काशी में प्राण त्याग का विशेष महत्व हैं,उसे विश्वेश्वर भगवान अवश्य मुक्ति देते हैं : पंडित रेवाशंकर शास्त्री
रिपोर्टर : आशीष सैनी
सिलवानी । ग्राम उचेहरा जमुनिया मे मिश्रा परिवार द्वारा आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के विश्राम दिवस पर पंडित श्री रेवाशंकर शास्त्री जी जमुनिया वालों के मुखारविंद से शिव महापुराण कथा में पार्वती जी ने भगवान शिव को फिर से पति रूप में पाने के लिए श्री नारद जी के कहने पर कठोर तपस्या की श्री शिव जी ने प्रसन्न होकर वरदान दिया इस प्रकार पार्वती जी के साथ श्री शिव विवाह संपन्न हुआ।
शास्त्री जी ने बताया कि काशी में प्राण त्याग का विशेष महत्व है, उसे विश्वेश्वर भगवान अवश्य मुक्ति देते हैं, इसमें संदेह नहीं। पुराणों में लेख आया है भगवान विष्णु ने स्वयं गंगा के किनारे काशी में भगवान शिव की उपासना की, वहाँ उपासनारत भगवान विष्णु के मणिकर्णिका घाट पर दाहिने कान की मणि गंगा के किनारे गिर जाती है, इसीलिए इसे मणिकर्णिका घाट के नाम से जाना जाता है जिस व्यक्ति का इस घाट पर अंतिम संस्कार हो जाता है वह भगवान शिव को प्राप्त हो जाता है। शास्त्री जी ने काशी की महिमा का बखान करते हुए कहा कि जो व्यक्ति काशी में बास करता है, वह भगवान शिव का कृपापात्र अपने आप बन जाता है। यह पुण्यदायक क्षेत्र है, जो भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। व्यक्ति को चाहिए कि वह परम दयालु भगवान भोलेनाथ का सदैव ध्यान कर, उनके नाम का स्मरण करता रहे। कथा संपन्न होने के बाद प्रसाद वितरण एवं भंडारे का आयोजन मिश्रा परिवार द्वारा किया गया।



