ज्योतिष

आज का पंचांग आज का पंचांग शनिवार, 10 फरवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 10 फरवरी 2024

10 फरवरी 2024 दिन शनिवार माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि है और आज गुप्त नवरात्रि का पहला दिन है। अर्थात आज से गुप्त नवरात्रि आरम्भ हो रही है। इस गुप्त नवरात्रि में गुप्त रूप से देवी अथवा अपने इष्ट देवता की आराधना करनी चाहिये। आज श्रीमद् वल्लभाचार्य जी की जन्म जयन्ती महोत्सव भी है। आप सभी सनातनी बंधुओं को “श्रीमद् वल्लभाचार्य जी के जन्म जयन्ती महोत्सव एवं माघ मास के गुप्त नवरात्रा में माता चंडी के उपासना” की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ। मातारानी से हमारी हार्दिक प्रार्थना यही है, कि आप सभी सनातनियों के सभी समस्याओं का समाधान कर उन्हें सुखद एवं आनंददायी जीवन प्रदान करें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार माघ माह के शुक्ल पक्ष प्रतिपदा तिथि 12:47 AM तक उपरांत द्वितीया
🖍️ तिथि स्वामी – प्रतिपदा तिथि के देवता हैं अग्नि। इस तिथि में अग्निदेव की पूजा करने से धन और धान्य की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र धनिष्ठा 08:33 PM तक उपरांत शतभिषा
🪐 नक्षत्र स्वामी : धनिष्ठा नक्षत्र का स्वामी मंगल है। तथा राशि स्वामी शनि है। तथा नक्षत्र के देवता वसु है।
🔊 योग – वरीयान योग 02:53 PM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : किंस्तुघ्न – 02:38 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 12:47 ए एम, फरवरी 11 तक बालव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6 से 7:30 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:00 से 10:30 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:29:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:31:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:20 ए एम से 06:12 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:46 ए एम से 07:04 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:13 पी एम से 12:58 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:26 पी एम से 03:10 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:04 पी एम से 06:31 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:07 पी एम से 07:25 पी एम
💧 अमृत काल : 11:26 ए एम से 12:50 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:09 ए एम, फरवरी 11 से 01:01 ए एम, फरवरी 11
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-देवी मंदिर में तिल का तेल दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – गुप्त नवरात्रि प्रारंभ/पंचक प्रारंभ 10.02/बुधास्त/द्विपुष्कर योग/ माघ शुक्लादि/ टेडीबियर डे/ नयी दिल्ली भारत राजधानी दिवस, लाल बहादुर शास्त्री जयन्ती, विश्व दलहन दिवस, राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस, कवि कुमार विश्वास जन्म दिवस, राष्ट्रीय छाता दिवस, भारतीय राजनितिज्ञ दरबारा सिंह जन्म दिवस, दिग्गज नेता वीपी माधव राव सिंधिया जयन्ती, कुरियाकोस एलियास चावारा जयन्ती, परमानंद श्रीवास्तव जयन्ती, सुदामा पांडे धूमिल पुण्य तिथि, सुरेंद्र कुमार श्रीवास्तव स्मृति दिवस।
✍🏼 विशेष – प्रतिपदा तिथि को कद्दू एवं कूष्माण्ड का दान एवं भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। प्रतिपदा तिथि वृद्धि देनेवाली तिथि मानी जाती है। साथ ही प्रतिपदा तिथि सिद्धिप्रद तिथि भी मानी जाती है। इस प्रतिपदा तिथि के स्वामी अग्नि देवता हैं। यह प्रतिपदा तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है।
🗼 Vastu tips 🗽
ड्राइंग रूम में व बच्चों के कमरे में हल्के रंग के पर्दे लगाना शुभ है। वहीं दीवार पर चटकदार लाल, नीला अथवा अन्य कोई गहरा कलर लगाएं।
यदि आप का घर पूर्वमुखी है या उत्तरमुखी है तो उस दिशा को स्वच्छ रखें। दक्षिण या पश्चिम में है तो उस दिशा के कमरों को साफ-सुथरा और सजा कर रखना चाहिए।
यदि आप घर की मरम्मत करवा रहे हैं तो ध्यान दें कि घर में कोई भी मशीनरी बंद अवस्था में न पड़ी हो। उसे तुरंत इस्तेमाल में लाएं या फिर किसी के जरूरत की हो तो उसको दे दें।
यदि घर सजाने के लिए पुष्प लगा रहे हैं तो कैक्टस का पैधा नहीं लगाना चाहिए। पुष्पों के गमले लगाना ठीक होता है। पुष्प अगर सुगन्धित है तो उसे घर की खिड़कियों के आसपास ही लगाएं।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
मूंगफली- बदलते मौसम में अस्थमा के मरीज मूंगफली का सेवन न करें। इससे आपको एलर्जी हो सकती है। अस्थमा भी एलर्जी के कारण होता है। ऐसे में मूगफली से आपको परहेज करना चाहिए। अगर आपको मूगफली सूट करती है तो भी कम ही खाएं।
दूध- दूध सभी के लिए फायदेमंज हो ये जरूरी नहीं है। अस्थमा के मरीज के लिए बदलते मौसम में दूध नुकसानदायक हो सकता है। दूध पीने से बाद सांस के मरीजों को खासी, गले में तकलीफ और सांस लेने में दिक्कत हो सकती है। इसलिए दूध का सेवन कम से कम करें।
नमक- कहा जाता है कि नमक का सेवन कम ही करना चाहिए। ज्यादा नमक खाने से हाई बीपी समेत कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ज्यादा नमक खाने से गले में सूजन आने की संभावना रहती है। जिससे सांस और अस्थमा के मरीज की परेशानी बढ़ सकती है।
अल्कोहल- अस्थमा के मरीज शराब और सिगरेट जैसी चीजों से बिल्कुल बचें। शराब में सल्फाइट होता है, जिससे सांस की समस्या हो सकती है। अस्थमा के मरीज को शराब और बियर पीने से बचना चाहिए। सिगरेट समस्या को बहुत बढ़ा सकती है।
💉 आरोग्य संजीवनी 🍶
_टैकीकार्डिया का कारण टैकीकार्डिया किसी भी कारण से बढ़ी हुई हृदय गति है। अगर ये तेज हृदय गति व्यायाम या तनाव के कारण होती है, तो इसे साइनस टैकीकार्डिया कहा जाता है। साइनस टैकीकार्डिया एक लक्षण है, कोई स्थिति नहीं। अधिकांश हृदय स्थितियां टैकीकार्डिया के विभिन्न रूपों को जन्म दे सकती हैं।
टैकीकार्डिया के लक्षण
दिल की धड़कन का तेज होना या छाती में तेज घबराहट जैसा महसूस होना
छाती में दर्द
अचानक से छाती में हल्कापन महसूस करना
तेज पल्स महसूस करना
सांस लेने में कठिनाई
बेहोशी
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्रीकृष्ण- अपने प्रिय पुष्पों का उल्लेख महाभारत में युधिष्ठिर से करते हुए श्रीकृष्ण कहते हैं- मुझे कुमुद, करवरी, चणक, मालती, नंदिक, पलाश व वनमाला के फूल प्रिय हैं। भगवान श्री कृष्ण केसर का तिलक अथवा पीले चन्दन का तिलक करने और पीले फूल चढ़ाने से वह अति शीघ्र प्रसन्न होते है । लक्ष्मीजी- मां लक्ष्मी सुख, समृद्धि, ऐश्वर्य और सौभाग्य की देवी है । माँ लक्ष्मी का सबसे अधिक प्रिय पुष्प कमल है। कमल जल में उत्पन्न होता है और माँ लक्ष्मी की उत्पत्ति भी सागर अर्थात जल से ही हुई है और कमल का फूल उनका आसन भी है इसलिए जो व्यक्ति पूरे नवरात्र विशेषकर अष्टमी, दीपावली, और हर शुक्रवार को माँ को कमल का फूल अर्पित करता है ।
वह इस धरती पर ऐश्वर्यवान बनता है उसे किसी भी सांसारिक सुख की कमी नहीं होती है। माता लक्ष्मी को नित्य गुलाब के फूल अर्पित करने से भी माँ की शीघ्र कृपा प्राप्त होती है और भगवान विष्णु की अर्धांगनी होने के कारण यह पीले सुगन्धित फूलो को अर्पण करने से भी अपने भक्तो से सहर्ष ही प्रसन्न हो जाती है
विष्णुजी- भगवान विष्णु को कमल, मौलसिरी, जूही, कदम्ब, केवड़ा, चमेली, अशोक, मालती, वासंती, चंपा, वैजयंती के पुष्प विशेष प्रिय हैं। इनको इनको पीले फूल बहुत ही पसंद है । विष्णु भगवान तुलसी दल चढ़ाने से अति शीघ्र प्रसन्न होते है । कार्तिक मास में भगवान नारायण केतकी के फूलों से पूजा करने से विशेष रूप से प्रसन्न होते है । लेकिन विष्णु जी पर आक, धतूरा, शिरीष, सहजन, सेमल, कचनार और गूलर आदि के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए । विष्णु जी पर अक्षत भी नहीं चढ़ाये जाते है ।
सरस्वती जी – विद्या की देवी माँ सरस्वती को प्रसन्न करने के लिए सफेद या पीले रंग का फूल चढ़ाएं जाते यही । सफेद गुलाब, सफेद कनेर या फिर पीले गेंदे के फूल से भी मां सरस्वती वहुत प्रसन्न होती हैं।
किसी भी देवता के पूजन में केतकी के पुष्प नहीं चढ़ाए जाते।
बजरंग बली- बजरंग बली को लाल या पीले रंग के फूल विशेष रूप से अर्पित किए जाने चाहिए। इन फूलों में गुड़हल, गुलाब, कमल, गेंदा, आदि का विशेष महत्व रखते हैं। हनुमानजी को नित्य इन फूलों और केसर के साथ घिसा लाल चंदन का तिलक लगाने से जातक की सभी मनोकामनाएँ शीघ्र ही पूरी होती है । शनि देव – शनि देव को नीले लाजवन्ती के फूल चढ़ाने चाहिए, इसके अतिरिक्त कोई भी नीले या गहरे रंग के फूल चढ़ाने से शनि देव शीघ्र ही प्रसन्न होते है।
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⚜️ प्रतिपदा तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी मानी जाती है। आज प्रतिपदा तिथि को अग्निदेव से धन प्राप्ति के लिए एक अत्यंत ही प्रभावी उपाय कर सकते हैं। इस अनुष्ठान से अग्निदेव से अद्भुत तेज प्राप्त करने के लिए भी आज का यह उपाय कर सकते हैं। साथ ही आज किसी विशिष्ट मनोकामना की पूर्ति भी इस अनुष्ठान के माध्यम से अग्निदेव से करवायी जा सकती हैं। इसके लिए आज अग्नि घर पर ही प्रज्ज्वलित करके गाय के शुद्ध देशी घी से (ॐ अग्नये नम: स्वाहा) इस मन्त्र से हवन करना चाहिये।
शास्त्र के अनुसार जिस व्यक्ति का जन्म प्रतिपदा तिथि में होता है वह व्यक्ति अनैतिक कार्यों में संलग्न रहने वाला होता है। ऐसा व्यक्ति कानून के विरूद्ध जाकर काम करने वाला भी होता है। ऐसे लोगों को मांस मदिरा काफी पसंद होता है अर्थात ये तामसी भोजन के शौकीन होते हैं। आम तौर पर इनकी दोस्ती ऐसे लोगों से होती है जिन्हें समाज में सम्मान की दृष्टि से नहीं देखा जाता अर्थात बदमाश और ग़लत काम करने वाले लोग।

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