ज्योतिष

आज का पंचाग शनिवार 24 सितम्बर 2022

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 24 सितम्बर 2022

शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
👴🏼 24 सितम्बर 2022 दिन शनिवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज मासशिवरात्रि व्रत है। आज जिनके पिता एवं पितरों के मृत्यु की तिथि अज्ञात हो अर्थात ज्ञात न हो उनका श्राद्ध किया जाना चाहिये। आज विष तथा विषैले जीवों के दंश अथवा शस्त्राघात आदि से मृत्यु को प्राप्त पितरों के श्राद्ध होगा। आज चौदहवें दिवस का श्राद्ध किया जायेगा। आप सभी सनातनियों को मासशिवरात्रि व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात शनिवार को पीपल वृक्ष में मिश्री मिश्रित दूध से अर्घ्य देने से लक्ष्मी की प्राप्ति होती है। पीपल के नीचे सायंकालीन समय में एक चतुर्मुख दीपक जलाकर हनुमान चालीसा का पाठ करने से सभी ग्रह दोषों की निवृति हो जाती है।
पुराणों में वर्णित है कि पिप्पलाद ऋषि ने अपने बचपन में माता पिता के वियोग का कारण शनि देव को जानकर उनपर ब्रह्म दंड से प्रहार कर दिया, जिससे शनि देव घायल हो गए। देवताओं की प्रार्थना पर पिप्पलाद ऋषि ने शनि देव को इस बात पर क्षमा किया कि शनि जन्म से लेकर 16 साल तक की आयु तक एवं उनके भक्तो को किसी को भी कष्ट नहीं देंगे। तभी से पिप्पलाद का स्मरण करने से ही शनि देव के प्रकोप से मुक्ति मिल जाती है।
शिवपुराण के अनुसार शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि की पीड़ा शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्र्विन मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथिः- चतुर्दशी तिथि 27:13:00 तक तदोपरान्त अमावस्या तिथि
✏️ तिथि स्वामीः-चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी हैं तथा अमावस्या तिथि के स्वामी पित्रदेव जी हैं।
💫 नक्षत्रः- पूर्वा फाल्गुनी 29:08:00 तक तदोपरान्त उत्तरा फाल्गुुनी
🪐 नक्षत्र स्वामीः- पूर्वा फाल्गुनी के स्वामी शुक्र जी हैं तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र के स्वामी सूर्य हैं।
📢 योगः-साध्य 09:41:00 तक तदोपरान्त शुभ
प्रथम करण : विष्टि – 02:55 पी एम तक
द्वितीय करण : शकुनि – 03:12 ए एम, सितम्बर 25 तक चतुष्पाद
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 06:10:00 P.M से 07:40:00P.M तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से अदरक खाकर जायें।
🤖 राहुकालः- राहुकाल 09:11:00 A.M से 10:42:00A.M तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना जाता है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:00:00
🌅 सूर्यास्तः- सायः 06:00:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:23 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:49 ए एम से 12:37 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:14 पी एम से 03:02 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:04 पी एम से 06:28 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:16 पी एम से 07:27 पी एम
💧 अमृत काल : 10:23 पी एम से 12:04 ए एम, सितम्बर 25*
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:49 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 25
🎇 साध्य योग – आज सुबह 9 बजकर 43 मिनट तक
☄️ फाल्गुनी नक्षत्र – आज का पूरा दिन पार कर के अगली सुबह 5 बजकर 8 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में काली मिर्च चढाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – चतुर्दशी का श्राद्ध, शस्त्रादि -विष – दुर्घटना (अपमृत्यु ) से मृत लोगों का श्राद्ध आज ही करना चाहिए, मास शिवरात्रि व्रत, मैडम भीकाजी कामा जन्मदिन, विश्व सफाई दिवस।
✍🏽 विशेष – चतुर्दशी तिथि को शहद त्याज्य होता है। चतुर्दशी तिथि को एक क्रूरा तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं चतुर्दशी तिथि को उग्रा तिथि भी माना जाता है। यह चतुर्दशी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्दशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। इस चतुर्दशी तिथि के देवता भगवान शिवजी हैं।
🗽 Vastu tips 🗼
अगर आप झाड़ू टूट जाने के बाद भी उसे जोड़-तोड़ के अपने घर या ऑफिस में इस्तेमाल में ले रहे हैं, तो वास्तु की दृष्टि से यह बिल्कुल गलत है। झाड़ू टूट जाने के तुरंत बाद ही उसे बदल देना चाहिए। टूटी हुई झाडू से घर की सफाई करना कई तरह की परेशानियों को बुलावा देने वाला होता है। झाड़ू को लक्ष्मी का प्रतीक माना जाता है।
इसलिए गलती से भी कभी झाड़ू को पैर न लगाएं। यह लक्ष्मी माता का अपमान माना जाता है और इससे घर में कई तरह की आर्थिक परेशानियां भी आ सकती हैं। इसके अलावा जिस अलमारी या तिजोरी में आप पैसा या अन्य कीमती सामान रखते हैं, उसके पीछे या सटाकर कभी भी झाड़ू नहीं रखनी चाहिए। इससे धन की हानि होती है।
▶️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सर्वलाभ की कुंजी कैसा भी बीमार व्यक्ति हो, उसको हरिनाम की, ‘हरि ॐ’ की साधना दे दो, चंगा होने लगेगा | बिल्कुल पक्की बात है !
आपको स्वस्थ रहना है तो भी भगवान का नाम, प्रसन्न तथा निरहंकारी रहना है तो भगवान का नाम, उद्योगी एवं साहसी होना है तो भगवान का नाम और पूर्वजों का मंगल करना है तो भी भगवान का नाम….|
🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
क्रोध से हानियाँ और उससे बचने के उपाय
पद्म पुराण में आता है : ‘जो पुरुष उत्पन्न हुए क्रोध को अपने मन से रोक लेता है, वह उस क्षमा के द्वारा सबको जीत लेता है | जो क्रोध और भय को जीतकर शांत रहता है, पृथ्वी पर उसके समान वीर और कौन है ! क्षमा करनेवाले पर एक ही दोष लागू होता है, दूसरा नहीं, वह यह कि क्षमाशील पुरुष को लोग शक्तिहीन मान बैठते हैं | किंतु इसे दोष नहीं मानना चाहिए क्योंकि बुद्धिमानो का बल क्षमा ही है | क्रोधी मनुष्य जो जप, होम और पूजन करता है वह सब फूटे हुए घड़े से जल की भाँति नष्ट हो जाता है |’
क्रोध से बचने के उपाय :एकांत में आर्तभाव से व सच्चे ह्रदय से भगवान से प्रार्थना कीजिये कि ‘हे प्रभो ! मुझे क्रोध से बचाइये |’
जिस पर क्रोध आ जाय उससे बड़ी नम्रता से, सच्चाई के साथ क्षमा माँग लीजिये |
सात्त्विक भोजन करे | लहसुन, लाल मिर्च एवं तली हुई चीजों से दूर रहें | भोजन चबा-चबाकर कम-से-कम 25 मिनट तक करें | क्रोध की अवस्था में या क्रोध के तुरंत बाद भोजन न करें | भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग करने को कहते थे | अपने आश्रमों में भी भोजन से पूर्व हास्य-प्रयोग किया जाता है, साथ ही श्री आशारामायणजी की कुछ पंक्तियों का पाठ और जयघोष भी किया जाता है तो कभी ‘जोगी रे …..’ भजन की कुछ पंक्तियाँ गायी जाती हैं | इस प्रकार रसमय होकर फिर भोजन किया जाता है | इस प्रयोग को करने से क्रोध से सुरक्षा तो सहज में ही हो जाती है और साथ-ही-साथ चित्त भगवद आनंद, माधुर्य से भी भर जाता है |
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
ज्ञान भक्ति मनुष्यों में भी स्थापित की जाती है। आत्म-कल्याण की भावना से जो व्यक्ति अधिक साधन सम्पन्न होता है, उसका शिष्यत्व स्वीकार करके भी यह साधना आरम्भ होती है। इसलिए गुरु भक्ति का यह रूप ग्रहण कर लेती है। परन्तु जैसा कि बताया गया है यह गुरुभक्ति अन्य विश्वास के रूप में भी होती पाई गई है। भक्ति के लिए जहाँ यात्रा पात्र या योग्य अयोग्य की पहचान या भावना रहती है वहाँ अन्धविश्वास नहीं पनपता। अयोग्य की भक्ति सिर्फ इसलिए करने से कि यह हमारे कुल में चली आई है, अन्धविश्वास होने के कारण बड़ा दुखद होती है। परन्तु अन्ध विश्वास की दृढ़ता में यदि ज्ञान का पुट मिल जाए और वह गुरु की योग्यता तथा अयोग्यता का ज्ञान करके तब यदि वह अपने उपयुक्त हो तो उसका शिष्यत्व स्वीकार करे तब ही वह अपनी साधन शक्ति से शिष्य का कल्याण कर सकता है अन्यथा ‌श्री गोपी राम जी के शब्दों में ऐसे गुरु जहाँ अपना विनाश करते हैं वहाँ शिष्य को भी ले डूबते हैं।
गुरु शिष्य बधिर अंध कर लेखा। एक सुनहि एक नहिं देखा॥ हरहिं शिष्य धन, शोक न हरहीं। ते गुरु घोर नरक मँह परहीं॥
भजन करने में या भक्ति में अपने आपको जिसकी भक्ति या भजन किया जाता है उसके प्रति समर्पित करना होता है। जब तक समर्पण नहीं होता तब तक भक्ति में एकाग्रता नहीं आती और एकाग्रता के बिना योग सिद्ध नहीं होता। फल की प्राप्ति नहीं होती। ज्ञानी भक्त समर्पण के पूर्व यह जानता है कि जिसको वह आत्म समर्पण कर रहा है वह उसकी नाव को पार लगा भी देगा या नहीं। उनके गुण अवगुणों की खोजबीन करके तब आगे कदम रखता है। गुणों व कारण जो उनकी प्राप्ति के लिए आत्म समर्पण करता है वह उनकी शक्ति या गुणों को अपने भीतर बुलाने और बसा लेने की तैयारी किए रहता है इसलिए आत्म समर्पण करने के साथ जिसकी भक्ति की जाती है उसकी शक्तियाँ या गुण साधना आरम्भ होते ही साधक के अन्त में प्रवेश करना तथा स्थित होना आरम्भ कर देते हैं। लेकिन जहाँ भक्ति तो होती है परन्तु या तो साधक के अनुकूल जिसकी भक्ति की जाती है उसमें गुण या शक्ति नहीं होती तो उसके अंदर उन गुण और शक्तियों का ही प्रवेश होना आरम्भ होता है जो कि जिसकी साधना की जाती है, उसमें होती है। इसलिए अंधविश्वास अयोग्य के साथ सम्बंध स्थापित कर पतन के मार्ग पर ही अग्रसर होते हैं। पर ज्ञानी जीवन भर अपने विश्वास को लेकर योग्य पात्र के साथ जब संबंध स्थापित करता है तब निरंतर प्रगति करता जाता है।
●▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬●
⚜️ चतुर्दशी तिथि को भगवान शिव का ज्यादा-से-ज्यादा पूजन, अर्चन एवं अभिषेक करना करवाना चाहिये। सामर्थ्य हो तो विशेषकर कृष्ण पक्ष कि चतुर्दशी तिथि को विद्वान् वैदिक ब्राह्मणों से विधिवत भगवान शिव का रुद्राभिषेक करवाना चाहिये। आज चतुर्दशी तिथि में भगवान् शिव का रुद्राभिषेक यदि शहद से किया करवाया जाय तो इससे मारकेश कि दशा भी शुभ फलदायिनी बन जाती है। जातक के जीवन कि सभी बाधायें निवृत्त हो जाती है और जीवन में सभी सुखों कि प्राप्ति सजह ही हो जाती है।
जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्दशी तिथि को होता है वह व्यक्ति नेक हृदय का एवं धार्मिक विचारों वाला होता है। इस तिथि को जन्मा जातक श्रेष्ठ आचरण करने वाला होता है अर्थात धर्म के मार्ग पर चलने वाला होता है। इनकी संगति भी उच्च विचारधारा रखने वाले लोगों से होती है। ये बड़ों की बातों का पालन करते हैं तथा आर्थिक रूप से सम्पन्न होते हैं। देश तथा समाज में इन्हें उच्च श्रेणी की मान-प्रतिष्ठा प्राप्त होती है।

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