ओशो के जन्म दिवस कुचबाड़ा में धूमधाम से मनाया गया
रिपोर्टर : तारकेश्वर शर्मा
रायसेन । रायसेन जिले के छोटे से गाँव कुचवाड़ा में जन्म लेने बाले आचार्य रजनीश जिन्हें ओशो नाम से ख्याति मिली, पूरे विश्व मे अध्यात्म का ज्ञान बाटने बाले ओशो का 11 दिसम्बर को जन्म दिवस उनके अनुयायी बड़े धूम धाम से मनाया गया । देश विदेश के ओशो अनुयायी यहां आकर ओशो के जन्म दिवस मनाते है । शाम 4 बजे ओशो के जन्म स्थान बाले खपरैल घर मे जाकर ओशो के जन्म दिवस मनाया जाता है। विश्व को ऊर्जा देने वाले ओशो आचार्य रजनीश क़ा जन्म उसके अनुयायी बड़े हर्ष से मानतें हैं और ओशो को जिस माँ ने खिलाया था वह भी आज जीवित हैं। भारत सहित पूरी दुनिया को अध्यात्म से नई ऊर्जा देने वाले महान दार्शनिक आचार्य रजनीशचंद्रमोहन ओशो का जन्मोत्सव मनाने के लिए रायसेन जिले के ग्राम कुचवाड़ा स्थित ओशोधाम आश्रम में 11 दिसंबर को ओशो का 82 वा जन्मोत्सव था। रायसेन जिले के छोटे से ग्राम कुचवाड़ा में नाना के घर रजनीश चंद्रमोहन का जन्म हुआ था, जिन्हे आचार्य रजनीश, भगवान रजनीश और ओशो के रुप में पूरी दुनिया में पहचान मिली। इस महान दार्शनिक और विचारक ने अपनी अद्वितीय बौद्धिक क्षमता से दुनियाभर में लोकप्रियता पाई। इनको कमला माँ ने बचपन में खिलाया था कारण कमला माँ ओशो के नाना के घर काम करती थी। ओशो बचपन में चंचल थे और सात साल बाद वहा से चले गए जिस कमला माँ ने ओशो को खिलाया था आज वह दाने दाने के लिए मोहताज हैं। 100 वर्ष पूर्ण करने जा रही माँ ओशो की कहानी सुनती है और रोने लगती हैं। भारत सहित पूरी दुनिया को अध्यात्म से नई ऊर्जा देने वाले महान दार्शनिक आचार्य रजनीशचंद्रमोहन ओशो का जन्मोत्सव मनाने के लिए रायसेन जिले के कुचवाडा में देशी विदेशी भक्तो का ताँता लगा हुआ हैं अद्वितीय बौद्विक क्षमता से पूरी दुनिया को अध्यात्म से जोडऩे वाले ओशो का जन्म रायसेन जिले के ग्राम कुचवाड़ा में 11 दिसंबर 1939 को हुआ था। यह गांव खरगोन से 8 किलोमीटर की दूरी पर है तथा जिले की बरेली, उदयपुरा एवं सिलवानी तहसीलों को जोड़ता है। यहां स्थापित भव्य एवं विशाल ओशोतीर्थ आश्रम के संस्थापक जापान के स्वामी सत्यतीर्थ भारती हैं। उनके अथक परिश्रम से यह आश्रम विशालता लिए है। ओशो का जन्म स्थल होने के कारण कुचवाड़ा अंतरराट्रीय ख्याति प्राप्त है। जापान , गुजरात, दिल्ली, रायपुर से आये भक्तो ने कहा की यही है ओशो का स्वर्ग।




