मध्य प्रदेश

गढकुंडार किले की तरह गौरझामर के प्राचीन किले का भी आकर्षक ढंग से जीर्णोध्दार किया जावे

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । गौरझामर की ऐतिहासिक धरोहर गौड शासन कालीन प्राचीन किला जो आज भी पुरानी यादो को अपने आप मे समेटे हुए है भारत की पुरानी राजतंत्र शासन प्रणाली का जीता जागता नमूना है जिसने अपने शासन काल की अनेको लडाईयो से लेकर ब्रिटिश हुकुमत मे भारत की परतत्रंता के दंश को भी झेला व महसूस किया है जिसका वह साक्षी हैअंतिम शासक के रुप मे गौडबंश के राजाओ का शासन रहा गौरझामर नगर के हृदयस्थल एवं करन्जुआ नदी के तट पर स्थित गौरझामर के किले की भौगौलिक स्थिति पर ध्यान केन्द्रित किया जावे तो यह किला अपने आकर्षक भित्ती निर्माण शैली ऊंची ऊंची गुम्बज गुर्जो मीनार व विशाल मोटी पक्की ईट की दीवारो से घिरा हुआ अपनी दास्तान सुना रहा है किला आज भी अच्छी हालत मे पुराने वैभव को समेटे हुए हैं जिसमे गौड शासन काल की विरासत का पता चलता है। भारतीय पुरातत्व विभाग व्दारा किले के संरक्षण मे उत्खनन व जीर्णोध्दार के काम कराये है जो किले की गरिमा व उसके पुरा वैभव को उकेरने मे सटीक नही बैठ रहे है किले की दीवारो की संरचना मे जो प्राचीन कलाकारी की जाना चाहिए वह नही होने से किले की वास्तविकता का परिचय नही हो पा रहा है। लोगो का कहना है की जीर्णोध्दार मे बिषय विशेषज्ञो का चयन नही होने से यहां पर स्थानीय अकुशल शिल्पियो व मजदूरो से ही काम कराया गया है जो किले की मरम्मत व जीर्णोध्दार के हिसाब से उचित नही है किले मे सपाट काम किया गया है जो आम घरो मकानो मे किया जाता है जबकि किले के निर्माण मे जो तत्कालीन कला का प्रयोग हुआ है उसे ही उकेरा जाना चाहिये गौरझामर के गौड शासनकालीन किले का जीर्णोध्दार अनगढिया अकुशल मिस्त्रियो से नही कराके योग्य व किले के बिषय मे महारत हासिल मिस्त्रियो से कराया जावे जिससे किले की पुरातात्विक प्राचीन संरचना बहाल हो सके । जीर्णोध्दार मे कलाकारो की कलाकारी से ही प्राचीन कृति का लोग दीदार कर सकते है वर्तमान काम बिगार स्वरुप हुआ है जो बेहद घटिया व अनाकर्षक रुप मे देखा जा रहा है इससे पर्यटको को आकर्षित नही किया जा सकता।

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