हरि कथा ही कथा, बाकी सब व्यर्थ और व्यथा है। कथा : पं.कमलेश कृष्ण शास्त्री
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । ग्राम तिन्सुआ में चल रही श्रीमद्भागवत महापुराण कथा के प्रथम दिवस में पं.कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा सद्ज्ञान की पिटारी है ।
यह ब्रह्म-गायित्री है। ये वेदों का सार है। यह स्वयम मंत्र है। इसमें अनेक आख्यान- उपाख्यान- व्याख्यान रूपक दृष्टान्त सिद्धांत हैं। यह एक मात्र औषधि है । भागवत कथा ज्ञान का वह भण्डार है, जिसके वचन और सुनने से वातावरण में शुद्वता आती है। भागवत कथा का अमृतपान करने से मनुष्य की आत्मा व मन पवित्र होते हैं। भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं को जानकर सुख की अनुभूति होती है। कथा की सार्थकता तब ही सिद्व होती है। जब हम इसे अपने जीवन व्यवहार में धारण करें। मन के शुद्विकरण के साथ संशय दूर होता है और शान्ति व मुक्ति मिलती है। कथा जीवन के अनुपयोगी रसों को नियंत्रित करती है। आम आदमी के जीवन में कथा का अहम महत्व है। कथा व्यक्ति को अनुशासित करती है और अपने आप पर नियंत्रण पाने की कला सिखलाती है। जीवन को संतुलित व व्यवस्थित करना कथा है। हम कथा में जिसकी चर्चा करते हैं, वह अनन्त है। कथा का प्रत्येक सन्दर्भ नूतन व आनन्ददायक होता है। हरि कथा ही कथा, बाकी सब व्यर्थ और व्यथा है। कथा जीवन के उस रस को जीवित करती है जो हमारे जीवन में नहीं है। जिस रस को हम बाहर ढूँढते हैं, वह श्री मद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से मिल जाता है भक्तों को भी सीख दी कि कथा श्रवण के बाद हम भी ऐसे सात्विक हो जायें कि हमारा जीवन एक कथा बन जाये ।

