आज का पंचांग आज का पंचांग रविवार, 21 जनवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 21 जनवरी 2024
21 जनवरी 2024 दिन रविवार को पौष मास के शुक्ल पक्ष कि पुत्रदा नाम का एकादशी व्रत है। आज की इस एकादशी व्रत को दक्षिण भारत में वैकुण्ठ एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन दक्षिण भारतीय मंदिरों में भगवान वैकुंठनाथ का भव्य श्रृंगार एवं दर्शन होता है। आज सभी सनातनियों को भगवान राम-कृष्ण या फिर भगवान विष्णु के मंदिरों में अवश्य जाकर भगवान का दर्शन करना चाहिये। आप सभी एकादशी व्रतियों को एकादशी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें। शास्त्रानुसार एकादशी सर्वश्रेष्ठ एवं सर्वाधिक पुण्यदायी व्रत होता है। इसे हर एक व्यक्ति को अवश्य करना चाहिये। आप सभी सनातनियों को पुत्रदा अथवा वैकुण्ठ एकादशी व्रत हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथी – रविवार पौष माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 07:27 PM तक उपरांत द्वादशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी तिथि के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र रोहिणी 03:52 AM तक उपरांत म्रृगशीर्षा
🪐 नक्षत्र स्वामी – नक्षत्र का स्वामी शुक्र है।नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा होता है। रोहिणी नक्षत्र के देवता ब्रह्मा हैं।
🔊 योग – शुक्ल योग 09:46 AM तक, उसके बाद ब्रह्म योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 07:23 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 07:26 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : रविवार को शुभ गुलिक काल 02:53 पी एम से 04:17 पी एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सायं 16:34 बजे से 17:56 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो पान एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:40:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:20:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:20 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:11 पी एम से 12:54 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:18 पी एम से 03:01 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:48 पी एम से 06:15 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:51 पी एम से 07:11 पी एम
💧 अमृत काल : 12:34 ए एम, जनवरी 22 से 02:13 ए एम, जनवरी 22
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, जनवरी 22 से 12:59 ए एम, जनवरी 22
🌸 द्विपुष्कर योग : 03:52 ए एम, जनवरी 22 से 07:14 ए एम, जनवरी 22
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को स्वर्ण दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – अयोध्या में राम मंदिर में राम लला के प्राण प्रतिष्ठा उत्सव/ द्विपुष्कर योग/ भद्रा/पुत्रदा एकादशी व्रत (सर्वे)/ वैकुंठ एकादशी (द.भा)/ राष्ट्रीय आलिंगन दिवस, राश बिहारी बोस जन्म दिवस, अभिनेत्री रूबीना अली जन्म दिवस, क्रांतिकारी हेमू कलानी शहीद दिवस, क्रांतिकारी रासबिहारी बोस शहीद दिवस, वैज्ञानिक अनुसंधानकर्ता ज्ञान चंद्र घोष पुण्य तिथि, अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत जन्म दिवस, मेघालय स्थापना दिवस, मणिपुर स्थापना दिवस, त्रिपुरा स्थापना दिवस
✍🏼 विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।
🗽 Vastu tips ⛲
सुबह आंख खुलते ही इन 5 चीजों को नहीं भूलना चाहिए आक्रामक पशु-पक्षियों की तस्वीरें न देखें: वास्तु शास्त्र के अनुसार, सुबह उठते ही देवी-देवताओं की पूजा करने के अलावा कुछ ऐसे काम करने चाहिए जिससे आप पूरे दिन खुश रहेंगे। लोगों को सुबह उठते ही ऐसी तस्वीरें नहीं देखनी चाहिए जिनमें जानवरों की आकृतियां आक्रामक हों। ऐसी तस्वीरें देखने से कई मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। किसी से विवाद हो सकता है।
सुबह उठते ही अपना चेहरा शीशे में न देखें कुछ लोग सुबह उठते ही अपना चेहरा शीशे में देखते हैं। ऐसा करना वास्तु शास्त्र के अनुसार अशुभ माना जाता है।
छाया नहीं दिखनी चाहिए
ऐसा माना जाता है कि सुबह उठते ही अपनी या किसी और की परछाई नहीं देखनी चाहिए। सुबह के समय परछाई देखना अशुभ या अशुभ माना जाता है। परछाई देखने से व्यक्ति में भय, तनाव और भ्रम बढ़ जाता है।
तैलीय गंदगी को मत देखो
सुबह उठते ही आपको तैलीय या गंदे बर्तन नहीं देखने चाहिए। कहा जाता है कि सुबह तेल से भरा बर्तन देखने से नकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है। इसलिए बचे हुए बर्तनों को रात में साफ करना चाहिए। इसे सुबह के लिए नहीं छोड़ना चाहिए.
सुबह उठकर कुत्तों को बाहर लड़ते हुए नहीं देखना चाहिए। अशुभ होता है.
सुबह उठते ही तुरंत टॉयलेट कमोड की ओर नहीं देखना चाहिए। इसमें राहु का वास होता है।
गुस्से पर काबू पाने के ज्योतिष उपाय: अगर आप गुस्से पर काबू पाना चाहते हैं तो ज्योतिष उपाय करें।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शनिदेव स्वयं कहते हैं कि ‘जो शनिवार को पीपल को स्पर्श करते है, उसको जल चढ़ाता है, उसके सब कार्य सिद्ध होंगे तथा मुझसे उसको कोई पीड़ा नहीं होगी |’ ग्रहदोष और ग्रहबाधा जिनको भी लगी हो, वे अपने घर में 9 अंगुल चौड़ा और 9 अंगुल लम्बा कुमकुम का स्वस्तिक बना दें तो ग्रहबाधा की जो भी समस्याएँ है, दूर हो जायेगी |
स्नान के बाद पानी में देखते हुए ‘हरि ॐ शांति’ इस पावन मंत्र की एक माला करके वह पानी घर या जहाँ भी अशांति आदि हो, छिडक दे और थोडा बचाकर पी लें फिर देख लो तुम्हारा जीवन कितना परिवर्तित होता है |
🫀 आरोग्य संजीवनी 🫁
नेत्रज्योति की रक्षा हेतु प्रयोग भोजन करने के बाद आँखों पर पानी छिडके तो ठीक है, नहीं तो अपनी गीली हथेलियाँ आँखों पर रखें तो भी नेत्र के रोग मिटते है | दोनों हथेलियाँ रगड़कर ‘ॐ ॐ ॐ मेरी आरोग्यशक्ति जगे, नेत्रज्योति जगे ….’ ऐसा करके आँखों पर रखने से भी आँखों की ज्योति बरकरार रहती है और आँखों के रोग मिटते हैं |
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
शव को ले जाते वक्त “राम नाम सत्य है” ही क्यों बोला जा जाता है? भगवान शिव का नाम क्यों नहीं जिसमें सारे ब्रह्माण्ड निहित हैं?तो क्या आप ये समझते हैं कि शिव और राम अलग हैं?
स्वयं महादेव रामायण में अनेक बार राम नाम की महिमा बताते हैं। रामचरितमानस में एक प्रसंग आता है जब माता पार्वती महादेव से पूछती है कि वो किसके ध्यान में मग्न रहते हैं? तब भोलेनाथ कहते हैं कि वे सदा श्रीराम का स्मरण करते हैं।
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना। सत हरि भजनु जगत् सब सपना।।
अर्थात: हे उमा! मैं अपने अनुभव से कहता हूँ कि हरि भजन के अतिरिक्त संसार मे सब मिथ्या है।
उसी प्रकार मानस के अनुसार जब 27वे कल्प में माता सती को श्रीराम के विष्णु अवतार होने पर शंका हो जाती है तो भगवान शंकर उन्हें समझाते हुए कहते हैं –
सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।
अर्थात: सुनो सती! नारी स्वभाव के कारण तुम ऐसा सोच रही हो, किन्तु तुम्हे (राम के विषय में) ऐसा शंशय अपने मन मे नही रखना चाहिए।
एक और कथा आती है जब माता पार्वती भोलेनाथ से पूछती है कि आप क्या जपते रहते हैं? तब भगवान शंकर ने उन्हें विष्णु सहस्रनाम सुनाया और कहा मैं श्रीहरि का नाम जपता रहता हूँ। इसपर माता कहती हैं कि ये तो बहुत बड़ा है जिसे सर्वसाधारण याद नही कर सकते। तब महादेव कहते हैं कि जो भगवान विष्णु का सहस्त्रनाम याद नही रख सकते वे केवल राम का नाम ले लें क्योंकि एक राम नाम सहस्त्र विष्णु नामों के बराबर है।
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने।।
अर्थात: एक राम नाम सहस्त्र विष्णु नाम के समान है।वे आगे कहते हैं –
आपदामपहर्तारम दाताराम सर्वसम्पदाम। लोकाभिराराम श्रीरामम भूयो भूयो नमाम्यहम।।
अर्थात: यह राम नाम सभी आपदाओं को हरने वाला एवं सभी संपदा प्रदान करने वाला है। अतः मैं उन भगवान को बारम्बार प्रणाम करता हूँ ।इसके आगे वे फिर कहते हैं –
भर्जनम भवबीजानामर्जनम सुखसम्पदाम। तर्जनम यमदूतानाम रामरामेति गर्जनम।।
अर्थात: राम राम के उच्चारण से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और यमदूत सदैव मनुष्य से दूर रहते हैं।
वे फिर कहते हैं
राम राम शुभ नाम रटि, सबखन आनंद – धाम। सहस नाम के तुल्य है, राम – नाम शुभ नाम।।
अर्थात: स्वयं भी राम नाम लेना चाहिए और दूसरों से भी ये नाम बुलवाना चाहिए। संसार मे इससे सुलभ उपाय और कुछ नही है।
अब अंत में आते हैं मूल प्रश्न पर जिसका उत्तर भी रामायण में दिया गया है। जब माता पार्वती महादेव से पूछती हैं कि आप चिता की भस्म अपने शरीर पर क्यों लगते हैं तब भगवान शंकर उन्हें श्मशान ले जाते हैं जहाँ सभी “राम नाम सत्य है” का उच्चारण कर रहे होते हैं। तब महादेव कहते हैं कि जिस निश्वर शरीर का अन्य राम नाम के साथ होता है उसी की भस्म मैं अपने शरीर पर मलता हूँ ताकि राम नाम मुझमे अंगीकार हो जाये।
ये तो हुआ महादेव द्वारा राम नाम की महिमा का बखान, अब जाते जाते श्रीराम द्वारा शिव नाम की महिमा भी सुन लें। वैसे तो श्रीराम के आराध्य भगवान शंकर ही थे और रामायण में शिव नाम की बहुत महिमा बताई गई है और इसके लिए रामायण और रामचरितमानस में कई प्रसंग हैं। किन्तु यदि आप मानस में श्रीराम द्वारा कहे गए इस एक दोहे को पढ़ लेंगे तो श्रीराम के लिए शिव नाम की महत्ता आपकी समझ में आ जाएगी
शिव द्रोही मम दास कहावा। सो नर मोहि सपनेहु नहि पावा।।
अर्थात: श्रीराम कहते हैं – जो स्वयं को मेरा भक्त कहता है किन्तु मन ही मन मे शिव से द्रोह रखता है (उन पर श्रद्धा नही रखता) वैसा मनुष्य स्वप्न में भी मुझे प्रिय नही हो सकता।
जो राम हैं वही शिव हैं। यदि आप राम नाम लेते हैं तो शिव नाम का फल स्वतः ही आपको प्राप्त हो जाता है और यदि आप शिव का स्मरण करते हैं तो राम नाम का पुण्य भी आपको मिलता है। जो इन दोनों में अंतर करता है वो निश्चय ही सत्य से अनभिज्ञ है।
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।
एकादशी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वो धार्मिक तथा सौभाग्यशाली होता है। मन, बुद्धि और हृदय से ऐसे लोग पवित्र होते हैं। इनकी बुद्धि तीक्ष्ण होती और लोगों में बुद्धिमानी के लिए जाने जाते है। इनकी संतान गुणवान और अच्छे संस्कारों वाली होती है, इन्हें अपने बच्चों से सुख एवं सहयोग भी प्राप्त होता है। समाज के प्रतिष्ठित लोगों से इन्हें मान सम्मान मिलता है।

