प्रदोष व्रत मई में कब? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और अन्य बड़ी जानकारियां
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🔱 प्रदोष व्रत मई में कब? नोट कर लें डेट, शुभ मुहूर्त और अन्य बड़ी जानकारियां
मई माह का पहला प्रदोष व्रत 3 मई 2023, बुधवार के दिन रखा जाएगा. अगर भोलेनाथ का यह व्रत बुधवार के दिन पड़ता है तो इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है. वैशाख माह में पड़ने वाला ये आखिरी प्रदोष व्रत होगा. प्रदोष व्रत हर महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी को रखा जाता है. त्रियोदशी तिथि के स्वामी शिव है. वैशाख माह का आखिरी प्रदोष व्रत बहुत खास माना जा रहा है, क्योंकि इस दिन बुधवार भी है. ऐसे में व्रती को शिव साधना का उत्तम फल प्राप्त होगा.
🪐 बुध प्रदोष व्रत करने से व्यक्ति को संतान, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है.आइए जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से वैशाख के बुध प्रदोष व्रत की डेट, मुहूर्त और महत्व. पंचांग के अनुसार बुध प्रदोष व्रत के दिन दो शुभ योगों का निर्माण हो रहा है.पहला सर्वार्थ सिद्धि योग और दूसरा रवि योग.
🌟 सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 39 मिनट से रात्रि 08 बजकर 56 मिनट तक रहेगा.
❄️ रवि योग रात्रि 08 बजकर 56 मिनट से अगली सुबह 05 बजकर 38 मिनट तक रहेगा.
👉🏽 इस दिन इन शुभ योगों में भोलेनाथ की आराधना करने से सुख की प्राप्ति होती है और सभी दुख दर्द दूर हो जाते हैं.
📆 वैशाख बुध प्रदोष व्रत 2023 डेट
वैशाख का दूसरा प्रदोष व्रत 3 मई 2023 को रखा जाएगा. इस दिन बुधवार होने से ये बुध प्रदोष व्रत कहलाएगा. पंचांग के अनुसार वैशाख शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 2 मई 2023 रात 11:17 मिनट से शुरू होगी और अगले दिन 3 मई तक रहेगी. इसीलिए प्रदोष व्रत उदया तिथि में त्रयोदशी के दिन 3 मई , बुधवार के दिन रखा जाएगा.
✡️ बुध प्रदोष व्रत पूजन विधि
प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव व माता पार्वती का पूजन किया जाता है. यह व्रत सुख-समृद्धि, खुशहाली और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखा जाता है. इस व्रत में पूजा प्रदोष काल यानि शाम के समय की जाती है. इसलिए इसे प्रदोष व्रत कहते हैं. व्रत के दिन सुबह उठकर स्नान आदि करें और भगवान की अराधना करें. फिर दिन भर व्रत रखें और शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव व माता का विधि-विधान से पूजन करें. प्रदोष काल की पूजा हमेशा शाम को 4 बजकर 30 मिनट से लेकर शाम 7 बजे के बीच ही करनी चाहिए क्योंकि यही प्रदोष काल होता है.
💁🏻♀️ कैसे मनाएं प्रदोष व्रत
इस दिन लोगों को सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि के बाद भगवान शिव की उपासना करनी चाहिए। जो लोग व्रत रखते हैं उन्हें अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए। अगर आप चाहें तो फलाहार कर सकते हैं। इस दिन अपने मन में नकारात्मक विचार न आने दें। साथ ही इस दिन व्यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। ध्यान रखें, शाम के समय भगवान शिव की उपासना करने से पहले स्नान जरूर कर लें।
🤷🏻♀️ प्रदोष व्रत का महत्व
इस बार प्रदोष व्रत की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त शाम में 6 बजकर 57 मिनट से लेकर 9 बजकर 6 मिनट तक रहेगा। कहा जाता है कि बुधवार का दिन प्रदोष व्रत रखने से व्यक्ति को बुध ग्रह से संबंधित दोष समाप्त हो जाते हैं।



