राष्ट्रकवि डॉक्टर मैथिलीशरण गुप्त की जयंती परंपरागत रूप से मनाई गई

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । राष्ट्रकवि डॉक्टर मैथिलीशरण गुप्त की जयंती बजरिया मंदिर परिसर में परंपरागत रूप से हर्ष उल्लास के साथ मनाते हुए राष्ट्रकवि के चित्र पर माल्यार्पण किया गया।
कार्यक्रम में समाज के गणमान्य व्यक्तियों पूर्व अध्यक्ष बद्री विशाल गुप्ता अधिवक्ता, वर्तमान अध्यक्ष रामस्वरूप गुप्ता, कोषाध्यक्ष कैलाश नारायण गुप्ता, कार्यवाहक अध्यक्ष प्रकाश गुप्ता, रामबाबू गुप्ता, रमेशचंद्र गुप्ता, संदीप गुप्ता, माखनलाल गुप्ता, प्रहलाद गुप्ता, मुकेश गुप्ता, मंदिर पुजारी नंदकिशोर देवलिया आदि समाज बंधु उपस्थित रहे। मैथिलीशरण की साहित्य कृतियां पर प्रकाश डालते हुए अपने संबोधन में बद्री विशाल गुप्ता अधिवक्ता ने बताया राष्ट्र कवि ने समाज में महिलाओं की उन्नति के लिए दुर्दशा पर प्रहार करते हुए लिखा है अबला जीवन तेरी यही कहानी आंचल में है दूध और आंखों में है पानी, इसी प्रकार राष्ट्र कवि ने भारतीय एकता सामाजिक एकता के विषय में प्रसिद्ध रचनाएं लिखी है। भारत भारती उस समय काफी राष्ट्रीय एकता की उद्घोषक रही
उन्होंने राष्ट्रकवि के जीवन से प्रेरणा लेते हुए समाज एवं राष्ट्र हित में कार्य करने की बात कही।
वहीं अध्यक्ष रामस्वरूप गुप्ता ने राष्ट्रकवि की कालजयी कृति ‘भारत भारती’ पर वक्तव्य एवं कविता पाठ किया।
रामबाबू गुप्ता ने अपने उद्बोधन में कहा कि मैथिलीशरण गुप्त की काव्य रचना भारत भारती ने 1912 में अंग्रेजी हुकूमत की नींव हिला दी थी, जिसके कारण इस पुस्तक पर तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने प्रतिबंध भी लगाया था। स्वर्णलता, मधुप, रसिकेंद्र भारती, नित्यानंद जैसे उपनामों से साहित्य रचने वाले इस महाकवि को हिंदी जगत में दद्दा नाम से भी जाना जाता है। महात्मा गांधी ने उन्हें राष्ट्रकवि की उपाधि दी थी। अंत में सभी को मिठाई का वितरण कर कार्यक्रम का समापन किया गया।



