ।
1) क्या भारतीय संविधान अब इन दोषियों का पक्षधर हो
गया ..?
2) न्यायपालिका अब इन सत्ताधारियों की गुलाम हो गई है ..?
3) क्या दोषियों के जुर्म को जनता के समक्ष उजागर करने पर दोषियों द्वारा न्यायपालिका को अपने वश में कर मीडिया पर अनैतिक कार्यवाही सही है .?
सच की राह पर, सत्य के मार्गदर्शन के लिए मीडिया का साथ दे ।

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