ज्योतिष

आज का पंचांग शनिवार, 05 नवम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 05 नवम्बर 2022

शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
🦅 05 नवम्बर 2022 दिन शनिवार को कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि है। आज शनिवार का शनिप्रदोष व्रत है एवं गरुड़द्वादशी भी आज ही है। यह शनिप्रदोष का व्रत संतान प्राप्ति हेतु बड़ा ही उपयुक्त मुहूर्त माना जाता है। एवं तुलसी विवाह उत्सव की हार्दिक शुभकामनाएं।।
।। श्री हरि आप सभी का कल्याण करें ।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।
पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : द्वादशी – 05:06 पी एम तक त्रयोदशी
🖍️ तिथि स्वामी : द्वादशी इस तिथि के स्वामी श्री हरि विष्णु जी हैं. इनकी पूजा करने से मनुष्य समस्त सुखों को भोगता है, साथ ही सभी जगह पूज्य एवं आदर का पात्र बनता है
💫 नक्षत्र : उत्तर भाद्रपद – 11:56 पी एम तक रेवती
🪐 नक्षत्र स्वामी : शनिदेव हैं और राशि मीन है, जिसके स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं। इसलिए इस नक्षत्र पर शनिदेव और बृहस्पति देव दोनों का प्रभाव पड़ता है।
🔔 योग : हर्षण – 01:23 ए एम, नवम्बर 06 तक वज्र
प्रथम करण : बालव – 05:06 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:44 ए एम, नवम्बर 06 तक तैतिल
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो अदरख एवं घी खाकर यात्रा कर सकते है।
🔥 शुभ गुलिक काल : 06:36 ए एम से 07:58 ए एम
🤖 राहुकाल : 09:20 ए एम से 10:42 ए एम राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:29:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:31:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:52 ए एम से 05:44 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:18 ए एम से 06:36 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:43 ए एम से 12:26 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:54 पी एम से 02:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:22 पी एम से 05:46 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:33 पी एम से 06:52 पी एम
💧 अमृत काल : 07:12 पी एम से 08:47 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:39 पी एम से 12:31 ए एम, नवम्बर 06
❄️ रवि योग : 11:56 पी एम से 06:37 ए एम, नवम्बर 06
☄️ हर्षण योग – देर रात 1 बजकर 23 मिनट तक
💥 उत्तराभाद्रपद नक्षत्र – रात 11 बजकर 56 मिनट तक
🚕 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनिदेव का सरसों और चमेली के तेल से अभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहारशनि प्रदोष, चातुर्मास्य समाप्ति, तुलसी विवाहारंभ, गरुड़ द्वादशी, बनारसी दास गुप्ता – हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री स्वतंत्रता सेनानी जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय रेड क्रास दिवस, विश्व सुनामी दिवस, पंचक जारी, मूल प्रारंभ
✍🏽 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🏚️ Vastu tips 🛕
▪️ बेडरूम में मेन गेट की तरफ पैर करके नहीं सोना चाहिए। सोते वक्त पूर्व दिशा में सिर और पश्चिम दिशा में पैर करके सोने से मन आध्यात्मिक भावनाओं की वृद्धि होती है।
▪️ किसी भी व्यक्ति को दक्षिण दिशा की ओर पैर करके नहीं सोना चाहिए। इससे बेचैनी, घबराहट जैसी समस्याएं उत्पन्न होती है।
▪️ घर के कमरों में कैक्टस आदि कांटे वाली गुलदस्ते नहीं रखनी चाहिए।
▪️घर के उत्तर दिशा में जिसे ईशान कोण भी कहते हैं हल्के वस्तुएं रखनी चाहिए।
▪️ घर में अग्नि से जुड़ा हुआ कोई भी उपकरण दक्षिण- पूर्व दिशा में रखना चाहिए।
▪️ घर में इस्तेमाल होने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उचित रखरखाव करना चाहिए।
▪️ घर में यदि पौधे लगे हुए हैं तो उनमें रोजाना पानी देना चाहिए। ताकि पौधा सूखने न पाए।
▪️ दक्षिण पश्चिम दिशा में ओवरहेड वॉटर टैंक की व्यवस्था करने से काफी शुभ माना जाता है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
पति-पत्नी के मतभेद को दूर करने के लिए कुछ लोग मंत्र जाप का भी सहारा लेते हैं। कहते हैं यदि यह जप विधि-विधान से किया जाए तो पति-पत्नी के बीच कभी अनबन नहीं होती साथ ही प्रेम भी बढ़ता है।
अक्ष्यौ नौ मधुसंकाशे अनीकं नौ समंजनम्। अंत: कृणुष्व मां ह्रदि मन इन्नौ सहासति।।
🤷🏻‍♀️ कब करें जप:
सुबह उठकर स्नान के बाद किसी एकांत जगह आसन बिछा लें और पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठें। सामने मां पार्वती की प्रतिमा या चित्र रखें और श्रद्धापूर्वक उनकी स्तुति करते हुए 21 बार ऊपर लिखे मंत्र का जाप करें।
वैवाहिक सुख की प्राप्ति और अनबन के निवारण के लिए सुबह स्नानादि से निवृत्त होकर भगवती दुर्गा की प्रतिमा के सामने दीया और अगरबत्ती जलाकर पुष्प अर्पित करें। अब नीचे लिखे मंत्र का 108 बार जाप करें।ज्योतिषी औऱ पंडितों का मानना है कि ऐसा करने से कुल 21 दिनों में ही सुख-शांति का वातारण व्याप्त हो जाएगा
🗣️ मंत्र
धां धीं धूं धूर्जटे! पत्नी वां वीं वूं वाग्धीश्वरि। क्रां क्रीं क्रूं कालिका देवि! शांत शीं शूं शुभं कुरू।।
💉 आरोग्य संजीवनी 🫀
कफ – खाँसीवाला बुखार : काली मिर्च के 3 ग्राम चूर्ण और अदरक के 5 मि.ली. रस को 10 ग्राम शहद में मिलाकर दिन में 2 – 3 बार चाटने से कफ – खाँसीवाले बुखार में आराम मिलता है |
कफ व खाँसी : कफ जम जाने से साँस लेने में तकलीफ हो तो आधा कप गुनगुने पानी में 15 – 20 मि.ली. गोमूत्र ( 7 बार कपडछन करके) अथवा 5 से 10 मि.ली. गोमूत्र अर्क तथा 2 – 4 चुटकी हल्दी मिलाकर सुबह खाली पेट पियें |
उबले पानी में हल्दी, अजवायन, भीमसेनी कपूर को अथवा केवल अमृत द्रव को डालकर सूँघे |
सरसों के तेल में २ कली लहसुन डालकर गरम करें | हल्का गर्म रहने पर छाती पर मालिश करें | इससे छाती में जमा हुआ कफ बाहर निकलने में मदद मिलती है |
कब्ज : 20 ग्राम ग्वारपाठे में 2 से 4 चुटकी काला नमक मिलाकर सुबह – शाम खाली पेट लें अथवा घृतकुमारी रस (Aloe Vera Juice) का सेवन करें |
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
आचार्य श्री गोपी राम ने अपने इस नीति शास्‍त्र में महिलाओं के बारे में भी कई बातें बताई हैं।हम कहते हैं कि परिवार को बनाने-बिगाड़ने में महिलाओं की सबसे बड़ी भूमिका होती है। अगर महिला गुणी है तो वह परिवार की दशा सुधार ऊंचाइयों पर ले जाती है, वहीं अवगुणों से युक्‍त महिला घर-परिवार को तबाह कर सकती है। इसलिए ऐसी महिलाओं से हमेशा दूरी बनाकर रखें।
अशिक्षित महीला शिक्षा परिवार और समाज में बड़ा बदलाव लाता है। अगर कोई शिक्षित और बुद्धिमान महिला है तो वह परिवार और समाज का निर्माण का कार्य करेगी। वहीं अशिक्षित महिला परिवार को बर्बाद कर सकती है। क्‍योंकि शिक्षा के अभाव में इनके अंदर कई तरह के ऐसे अवगुण घर कर सकते हैं, जो पूरे समाज को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लालच से युक्‍त महिला पुरुष हो या महिला अगर किसी में लालच की भावना आ गई तो वह उसके समेत आसपास के लोगों को बर्बाद कर सकती है। वहीं अगर महिला के अंदर लालच का अवगुण है तो इसका सबसे ज्‍यादा प्रभाव परिवार पर पड़ता है। इस अवगुण से युक्‍त महिला न केवल घर की शांति भंग कर देती है, बल्कि पूरे परिवार को ही बर्बाद कर देती हैं।
आचार्य श्री गोपी राम का मानना है कि अहंकार हर मानव के लिए विनाशकारी होता है। वहीं अहंकार अगर किसी स्‍त्री में है तो उससे मां सरस्‍वती और मां लक्ष्‍मी दोनों नाराज रहती हैं। ऐसी महिलाएं ना तो अपने ज्ञान-बुद्धि का उपयोग कर पाती है और न ही सही दिशा में कोई कार्य कर पाती है। ये अपने अहंकार के कारण घर की सुख-समृद्धि को पूरी तरह से खत्‍म कर देती हैं।
झूठ बोलने वाली महिला किसी महिला में अगर झूठ बोलेने का अवगुण है, तो यह भी परिवार के बर्बादी का कारण बन सकता है। हम कहते हैं कि जो महिलाए झूठ बोलती हैं, वे अपने परिवार को कभी भी धोख दे सकती है। इनके झूठ बोलने से परिवार के बीच हमेशा लड़ाई-झगड़ा होता रहता है। जिससे पूरा परिवार ही बर्बाद हो जाता है।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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