मध्य प्रदेश

एसडीएम की पहल से तीन साल बाद खुलेगा बेगमगंज-बेरखेड़ी-विदिशा मार्ग

अधूरी सड़क और पुल से 40 गांवों के लोग थे परेशान, बुधवार से युद्धस्तर पर शुरू हुआ काम

ब्यूरो चीफ शब्बीर अहमद
बेगमगंज। पिछले तीन वर्षों से बंद पड़े बेगमगंज -बेरखेड़ी-हैदरगढ़ -विदिशा मार्ग को आखिरकार दोबारा चालू कराने की कवायद शुरू हो गई है। एसडीएम प्रियंका भलावी की पहल पर प्रशासनिक अमले ने मौके का निरीक्षण कर सड़क पर अस्थायी सुधार कार्य शुरू करा दिया है। गुरुवार से इस मार्ग पर पैदल यात्रियों और दोपहिया वाहनों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद है, जबकि आगामी तीन दिनों में बड़े चारपहिया वाहनों के लिए भी मार्ग खोलने की तैयारी है।
करीब 119 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन 46 किलोमीटर लंबे मार्ग का काम लंबे समय से अधूरा पड़ा है। निर्माण एजेंसी श्रीजी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और संबंधित अधिकारियों की लापरवाही के चलते सड़क, पुल, पुलिया और एप्रोच रोड का निर्माण समय पर पूरा नहीं हो सका। सड़क का हस्तांतरण 20 जुलाई 2025 को होना प्रस्तावित था, लेकिन निर्धारित समय बीतने के बाद भी निर्माण कार्य अधूरा रहा।
40 गांवों का संपर्क प्रभावित
बेगमगंज से बेरखेड़ी, बरामदगढ़ी, माला, गोपालपुर और हैदरगढ़ होते हुए विदिशा हाईवे से जुड़ने वाला यह मार्ग क्षेत्र के करीब 40 गांवों के लिए महत्वपूर्ण है। सड़क बंद होने के कारण ग्रामीणों को बेगमगंज, हैदरगढ़, ग्यारसपुर और विदिशा आने-जाने के लिए करीब 30 किलोमीटर का अतिरिक्त चक्कर लगाना पड़ रहा था।
वर्षाकाल में परेशानी और बढ़ गई थी। अधूरे पुल-पुलिया और जलभराव के कारण वैकल्पिक मार्ग भी कई बार बंद हो जाते हैं। ऐसी स्थिति में क्षेत्र के गांवों का संपर्क पूरी तरह कट जाता है और मरीजों, गर्भवती महिलाओं तथा अन्य जरूरतमंदों को अस्पताल पहुंचाने में भी गंभीर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
जेसीबी और डंपरों से डलवाई जा रही मुरम
ग्रामीणों की परेशानी को देखते हुए एसडीएम प्रियंका भलावी ने प्रशासनिक अधिकारियों, एसडीओपी सोनाली गुप्ता , टीआई राजीव उईके और नगर पालिका अध्यक्ष संदीप लोधी के साथ मौके का निरीक्षण किया। इसके बाद सड़क को अस्थायी रूप से आवागमन योग्य बनाने के लिए जेसीबी और डंपरों की मदद से मुरम एवं कोपरा डलवाने का काम शुरू कराया गया।
एसडीएम ने बताया कि बेगमगंज-बेरखेड़ी से हैदरगढ़ तक का एप्रोच रोड बेरखेड़ी पुल के रास्ते गुरुवार से चालू कराया जा रहा है। फिलहाल दोपहिया वाहनों और पैदल यात्रियों को आवागमन की सुविधा मिलेगी। अगले तीन दिनों में बड़े चारपहिया वाहनों के लिए भी मार्ग खोलने का प्रयास किया जा रहा है।
बारिश में टापू बन जाते हैं गांव
चार दिन पहले हुई तेज बारिश और मढ़िया डेम के बंद होने से जलभराव के कारण माला फाटक मार्ग करीब दो दिनों तक बंद रहा। इससे आसपास के गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में लगातार तेज बारिश हो जाए तो वैकल्पिक रास्ते भी बंद हो जाते हैं और पूरा इलाका टापू में तब्दील हो जाता है।
तीन साल से अधूरे पड़े पुल और सड़क निर्माण को लेकर जनप्रतिनिधियों द्वारा कई बार एमपीआरडीसी के अधिकारियों को जल्द काम पूरा करने के निर्देश दिए जा चुके हैं। अब एसडीएम की पहल से मार्ग पर अस्थायी आवागमन शुरू होने की संभावना से क्षेत्र के ग्रामीणों को राहत मिलने की उम्मीद जगी है।

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