Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 20 जुलाई 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 20 जुलाई 2023
20 जुलाई 2023 दिन गुरुवार को अधिक श्रावण मास के शुक्ल पक्ष कि तृतीया तिथि है। आज भगवान श्रीसूर्यनारायण पुनर्वसु नक्षत्र को छोड़कर पुष्य नक्षत्र में (रात्रि: 04:11 मिनट पर) चले जायेंगे। स्त्री-स्त्री, चन्द्र-चन्द्र योग, मंडूक वाहन, अमृता नाड़ी, तदिशों चन्द्र: अतः सुवृष्टि योग:। आप सभी सनातनियों को पुष्य नक्षत्र मे सूर्य देवता के प्रवेश होनेपर सुंदर वर्षा के योग की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – द्वितीया 04:31 AM बजे तक उपरान्त तृतीया तिथि है।
🖍️ तिथि के स्वामी :- तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश जी है।
💫 नक्षत्र – आश्लेषा 10:55 AM तक उपरान्त मघा नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी बुध है। तथा नक्षत्र के देवता नागों के राजा शेषनाग को माना गया है।
🔊 योग – सिद्धि 11:22 AM तक उपरान्त व्यतिपात योग है।
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 05:43 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – पूर्ण रात्रि तक
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:09:56
🌅 सूर्यास्त – सायं 19:18:37
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:13 ए एम से 04:55 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:34 ए एम से 05:36 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:55 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:45 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:18 पी एम से 07:38 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:19 पी एम से 08:21 पी एम
💧 अमृत काल : 09:07 ए एम से 10:55 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 21 से 12:48 ए एम, जुलाई 21
❄️ रवि योग : 10:55 ए एम से 05:08 पी एम
🚕 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को स्वर्ण भेंट करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवदर्शन मुहूर्त/सूर्य पुष्य नक्षत्र प्रवेश/ मुस्लिम नूतन वर्षारंभ/ हिजरी सन् 1445 प्रारंभ/ मुस्लिम मुहर्रम मासारंभ/ सिकंदर महान जन्म दिवस, राष्ट्रीय चंद्र दिवस, विश्व छलांग दिवस, अंतरिक्ष अन्वेषण दिवस, अपने ग्राहकों को जानें दिवस, राष्ट्रीय लॉलीपॉप दिवस, मुख्यमंत्री शीला दीक्षित स्मृति दिवस, अभिनेत्रा नसीरुद्दीन शाह जन्म दिवस, भारतीय सेना के ब्रिगेडियर बी. डी. मिश्रा जयन्ती, जीट क्वींडो मार्शल आर्ट आंदोलन संस्थापक ब्रूस ली स्मृति दिवस, कोलंबिया स्वतंत्रता दिवस, विश्व शतरंज दिवस, विज्ञान अन्वेषण दिवस
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है।
🗽 Vastu tips 🗼
वास्तु और ज्योतिष अनुसार सुबह के समय कुछ ऐसे काम होते हैं जिन्हें व्यक्ति को भूलकर भी नहीं करना चाहिए वरना पूरा का पूरा दिन खराब हो जाता हैं, तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं कि सुबह के समय हमें किन कार्यों से दूरी बना लेनी चाहिए, तो आइए आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं।
सुबह के वक्त ना करें ये काम
वास्तु और ज्योतिष की मानें तो सुबह के समय सबसे पहले उठकर आईना नहीं देखना चाहिए। इसे अशुभ माना गया हैं। ऐसा करने से कार्यों में दिनभर असफलता हासिल होती हैं। साथ ही बनते काम भी बिगड़ने लगते हैं। क्योंकि सुबह उठकर दर्पण देखने से नकारात्मकता का प्रवेश जीवन में होता हैं वही इसके अलावा सुबह आंख खुलते ही अपनी परछाई को भी नहीं देखना चाहिए। इसे भी अच्छा नहीं माना जाता हैं। अगर ऐसा कोई करता हैं तो उसे निराशा हाथ लगती हैं।वास्तु अनुसार सुबह उठते ही बंद घड़ी के दर्शन करना भी अशुभ होता हैं क्योंकि बंद घड़ी तरक्की पर विराम लगा देती हैं साथ ही जीवन में परेशानियों के आने का संकेत भी प्रदान करती हैं। इसके अलावा सुबह उठते ही हिंसक जानवरों की तस्वीर या फिर खंडित मूर्ति भी नहीं देखनी चाहिए। इसे अशुभ की निशानी माना जाता हैं ऐसा करने से विवाद, क्लेश बढ़ने की संभावना अधिक हो जाती हैं।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अजमो: अगर आपको पेट में गैस की समस्या है तो अजमो आपके लिए सबसे अच्छा विकल्प है। अजमा का सेवन करने से पेट की समस्याओं से राहत मिलती है। अजमा के बीज में थाइमोल नामक एक यौगिक होता है जो गैस्ट्रिक रस को स्रावित करता है और पाचन में सहायता करता है। पेट की खराबी से राहत पाने के लिए आप अजमा के बीजों का सेवन कर सकते हैं।
छाछ: छाछ के नियमित सेवन से पेट संबंधी समस्याओं से राहत मिलती है। छाछ पीने से पेट का पीएच लेवल अच्छा रहता है जिससे आप एसिडिटी जैसी समस्याओं से बचे रहते हैं। मट्ठे में लैक्टिक एसिड होता है जो गैस्ट्रिक एसिडिटी से राहत देता है। छाछ पीने से पेट को ठंडक मिलती है और हाथ-पैरों की सूजन से राहत मिलती है। अगर आप घर पर छाछ पीते हैं तो यह सबसे अच्छा है। बाहरी छाछ पीने से बचें।
केला: अगर आप पेट में जलन, गैस, एसिडिटी की समस्या से परेशान हैं तो केला खाना शुरू कर दीजिए. केले में पेस्टिन होता है जो आपको गैस की समस्या से राहत दिलाता है। इसके लिए आप केले में चीनी मिलाकर खा सकते हैं.
☕ आरोग्य संजीवनी 🍶
इन 5 घरेलू नुस्खों से आप भी डार्क सर्कल से छुटकारा पा सकते हैं
1 रात को सोने से पहले आंखों के काले घेरों पर बादाम का तेल लगाकर हल्के हाथों से मसाज करें। सुबह उठने के बाद ठंडे पानी से चेहरा और आंखें धो ले। ऐसा कुछ दिनों तक नियमित करें।
2 रात को सोने से पहले व दिन के किसी भी समय आप एक रूई से आंखों के नीचे एक्स्ट्रा वर्जिन कोकोनट ऑयल लगाए और हल्के हाथों से मसाज करें। कुछ घंटों तक इसे ऐसे ही छोड़ने के बाद धो ले।
3 आलू का रस कॉटन बॉल्स की मदद से काले घेरों पर 20 मिनट तक लगाकर रखें फिर ठंडे पानी से धो ले।
4 ठंडा व फ्रीज में रखी हुई खीरे के गोल स्लाइस काट कर 10 मिनट के लिए आंखों पर रख ले।
5 एक चम्मच टमाटर के रस में आधी चम्मच नींबू का रस मिलाएं और इसमे भीगी हुई रूई को 10 मिनट के लिए आंखों पर रखें। फिर आंखों को धो लें।
इन सभी उपायों को है हफ्ते में 2-3 बार दोहराते रहें और नियमित ऐसा तब तक करे जब तक आपको फर्क न दिखने लगे।
🌷 गुरु भक्ति योग 🌸
श्रीमती राधारानी का स्वरूप
श्रीमती राधारानी भगवान कृष्ण की शाश्वत पत्नी हैं। पाँच हज़ार साल पहले, जब भगवान कृष्ण अपनी लीलाएँ करने के लिए इस ग्रह पर आए, तो श्रीमती राधारानी भी प्रकट हुईं।
“भाद्र के महीने में आधी चाँद की रात को, राजा वृषभानु स्नान करने के लिए जमुना में आए और खुद को एक सुनहरी आभा, शुद्ध प्रेम की सुनहरी आभा में डूबा हुआ पाया। यह एक कमल से निकल रहा था, जिसके घेरे पर एक बच्ची खड़ी थी। जब राजा बच्चे को लेकर महल में लौटा तो रानी कीर्तिदा बहुत प्रसन्न हुई। वह इस बात से भी हैरान थी कि लड़की अंधी है।
“भगवान कृष्ण की मां यशोदा ने सुना कि उनकी सबसे अच्छी दोस्त कीर्तिदा को बच्चा हुआ है, इसलिए वह अपने पति और बेटे के साथ उनसे मिलने आईं। कृष्ण रेंगते हुए पालने तक पहुंचे और खुद को ऊपर खींच लिया और अंदर देखा। उस पल, श्रीमती राधारानी की आंखें चमक उठीं और चौड़ी हो गईं और कमल की तरह खिल गईं। ऐसा प्रतीत होता है कि वह इस संसार में कुछ भी नहीं देखना चाहती थी, केवल श्रीकृष्ण का स्वरूप ही देखना चाहती थी। हर कोई खुश था.
“श्रीमती राधारानी ब्रह्मांड की माता हैं, सभी आत्माओं की आध्यात्मिक माता हैं। और माँ की अवधारणा सबसे पवित्र प्रतीक है – पवित्रता, निस्वार्थता, देखभाल, साझा करना, पोषण करना और प्यार का। इसीलिए पवित्र नाम ही हमारा पवित्र मंत्र है। “राधेकृष्ण”
मतलब ‘राधे.’ यह माँ के लिए एक करुण, हताश कर देने वाली पुकार है। ‘राधे! कृपया हमें नश्वर जीवन के इस दुःस्वप्न से जगाएं! जिस पिता को हम भूल गए हैं उसकी याद दिलाओ और हमें घर ले चलो!
श्री कृष्ण के भक्त सावधानीपूर्वक श्रीमति राधारानी की पूजा करते हैं, उन्हें कृष्ण की भक्ति प्रदान करने वाली के रूप में, महा-मंत्र में उनके नाम का ध्यानपूर्वक जप करके, उनके देवता रूप की पूजा करके, और सबसे दयालु श्री चैतन्य महाप्रभु के निर्देशों का पालन करके, जो कि परम दयालु हैं।राधा और कृष्ण का संयुक्त रूप.
“(इसलिए) राधा परम-देवता, सर्वोच्च देवी हैं, और वह सभी के लिए पूजनीय हैं। वह सबकी रक्षा करने वाली है, और वह संपूर्ण ब्रह्मांड की माता है।”
राधारानी कृष्ण से भिन्न व्यक्ति नहीं हैं, या यूं कहें कि वह उनसे एक भी हैं और उनसे भिन्न भी हैं। दो व्यक्ति एक व्यक्ति या एक व्यक्ति दो कैसे हो सकते हैं? एक साधारण उदाहरण से पता चलेगा कि ऐसा कैसे है। सूर्य का अस्तित्व सूर्य के बिना नहीं हो सकता, न ही सूर्य के बिना सूर्य का अस्तित्व हो सकता है,
🌷 जय राधेकृष्ण
❀꧁ 𓇽𝐻𝑎𝑟𝑒 𝐾𝑟𝑖𝑠ℎ𝑛𝑎𓇽꧂❀
⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।


