धार्मिकमध्य प्रदेश

आचार, विचार और व्यवहार की पवित्रता से जीवन शैली को बदला जा सकता है : सुरेंद्र आचार्य

रिपोर्टर : अशोक साहू
उदयपुरा । निकटवर्ती ग्राम चंद्रपुरा में मानस यात्रा के पहुंचने पर ग्राम के खेड़ापति शिव मंदिर पर मानस सत्संग का आयोजन किया गया।
आयोजक गुलजार राजपूत जनपद सदस्य द्वारा यात्रा में पहुंचे विद्वानों एवं अतिथियों का सम्मान किया, सत्संग सभा को श्री रामचरित मानस विद्यापीठ के आचार्य पंडित सुरेंद्र शास्त्री ने संबोधित करते हुए कहा कि गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्री रामचरित मानस के माध्यम से हमें जीवन जीने की कला सिखाई है, जब व्यक्ति मोह के वश हो जाते हैं, शुभ कर्मों को लोभ, हड़प लेता है, वेद के विरोध में लोग लगे रहते हैं, ब्राह्मण वेदों को बेचने वाले, और राजा प्रजा को खा डालने वाले होते हैं, कोई वेद की आज्ञा जब नहीं मानता तो समझा जाए कि वह कलयुग के प्रभाव में आ चुका है, इस बात का उल्लेख मानस के उत्तरकाड में कागभुसुंडि गरुड़ प्रसंग से प्राप्त होता है, कलियुग के प्रभाव के बचने से हमें आचार्, विचार और व्यवहार में सात्विक परिवर्तन लाना होगा, सत्संग सभा को राष्ट्रीय प्रवक्ता रामनरेश शास्त्री, नर्मदा प्रसाद रामायणी, कुंवर लाल रामायणी, सुदामा शास्त्री, देवव्रत राजोरिया एवं कैलाश दुबे ने मानस के माध्यम से सुंदरतम व्याख्याएं प्रस्तुत की! कार्यक्रम संयोजक चतुरनारायण अधिवक्ता ने युवाओं को नशा मुक्त एवं शाकाहार जीवन शैली अपनाने वाले संतो के संदेश का वाचन किया, मानस ग्रंथ की मंगल आरती में निरंजनसिंह पूर्व शिक्षक, सुरेंद्र परमार पूर्व सरपंच, अखिलेश परमार, मानसिंह राजपूत, रामबाबू पवैया, लालसिंह पवैया, दीवानसिंह साहू, परशुराम साहु, कैलाश बाबूजी, फूलसिंह धाकड़, बीरन सिंह पटेल, वसंत राजपूत, सुपयार सिंह, रामकुमार सोनी, सत्यम नौरियां, गोलू हरिजन, सहित बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने उपस्थित होकर सत्संग लाभ अर्जित किया।

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