धार्मिक

श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन प्रह्लाद–नृसिंह अवतार की कथा का वाचन

धार्मिक उपदेशों से भरा रहा तीसरा दिन, समुद्र मंथन और 24 अवतारों का विस्तृत वर्णन
सिलवानी। नगर के प्रसिद्ध मां बीजासन माता मंदिर परिसर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा स्थल भक्तिभाव से गूंज उठा। कथा वाचक पंडित अभीषेक शास्त्री ने भगवान के विविध रूपों, लीलाओं और उपदेशों का ऐसा मनोमुग्धकारी वर्णन किया कि उपस्थित श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
इस दिन मुख्य रूप से भक्त प्रह्लाद और भगवान नृसिंह अवतार का विस्तारपूर्वक वर्णन किया गया। पंडित शास्त्री ने बताया कि किस प्रकार असुरराज हिरण्यकश्यप ने अपने पुत्र प्रह्लाद को कई बार मारने का प्रयास किया, परंतु भगवान की कृपा से वे हर बार सुरक्षित रहे। अत्याचार की पराकाष्ठा होने पर भगवान विष्णु ने नृसिंह रूप में प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का संहार किया और भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
कथा के दौरान भगवान के 24 अवतारों का भी उल्लेख किया गया, जिनमें सृष्टि की रचना, पालन और धर्म की स्थापना के विविध संदेश समाहित हैं। इसके साथ ही समुद्र मंथन के प्रसंग का आध्यात्मिक अर्थ बताते हुए पंडित शास्त्री ने इसे मनुष्य के भीतर अच्छे-बुरे विचारों के संघर्ष का प्रतीक बताया।
तीसरे दिन कथा में ध्रुव चरित्र और कपिल मुनि के उपदेशों का भी उल्लेख हुआ। ध्रुव की अटल भक्ति और कपिल मुनि के वैराग्य से जुड़े प्रेरणादायी प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कथा का श्रवण कर लौटते श्रद्धालुओं ने कहा कि प्रत्येक प्रसंग जीवन में भक्ति, सदाचार और आत्मचिंतन का मार्ग प्रशस्त करता है। सात दिवसीय कथा के आगे के दिनों को लेकर भी भक्तों में उत्साह बना हुआ है।

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