लाड़ली 3647 बहनाओं ने भरा एक हजार रुपये पाने के लिए फार्म
मुख्यमंत्री जी पात्र और अपात्र लाड़ली बहना के नियम भी सार्वजनिक कीजिए
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । शासन की योजनाएं जो नगर परिषद से संचालित होती हैं उनके क्रियान्वयन में नगर परिषद किस तरह की पारदर्शिता दिखाती यह हम प्रधानमंत्री आवास योजना में देख चुके, इस आवास योजनाएं में जमकर शिष्टाचार(भ्रष्टाचार) अपनाते हुए अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक में कमीशन तय कर रखा हैं पूर्ण पात्र हितग्राहियों से बीस से तीस हजार कम अपात्र से पचास हजार और जिसके न भूमि हैं और झोपड़ी उससे एक लाख रुपये का शिष्टाचार शुल्क बसूलकर उसे लाभ दिलाया गया। हालांकि यह शिष्टाचार के कोई प्रमाणित दस्तावेज नहीं हैं लेकिन जिस तरह प्रधानमंत्री आवास बाँटे गये बह चीख चीख कर कह रहे है कि पैसा बोलता हैं । अगर प्रधानमंत्री आवासों की जाँच हो जाए तो जिम्मेदार अधिकारी नौकरी से गायब हो जायेंगे। खैर अब बात करते हैं लाड़ली बहना योजना जिसका मकसद चुनाव में सीधे सीधे वैध तरीके से एक हजार का लालच देकर अपनी छबि चमकाने का काम दिखाई देता हैं । क्योंकि अगर बहनों और भाँजियो़ की चिंता होती तो आज युवा बेरोजगारी और भुखमरी से नहीं जूझते ।
नगर परिषद वादों में नोटिस चश्पा कर रही अपील।
वाकई एमपी अजब गजब का नजारा हमारे शहर में आयेदिन देखने को नजर आ ही जाता हैं । अब लाड़ली बहना योजना में नगर परिषद के कर्मचारियों ने घर घर जाकर लाड़ली बहनों के फार्म भरे । जिनकी तादाद 3647 निकली , लेकिन अब नगर परिषद वार्डो में नोटिस चश्पा कर वार्ड वासियों से अपील कर रही हैं कि आप जो बहना लाड़ली बहना के लिए अपात्र हैं उसका नाम दीजिएगा हम काट देगें । इससे बड़ा मजाक और क्या हो सकता कोन पड़ोसी चाहेगा कि में बुराई लू । अगर मुख्यमंत्री लाड़ली बहना में कोई पात्र और अपात्र की गाइडलाइन र्निधारित थी तो नगर परिषद को फार्म भरने से पहले ही तय करना चाहिए था ।
यह योजना का भी नगर परिषद पलीता लगाने के लिए कमर कस चुकी हैं ।



