धार्मिक

अहंकारी मनुष्य सत्य और असत्य में भेद नहीं कर पाता है : आचार्य प्रदुम्न भार्गव

रिपोर्टर : प्रफुल्ल भार्गव
गैरतगंज । गैरतगंज अंचल के ग्राम सिहोरा में धाकड पटेल परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के तृतीय दिवस कथा व्यास आचार्य श्री प्रदुम्न भार्गव ने कहा कि मानव को कभी किसी बात या धन का अहंकार नहीं करना चाइए, किसी की निदा नहीं करना चाइए, ये जीव आत्मा का हक सिर्फ धर्म और भजन का है। बाकी कौन क्या लाया और क्या लेके जायेगा, एक दिन सब को ही इस शरीर को छोड़कर जाना है। बस तुम्हारे द्वारा किए गए धर्म पुण्य ही साथ जाएंगे बाकी सब यही रहेगा।
श्रीमद् भागवत सुनने का लाभ भी कई जन्मों के पुण्य से प्राप्त होता है। श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने और मरने की कला सिखाती है। मनुष्य को जीवन परमात्मा ने दिया है, लेकिन जीवन जीने की कला हमें सत्संग से प्राप्त होती है। सत्संग का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। यह सद्विचार पिपरिया से पधारे हुए आचार्य श्री प्रदुम्न भार्गव महाराज ने श्री सिद्ध स्थान सीहोरा धाम मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा में व्यक्त किए। भगवान सदैव भक्तों के वश में है। भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तब भगवान श्री कृष्ण ने बृज में जन्म लेकर कंस का अंत कर पापी राजा से भक्तों को मुक्ति दिलाई।

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