ज्योतिष

आज का पंचाग मंगलवार 20 सितम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 20 सितम्बर 2022_

हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
👴🏼 20 सितम्बर 2022 दिन मंगलवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की दशमी तिथि है। आज दशवें दिन का श्राद्ध किया जायेगा। आज दशवें दिन का तर्पण तथा आज से अगले 05 दिन पर्यन्त प्रतिदिन पितरों का तर्पण एवं श्राद्ध करने से वर्षभर सुख बना रहता है।।
🌌दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए । मंगलवार को बजरंगबली की पूजा का विशेष महत्व है।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
मंगलवार के व्रत से सुयोग्‍य संतान की प्राप्ति होती है, बल, साहस और सम्मान में भी वृद्धि होती है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन माह
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः- दशमी तिथि 21:27:00 तक तदोपरान्त एकादशी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- दशमी तिथि की स्वामी यमराज जी हैं तथा एकादशी तिथि के स्वामी विश्वदेव जी हैं।
💫 नक्षत्र : पुनर्वसु – 09:07 पी एम तक पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामीः- पुनर्वसु नक्षत्र के स्वामी गुरु देव हैं।
🔊 योगः- परिघा 07:37:00 तक तदोपरान्त वज्र
प्रथम करण : वणिज – 08:15 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 09:26 पी एम तक बव
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 12:14:00 P.M से 01:46:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से गुड़ खाकर जायें।
🤖 राहुकालः- दिन 03:17:07 से 04:49:00 बजे तक राहुकाल में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:57ɉ:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:03:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:34 ए एम से 05:21 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:58 ए एम से 06:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:39 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:16 पी एम से 03:05 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:08 पी एम से 06:32 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:20 पी एम से 07:31 पी एम
💧 अमृत काल : 06:25 पी एम से 08:13 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:38 ए एम, सितम्बर 21
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को बूंदी के लड्डू भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – दशमी का श्राद्ध, गुरु श्री नानकदेव जी ज्योति – ज्योत / पुण्य दिवस, पण्डित श्रीराम शर्मा आचार्य जयन्ती, रेलवे पुलिस बल (R.P.F.) स्थापना दिवस (भारतीय , 20.09.1986 को सर्वप्रथम
✍🏽 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🌋 Vastu tips 🏜️
आज के दौर में लोग अपने घरों को महंगी चीज़ों और फर्नीचर से सजाते हैं। लेकिन क्या आप जानते है कि गलत तरीके से खरीदा गया फर्नीचर आपके घर का वास्तु खराब कर सकता है। ऐसे मे आचार्य इंदु प्रकाश से आज जानिए नया फर्नीचर खरीदने से पहले किन-किन बातों का खास ध्यान रखना चाहिए।
घर की सुंदरता में फर्नीचर का खास योगदान होता है और इसके लिए आप काफी पैसा भी खर्च करते हैं। लेकिन कई बार महंगा और डिजाइनर फर्नीचर भी हमारे घर में वास्तुदोष का कारण बन जाता है। आज हम आपको बतायेंगे कि किस दिन फर्नीचर खरीदना आपके लिये शुभ रहेगा या किस दिन आपको फर्नीचर के लिये लकड़ी खरीदनी चाहिए और किस दिन इसे खरीदना आपके लिये अशुभ रहेगा।
मंगलवार, शनिवार और अमावस्या के दिन फर्नीचर या लकड़ी न खरीदें। इन दिनों को छोड़कर आप किसी भी दिन फर्नीचर खरीद सकते हैं। इसके अलावा यह भी ध्यान रखें कि वह फर्नीचर किस पेड़ की लकड़ी का बना हुआ है। वास्तु शास्त्र के अनुसार किसी सकारात्मक ऊर्जा वाले पेड़ की लकड़ी ही उपयोग में लानी चाहिए। शीशम, चंदन, नीम, अशोक, सागवान, साल व अर्जुन, ये सभी शुभ फल देने वाले होते हैं।
✳️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
शंखजल का छिड़काव व पान क्यों ?
शंख में जल भरकर उसे पूजा-स्थान में रखे जाने और पूजा – पाठ, अनुष्ठान होने के बाद श्रद्धालुओं पर उस जल को छिड़कने का कारण यह है कि इसमें कीटाणुनाशक शक्ति होती है और शंख में जो गंधक, फॉस्फोरस और कैल्शियम की मात्रा होती है उसके अंश भी जल में आ जाते हैं | इसलिए शंख के जल को छिड़कने और पीने से स्वास्थ्य सुधरता है |
भगवान कहते हैं : “जो शंख में जल लेकर ‘ॐ नमो नारायणाय’ मंत्र का उच्चारण करते हुए मुझे नहलाता है वह सम्पूर्ण पापों से मुक्त हो जाता है | जो जल शंख में रखा जाता है वह गंगाजल के समान हो जाता है | तीनों लोकों में जितने तीर्थ है वे सब मेरी आज्ञा से शंख में निवास करते है इसलिए शंख श्रेष्ठ माना गया है | जो शंख में फूल, जल और अक्षत रखकर मुझे अर्घ्य देता है उसे अनंत पुण्य की प्राप्ति होती है | जो वैष्णव मेरे मस्तक पर शख का जल घुमाकर उसे अपने घर में छिडकता है उसके घर में कुछ भी अशुभ नहीं होता | मृदंग और शंख की ध्वनि तथा प्रणव (ॐकार) के उच्चारण के साथ किया हुआ मेरा पूजन मनुष्यों को सदैव मोक्ष प्रदान करनेवाला है |” (स्कन्द पुराण, वैष्णव खंड)
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
शीत ऋतू में विशेष हितकर पौष्टिक एवं रुचिकर राब
👉🏼लाभ: यह राब सुपाच्य, पौष्टिक एवं भूख व बल वर्धक है | इसमें बाजरा व गुड का मेल होने से यह सर्दियों में विशेष हितकर हैं | बाजरे में भरपूर कैल्शियम होने से यह राब हड्डियों की मजबूती के लिए उपयोगी है | यह रक्ताल्पता, मोटापा तथा कफजन्य रोगों में भी लाभकारी है | मधुमेह में नमकीन राब फायदेमंद है |
🤷🏻‍♀️ विधि : 1 कटोरी राब बनाने हेतु किसी बर्तन में 1.5 से 2 कटोरी पानी लेकर उसमें 6 – 8 चम्मच सेंका हुआ बाजरे का आटा मिला के पकने चढ़ा दें | इसमें थोड़ी-सी सौंफ और आवश्कता अनुसार गुड़ डाल दें | दूसरे बर्तन में आधा से १ चम्मच चावल इस प्रकार पकायें कि खिचड़ी की तरह न घुलें, खुले- खुले रहें | अच्छी की तरह पक जाने पर राब में चावल डाले दें | बस , मीठी राब तैयार है | इस विधि से बनायी गयी राब रुचिकारक व सादिष्ठ बनती है |
नमकीन राब बनानी हो तो तेल में जीरे व कढ़ीपत्ते का छौंक लगा लें | इसमें 1.4 से 2 कटोरी पानी डाल के 6 से 8 चम्मच सेंका हुआ बाजरे का आटा मिला लें और हल्दी, नमक, धनिया आदि डालकर पका लें | फिर उपरोक्त विधि में बताये अनुसार चावल पका के इसमें मिला लें | बफ, नमकीन राब तैयार है |
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
ज्ञान के साथ घमंड नहीं होना चाहिए, वरना दूसरों के सामने लज्जित होना पड़ सकता है
महाकवि कालिदास के जीवन के कई ऐसे प्रसंग हैं, जिनमें सुखी जीवन के सूत्र बताए हैं। वे बहुत ज्ञानी थे, लेकिन एक समय उन्हें इस बात पर घमंड हो गया था। इसके बाद एक महिला ने उन्हें समझाया कि ज्ञान के साथ घमंड नहीं होना चाहिए। यहां जानिए पूरा प्रसंग…_
प्रचलित प्रसंग के अनुसार एक दिन महाकवि कालिदास एक नगर से दूसरे नगर जा रहे थे। रास्ते में उन्हें प्यास लगी। वहीं उन्हें एक कुआं दिखाई दिया, वहां गांव की एक महिला पानी भर रही थी। कालिदास ने महिला से कहा कि मुझे प्यास लगी है, कृपया पानी दीजिए। महिला ने कहा कि मैं आपको नहीं जानती हूं, कृपया अपना परिचय दें। इसके बाद मैं पानी दे दूंगी।
कालिदास को अपने ज्ञान पर घमंड था, उन्होंने अपना नाम न बताते हुए कहा कि मैं मेहमान हूं। महिला बोली कि आप मेहमान कैसे हो सकते हैं, संसार में सिर्फ दो ही मेहमान हैं, एक धन और दूसरा यौवन।
गांव की महिला से बात सुनकर कालिदास हैरान रह गए। उन्हें उस महिला से ऐसी बात की उम्मीद नहीं थी। वे फिर बोले कि मैं सहनशील हूं। महिला ने कहा कि आप सहनशील नहीं है, इस संसार में सिर्फ दो ही सहनशील हैं। एक ये धरती जो पापी और पुण्यात्माओं का बोझ उठाती है। हमें खाने के लिए अनाज देती है। दूसरे सहनशील पेड़ हैं, जो पत्थर मारने पर भी फल ही देते हैं।
कालिदास ने फिर कहा कि मैं हठी हूं। महिला बोली कि आप फिर झूठ बोल रहे हैं। हठी दो ही हैं। एक हमारे नाखून और दूसरे बाल। इन्हें बार-बार काटने पर भी फिर से बढ़ जाते हैं। महिला से ऐसी ज्ञान वाली बातें सुनकर कालिदास हार मान गए और बोले कि मैं मूर्ख हूं। इस पर महिला ने कहा कि मूर्ख भी दो ही हैं। एक राजा जो बिना योग्यता के भी सब पर राज करता है। दूसरे दरबारी जो राजा को खुश करने के लिए गलत बात पर भी झूठी प्रशंसा करते हैं।
अब कालिदास महिला के चरणों में गिर पड़े और पानी के याचना करने लगे। तभी महिला ने कहा उठो वत्स। कालिदास ने ऊपर देखा तो वहां देवी सरस्वती खड़ी थीं। देवी ने कहा कि शिक्षा से ज्ञान मिलता है, न कि घमंड। तूझे अपने ज्ञान का घमंड हो गया था। इसीलिए तेरा घमंड तोड़ने के लिए मुझे ये सब करना पड़ा। कालिदास को अपनी गलती पर पछतावा होने लगा। उन्होंने देवी से क्षमा याचना की। देवी प्रसन्न होकर अंतर्ध्यान हो गईं। इसके बाद उन्होंने कभी भी घमंड नहीं किया।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

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