मध्य प्रदेश

अध्यक्ष का पद अनारक्षित महिला होने से महिला प्रत्याशी मार रही जोर

अनारक्षित मुक्त एवं अनारक्षित महिला वार्डो में घमासान के आसार
भाजपा से 15 वार्डो के लिए 100 से अधिक उम्मीदवार
अभी तक मात्र दो नामांकन

सिलवानी। लंबे अंतराल के बाद नगरीय चुनाव की घोषणा से एक बार फिर चुनावी मौसम आ गया और नई परिषद के गठन के लिए राजनीतिक दलों के द्वारा अपनी अपनी गोटी बिठाने का प्रयास किया जाएगा। लेकिन इस बार प्रदेश सरकार द्वारा अध्यक्ष पद का चुनाव पार्षदों से कराने के निर्णय से कई उम्मीदवारों के चेहरा मुरझा गये है तो कई मत चूको चौहान की तर्ज पर अपने वार्डो से अध्यक्ष पद का रास्ता ढ़ूढ रहे है। पिछली निकाय का कार्यकाल 5 होने के बाद लगभग दो साल प्रशासक के बतौर कार्य करती रही। अब पार्षद पद के प्रत्याशी सत्ताधारी भाजपा और कांग्रेस से टिकट की जोड़ तोड़ कर रहे है। भाजपा द्वारा 11 सदस्यीय समंवय समिति बनाकर प्रत्येक वार्डो से पार्टी के उम्मीदवारों से आवेदन लिये गये। नगर के 15 वार्डो से लगभग 100 आवेदन प्राप्त हुये वही कांग्रेस में 35 उम्मीदवारों ने पार्टी टिकट के आवेदन किया है।
इस समय यह प्रश्न एक मजबूत वाक्या बनकर नगरवासियों के सामने खड़ा है। वैसे तो इस नगर में तीसरी बार नगरीय चुनाव सम्पन्न होगे, परंतु इस बार चुनाव को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्सुकता है। लेकिन बीते पांच वर्ष विकास के मायनों में इस नगर के लिए कितना महत्वपूर्ण था और उसका कितना उपयोग किया जा सका, यह महत्वपूर्ण प्रश्न सामने है? निष्चित तौर पर बीते पांच साल में इस नगर में क्या उपलब्धियां प्राप्त की और किन नई योजनाओं पर काम होकर नगरवासियों को इसका लाभ मिल सका। यह समय अब ज्यादा सोचने और समझने का है। यहां इस बात को भी साफ किया जा सकता है। बीते पांच वर्ष इस नगर के लिए महत्वपूर्ण क्यों था। बीते 5 वर्षो में के दौरान प्रदेष में भाजपा की सरकार काबिज थी और उस सरकार के मुखिया शिवराजसिंह चौहान है जो वर्तमान में भी अपनी जिम्मेदारियों का बखूबी निर्वाहन कर रहे है। वही पूर्व केबिनेट मंत्री और क्षेत्रीय विधायक ठाकुर रामपालसिंह राजपूत सिलवानी विधानसभा का प्रतिनिधित्व करते मुख्यमंत्री के खास सिपेसलार है। वही केन्द्र में भाजपा की मोदी सरकार है और इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हुए सांसद रमाकांत भार्गव है। जो कि क्षेत्र से नदारत ही रहते है। आम नागरिक अधिकतर भाजपा कार्यकर्ताओं ने ही सांसद जी चेहरा तक नही देखा होगा। अब ऐसे में विकास को लेकर नगर सहित सम्पूर्ण क्षेत्र वासियों की निगाहें उन पर टिकी होती है।
उम्मीदवारों की साख का सवाल रहेगा पार्षद का चुनाव
आरक्षण में नगर परिषद अध्यक्ष का पद अनारक्षित महिला होने से सबकी निगाहें महिला पार्षद प्रत्याषियों पर टिकी हुई है। 11 जून से पार्षदों के नामांकन प्रारंभ हो गये है। अभी तक कई उम्मीदवार नामांकन हेतु फार्म तो ले गये हैं परंतु जमा नहीं किये है।
सिलवानी नगर परिषद बनने के बाद होने वाले तीसरे चुनाव में उम्मीदवारों के लिए पार्टियों की अपेक्षा उम्मीदवारों की साख महत्वपूर्ण है। भाजपा और कांग्रेस से मजबूत एवं मिलन सार प्रत्याषी ही अपनी एवं पार्टी की छबि के कारण पार्षद पद पर कब्जा कर सकता है। लेकिन लगातार भाजपा एवं कांग्रेस के चुनावी गणित एनवक्त पर निर्दलीयों के कारण चुनावी गणित फैल हो जाते है। वही जातिगत समीकरण भी चुनाव को काफी प्रभावित करते है। जहां तक गुटबाजी का सवाल से इंकार नहीं किया जा सकता है।
भाजपा कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशियो का इंतजार
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टी द्वारा चार दिन बीतने के बाद भी अपने प्रत्याषी घोषित नहीं किये है। भाजपा से ही 15 वार्डो के लिए 100 से अधिक आवेदन पार्टी टिकट के लिये किये गये है। कांग्रेस से भी लगभग 35 आवेदन हुये है। दोनों ही दलों के कार्यकर्ता असमंजस की स्थिति में है। पार्टी के टिकट घोषित होने के बाद कई रूठे और असंतुष्ट कार्यकर्ता निर्दलीय प्रत्याषी के रूप् में अपना भाग्य अजमाने मैंदान में कूदने तैयार है।
दो नामांकन ही हुये जमा
14 जून तक नामांकन चैथे दिन वार्ड 13 से एक कांग्रेस प्रत्याषी और वार्ड 8 से एक निर्दलीय प्रत्याषी कुल दो आवेदन पत्र ही रिटनिंग आफीसर के पास जमा किये गये है।

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