Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 20 अप्रैल 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 20 अप्रैल 2023
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
🌞 20 अप्रैल 2023 दिन गुरुवार को वैशाख मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि हैं। वैशाख मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या को वैशाखी अमावस्या के रूप में मनाया जाता है। आज स्नान-दानादि हेतु सर्वश्रेष्ठ मुहूर्त बताया जाता है। क्योंकि अशुभवार अर्थात् गुरुवार होने से यह अशुभ फलदायी होता है। जिसके वजह से मनुष्यों के जीवन में अशुभ फल तथा अनेकों प्रकार के भय की स्थिति बनी रहती है। आज गुरूवार की अमावस्या में गंगा स्नान करने से सहस्रों गायों के दान का पूण्य सहज ही प्राप्त हो जाता है। आप सभी सनातनियों को अमावस्या व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ
🌤️ मास – वैशाख मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – कृष्ण पक्ष अमावस्या 09:41 AM तक उसके बाद प्रतिपदा है।
✏️ तिथि स्वामी – अमावस्या के स्वामी पितर होते हैं। अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं।
💫 नक्षत्र :- अश्विनी 11:11 PM तक उसके बाद भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु ग्रह है। – इस नक्षत्र के देवता अश्विनी कुमार है।
🔊 योग :- विष्कुम्भ योग 01:00 PM तक, उसके बाद प्रीति योग
⚡ प्रथम करण : नाग – 09:41 ए एम तक
✨ द्वितीय करण – किंस्तुघ्न – 09:01 पी एम तक
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:39:01
🌅 सूर्यास्तः- सायः 06:21:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:23 ए एम से 05:07 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:45 ए एम से 05:51 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:46 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:22 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:48 पी एम से 07:10 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:50 पी एम से 07:56 पी एम
💧 अमृत काल : 04:11 पी एम से 05:44 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:58 पी एम से 12:42 ए एम, अप्रैल 21
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:51 ए एम से 11:11 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विप्र को भोजन उपरान्त केसर भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवकार्य अमावस्या/सर्वार्थसिद्धि योग/स्नान-दान अमावस/श्रीशुकदेव जयंती/ग्रीष्म ऋतु प्रारंभ, खग्रास सूर्यग्रहण (यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. इस कारण ग्रहण के नियमों का पालन करना आवश्यक नहीं है), गोपीनाथ मोहंती जयन्ती, चंद्रबली सिंह जन्म दिवस, नारा चंद्रबाबू नायडू जन्म दिवस, ममता कुलकर्णी जन्मोत्सव, यूएन चीनी भाषा दिवस (UN Chinese Language Day), अमावस्या समाप्ति सुबह 09.42
✍🏼 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips 🌹
मुख्य द्वार के सामने कुंआ, गहरा गड्ढा होना भी द्वार वेध होता है । इससे भवन के निवासियों को नाना प्रकार के रोगो का सामना करना पड़ सकता है ।
मुख्य द्वार के आगे मंदिर का होना भी द्वार वेध कहलाता है । इससे भवन के मुखिया को हमेशा संकट घेरे रहते है ।
मुख्य द्वार के आगे बड़ा पेड़ भी द्वार वेध होता है । इससे भवन में रहने वाले बच्चे आगे नहीं बड़ पाते है ।
यदि किसी मकान का कोई कोना आपके मुख्य द्वार के सामने तो वह भी द्वार वेध कहलाता है । इससे गृह स्वामी को आर्थिक दिक्कतों का सामना करना पड़ता है ।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
थकान मिटाने हेतु
ध्यान-भजन करने बैठे और थकान लगे तो क्या करे ? पलथी मार के बैठो और शरीर को चक्की कि नाई गोल घुमाओ | अनाज पीसने कि हाथ्वाली चक्की घूमती है न गोल, ऐसे थोड़ी देर घुमाओ, फिर उसकी विपरीत दिशा में भी घुमाओ |
फिर अपने-आप घूमेगा थोड़ी देर |इससे थकान मिटेगी, ताजगी आयेगी |
💊 आरोग्य संजीवनी 🩸
प्रमेय कि उत्तम औषधिप्रमेह
प्रमेह ( 20 प्रकार के मूत्र-संबंधी विकार, जैसे- मधुमेह, शुक्रमेह आदि) के लिए हल्दी श्रेष्ठ औषधि है |
शुक्रमेह अर्थात मूत्र के साथ शुक्र धातु के जाने कि समस्या में 1 ग्राम हल्दी का चूर्ण 20 मि.ली. आँवले के रस में अथवा 3 से 5 ग्राम आँवला चूर्ण व 1 चम्मच शहद में मिलाकर सेवन करें | इससे थोड़े ही दिनों में लाभ होता है |
श्वेतप्रदर में हल्दी के काढ़े में 1 चम्मच शहद मिलाकर पीने से राहत मिलती है तथा गर्भाशय की शुद्धि व पुष्टि भी होती है |
📚 गुरु भक्ति योग
आचार्य श्री गोपी राम ने अपने शास्त्रों में कई बहुत ही साधारण लेकिन अत्यन्त महत्वपूर्ण बातें बताई हैं। इन बातों को जीवन में उतार लिया जाए तो व्यक्ति को कामयाब होने से कोई नहीं रोक सकता। जानिए ऐसी ही कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में
नात्यन्तं सरलैर्भाव्यं गत्वा पश्य वनस्थलीम् ।
छिद्यन्ते सरलास्तत्र कुब्जास्तिष्ठन्ति पादपाः ॥
आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि व्यक्ति को अपने व्यवहार में बहुत ही भोला या सरल ह्रदय नहीं होना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को सदैव नुकसान होता है। ध्यान रहें कि जंगल में सीधे पेड़ पहले काटे जाते हैं, जबकि आड़े या तिरछे पेड बच जाते हैं।
कामधेनुगुना विद्या ह्यकाले फलदायिनी।
प्रवासे मातृसदृशी विद्या गुप्तं धनं स्मृतम्॥
अर्थात् विद्या कामधेनु गाय के समान है जो प्रत्येक परिस्थिति और मौसम में व्यक्ति को अमृत प्रदान करती है। वह व्यक्ति का माता के समान रक्षण करती है। अतः विद्या को गुप्त धन कहा गया है।
यो ध्रुवाणि परित्यज्य अध्रुवं परिषेवते ।
ध्रुवाणि तस्य नश्यन्ति चाध्रुवं नष्टमेव हि ॥
अर्थात् कभी भी निर्णय लेते समय सही और गलत की पहचान करना न भूलें। जो व्यक्ति निश्चित को गलत मान कर अनिश्चित पर दांव लगाता है, उसका सभी कुछ नष्ट हो जाता है। यानि व्यक्ति को बिना सोचे-समझे निर्णय नहीं लेना चाहिए।
आयुः कर्म च वित्तं च विद्या निधनमेव च ।
पञ्चैतानि हि सृज्यन्ते गर्भस्थस्यैव देहिनः ॥
शास्त्र के अनुसार किसी व्यक्ति को कितनी आयु, कर्म, धन तथा विद्या प्राप्त होगी, यह सब बातें उसकी माता के गर्भ में आने से पहले निश्चित हो जाती हैं। कोई व्यक्ति चाहकर भी इन्हें नहीं बदल सकता।
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रसन्न होती हैं।


