आज का पंचांग आज का पंचांग सोमवार, 22 जनवरी 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 22 जनवरी 2024
22 जनवरी 2024 पौष मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि हैं। और आज सर्वार्थऽमृतसिद्धियोग एवं रवियोग भी योग है। आप सभी सनातनियों को “कूर्म द्वादशी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – सोमवार पौष माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 07:52 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी तिथि के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 04:58 AM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – मृगशिरा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। और इससे संबंधित देवता सोम हैं, जो अमरता और अमृत के देवता हैं।
🔔 योग – ब्रह्म योग 08:46 AM तक, उसके बाद इन्द्र योग
⚡ प्रथम करण : बव – 07:36 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 07:51 पी एम तक कौलव
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:31:00 A.M से 09:49:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:40:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:20:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:20 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:53 ए एम से 07:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:11 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:19 पी एम से 03:01 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:49 पी एम से 06:16 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:52 पी एम से 07:12 पी एम
💧 अमृत काल : 07:46 पी एम से 09:26 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:06 ए एम, जनवरी 23 से 12:59 ए एम, जनवरी 23
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:14 ए एम से 04:58 ए एम, जनवरी 23
💦 अमृत सिद्धि योग : 07:14 ए एम से 04:58 ए एम, जनवरी 23
❄️ रवि योग : 04:58 ए एम, जनवरी 23 से 07:13 ए एम, जनवरी 23
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-मंदिर में सफेद बताशे चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थसिद्धि योग/अमृतयोग/व्यापार मुहूर्त/ अयोध्या में श्री भगवान राम की प्राण प्रतिष्ठा उत्सव, अभिनेत्री नम्रता शिरोडकर जन्म दिवस, फ़िल्म अभिनेता ए. नागेश्वर पुण्य तिथि, स्वामी रामानंद तीर्थ स्मृति दिवस, इंग्लैंड की रानी विक्टोरिया स्मृति दिवस,समर्थ रामदास स्वामी स्मृति दिवस, शाहजहाँ, मुगल सम्राट पुण्य तिथि, न्यायाधीश जयंतीलाल छोटेलाल शाह जन्म दिवस, विजय आनन्द जन्म दिवस, यूक्रेन एकता दिवस।
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
वास्तुशास्त्र के अनुसार कारखानों और दुकानों में भारी मशीनरी की स्थापना दक्षिण और पश्चिम दिशा के मध्य, नैऋत्य कोण में करनी चाहिए। उन्नत दक्षिण-पश्चिम कोने और अपेक्षाकृत निचले और स्थिर उत्तर-पूर्व कोने वाला प्लॉट चुनना व्यवसाय के लिए लाभदायक माना जाता है।
धन और सफलता प्राप्त करना कई व्यक्तियों के लिए एक सामान्य आकांक्षा है जो अपना समय और प्रयास कड़ी मेहनत के लिए समर्पित करते हैं। लेकिन परिश्रम के साथ भी, कुछ व्यवसाय लाभ कमाने के लिए संघर्ष कर सकते हैं या विकास की धीमी गति का अनुभव कर सकते हैं। इन चुनौतियों में योगदान देने वाला एक संभावित कारक वास्तु दोष हो सकता है। वास्तु, एक प्राचीन भारतीय वास्तुशिल्प अभ्यास है, जिसका व्यापार सहित जीवन के विभिन्न पहलुओं में समृद्धि और प्रगति पर महत्वपूर्ण प्रभाव माना जाता है। आज हम इस लेख के माध्यम से आपको कुछ ऐसे उपाय बताएंगे, जिनकी मदद से आप व्यापार में तेजी ला सकते हैं, आइए जानते है इनके बारे में-
सही भूमि का चयन: व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए भूमि का चयन करते समय, उन्नत दक्षिण-पश्चिम कोने और निचले उत्तर-पूर्व कोने वाले भूखंड का चयन करने की सिफारिश की जाती है। ऐसा माना जाता है कि यह संरेखण व्यवसाय की समग्र समृद्धि और सफलता में योगदान देता है।
दुकान की दिशा:व्यवसाय के लिए वास्तु में दुकान का दिशा-निर्देश भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यदि दुकान का मुख उत्तर दिशा की ओर है तो शटर को उत्तर-पूर्व दिशा में रखने की सलाह दी जाती है, क्योंकि ऐसा माना जाता है कि यह दिशा शुभ है और दैवीय ऊर्जा से जुड़ी है। इसके विपरीत यदि दुकान का मुख दक्षिण दिशा की ओर हो तो दुकान का शटर पूर्व और दक्षिण के बीच दक्षिण दिशा में लगाना तेजी से प्रगति और आर्थिक लाभ के लिए लाभकारी माना जाता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पेशाब में जलन क्यों होता है? अगर आप अपनी शरीर और मौसम के हिसाब से पानी नहीं पीते हैं तो पेशाब में जलन महसूस हो सकती है। इससे बचने के लिए आपको रोजाना कम से कम 4-5 लीटर पानी जरूर पीना चाहिए।
अगर आप बहुत ज्यादा तेल और मिर्च, मसाले वाला खाना खाते हैं तो यूरिन में जलन की समस्या पैदा हो सकती है। इसलिए रोज ऐसा खाने से परहेज करें।
जिन लोगों की किडनी स्टोन यानि पथरी की समस्या होती है उन्हें टॉयलेट करते वक्त दर्द होता है। ऐसे में बार-बार पेशाब आती है और जलन भी होती है।
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍓
पेशाब में जलन रोकने के घरेलू उपाय
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं
नींबू पानी और पुदीना अर्क का सेवन करें
डाइट में फलों का जूस शामिल करें
ज्यादा से ज्यादा हरी सब्जियों का सेवन करें
रोजना नारियल पानी पिएं
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
शव को ले जाते वक्त “राम नाम सत्य है” ही क्यों बोला जा जाता है? भगवान शिव का नाम क्यों नहीं जिसमें सारे ब्रह्माण्ड निहित हैं?तो क्या आप ये समझते हैं कि शिव और राम अलग हैं?
स्वयं महादेव रामायण में अनेक बार राम नाम की महिमा बताते हैं। रामचरितमानस में एक प्रसंग आता है जब माता पार्वती महादेव से पूछती है कि वो किसके ध्यान में मग्न रहते हैं? तब भोलेनाथ कहते हैं कि वे सदा श्रीराम का स्मरण करते हैं।
उमा कहउँ मैं अनुभव अपना। सत हरि भजनु जगत् सब सपना।।
अर्थात: हे उमा! मैं अपने अनुभव से कहता हूँ कि हरि भजन के अतिरिक्त संसार मे सब मिथ्या है।
उसी प्रकार मानस के अनुसार जब 27वे कल्प में माता सती को श्रीराम के विष्णु अवतार होने पर शंका हो जाती है तो भगवान शंकर उन्हें समझाते हुए कहते हैं –
सुनहि सती तव नारि सुभाऊ। संसय अस न धरिअ उर काऊ।।
अर्थात: सुनो सती! नारी स्वभाव के कारण तुम ऐसा सोच रही हो, किन्तु तुम्हे (राम के विषय में) ऐसा शंशय अपने मन मे नही रखना चाहिए।
एक और कथा आती है जब माता पार्वती भोलेनाथ से पूछती है कि आप क्या जपते रहते हैं? तब भगवान शंकर ने उन्हें विष्णु सहस्रनाम सुनाया और कहा मैं श्रीहरि का नाम जपता रहता हूँ। इसपर माता कहती हैं कि ये तो बहुत बड़ा है जिसे सर्वसाधारण याद नही कर सकते। तब महादेव कहते हैं कि जो भगवान विष्णु का सहस्त्रनाम याद नही रख सकते वे केवल राम का नाम ले लें क्योंकि एक राम नाम सहस्त्र विष्णु नामों के बराबर है।
राम रामेति रामेति रमे रामे मनोरमे। सहस्त्रनाम तत्तुल्यं रामनाम वरानने।।
अर्थात: एक राम नाम सहस्त्र विष्णु नाम के समान है।वे आगे कहते हैं –
आपदामपहर्तारम दाताराम सर्वसम्पदाम। लोकाभिराराम श्रीरामम भूयो भूयो नमाम्यहम।।
अर्थात: यह राम नाम सभी आपदाओं को हरने वाला एवं सभी संपदा प्रदान करने वाला है। अतः मैं उन भगवान को बारम्बार प्रणाम करता हूँ ।इसके आगे वे फिर कहते हैं
भर्जनम भवबीजानामर्जनम सुखसम्पदाम। तर्जनम यमदूतानाम रामरामेति गर्जनम।।
अर्थात: राम राम के उच्चारण से मनुष्य के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं और यमदूत सदैव मनुष्य से दूर रहते हैं।
वे फिर कहते हैं
(शेष कल)
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

