कृषिमध्य प्रदेश

टमाटर की खेती बनी लाभ का धंधा प्रतिदिन 20 से 25 हजार की हो रही बिक्री

ब्युरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । टमाटर किसानों को अच्छा दाम देने वाली फसलों में शामिल है, इसकी खेती से पहले बीज का उपचार जरूर करें, आधुनिक तरीके से खेती करके किसान अच्छी पैदावार और मुनाफा कमाकर अपनी आर्थिक स्थिति ठीक कर रहे है।
नगर के समीप ग्राम बेरखेड़ी बरामद गड़ी में गोलू साहू पिता पन्नालाल साहू के द्वारा सफल किसान सुरेंद्र कुशवाहा से प्रेरणा लेकर परंपरागत खेती को छोड़कर 3 एकड़ के रकबे में टमाटर की खेती करना शुरू की वह प्रतिदिन 20 से 25 हजार रु. की बिक्री कर रहे हैं उनके लिए खेती लाभ का धंधा बन गई है।
क्षेत्र में उद्यान विभाग की अनुदान योजना में शामिल पॉली हाउस, ग्रीन हाउस, टपक पद्धति आदि का लाभ उठाकर किसान परंपरागत खेती छोड़ कर सब्जियों, फलों, मसालों की खेती की ओर ध्यान लगा रहे है। किसानों को परंपरागत खेती के मुकाबले सब्जी की खेती में अधिक मुनाफा मिल रहा है । सब्जियों में सबसे ज्यादा बिकने वाली टमाटर की फसल से किसान लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं। सब्जियों में टमाटर का अपना एक अलग ही महत्व है, टमाटर में पोटेशियम विटामिन लाइकोपीन विटामिन सी भरपूर मात्रा में पाया जाता है, सब्जियों में सलाद, सूप, चटनी में टमाटर का अपना अलग ही महत्व है, आयुर्वेदिक औषधियों में इसे ब्यूटी के लगभग सभी प्रोडक्टों में इस्तेमाल किया जाता है, कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए टमाटर का बेहतरीन इस्तेमाल अब आयुर्वेद में किया जा रहा है, वही हजारों गुणों से भरे टमाटर की खेती से किसान अब अपनी आर्थिक स्थिति सुधार रहे हैं।
ग्राम भुरेरू निवासी किसान सुरेन्द्र कुशवाहा, ग्राम बेरखेड़ी बरामद गढ़ी निवासी किसान गोलू साहू बताते हैं कि वह सर्दियों के लिए खास टमाटर की विशेष फसल करते हैं, यह टमाटर की बिजाई जुलाई के अंत में की जाती है, एक एकड़ में करीब 500 ग्राम बीज बोया जाता है, जिसे बीज का उपचार करने के बाद ही बोते हैं, यह उपचार कैप्टान और थायरम के द्वारा किया जाता है खेत तैयार करते समय करीब 1 एकड़ में 25 टन गोबर की खाद की आवश्यकता होती है, अच्छी पैदावार लेने के लिए 22 किलो पोटाश और 25 किलो फास्फोरस के साथ 45 किलो नाइट्रोजन का मिलान किया जाता है, टमाटर औसतन 10 रुपये से 50 रुपये किलो तक बिक जाता है।
किन किस्मों का हो रहा है इस्तेमाल:- खेत तैयार होने के बाद रोपाई कर दी जाती है, रोपाई के करीब 10 दिन के भीतर जब तक फसल तैयार होती है तब तक सिंचाई की जाती है, खरपतवार नियंत्रण करने के लिए करीब 25 दिन में एक बार निराई गुड़ाई करना अत्यंत आवश्यक होता है।
उद्यान अधिकारी रमाकांत शर्मा ने बताया कि टमाटर की तमाम किस्में बाजार में हैं, जिसमें पूसा हाइब्रिड, रश्मि और अविनाश हैं, बड़ी संख्या में किसान सोनाली आर्का विकास बीज का भी इस्तेमाल कर रहे हैं।
कैसी मिट्टी में होता है उत्पादन:- किसान जुलाई से ही टमाटर की फसल की श्रतैयारी करने लगता है, अगेती फसल का लाभ भी अच्छा मिलता है। इसे नाली बनाकर ऊंचे स्थान पर 100 सेंटीमीटर की दूरी पर रोपने से खरपतवार नियंत्रित रहते हैं, इससे बारिश इत्यादि का पानी भी नहीं ठहरता है, निराई गुड़ाई भी सही तरीके से होती है, टमाटर की फसल दोमट मिट्टी, काली मिट्टी और रेतीली मिट्टी में सफलतापूर्वक की जाती है।
खेत में नमी है जरूरी:-
कीटों से बचाव के लिए 3 ग्राम थायरम को उचित मात्रा में पानी में मिलाकर छिड़काव पद्धति से पौध को उपचारित किया जा सकता है। पेड़ को बढ़ने के दौरान पेड़ के ऊपर बढ़ाने के लिए मचान विधि का इस्तेमाल किसान इन दिनों कर रहे हैं। इससे पौधे मजबूत और फल सुरक्षित रहता है। सर्दियों में पाले से बचाव के लिए 10 से 12 दिनों में आवश्यकता अनुसार सिंचाई की अत्यंत आवश्यकता होती है। खेत में हर समय नमी बनाए रखना जरूरी है।
क्या कहना है किसान का:- किसान गोलू साहू ने बताया कि एक हेक्टेयर में करीब 12 सौ क्विंटल टमाटर का उत्पादन होता है। वह इस फसल को साल में दो बार कर लेते हैं, पहली फसल जुलाई से शुरू होकर मार्च तक चलती है, वहीं दूसरी फसल नवंबर से शुरू होकर जुलाई तक चलती है। इसमें भी उन्हें काफी फायदा होता है टमाटर की फसल ने उनकी आर्थिक स्थिति को काफी अच्छा कर दिया है। विगत 1 साल से टमाटर की फसल लेना शुरू किया है। उद्यान विभाग से बीज वगैरह भी अनुदान पर उपलब्ध हो जाता है।

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