पर्यावरणमध्य प्रदेशहेल्थ

तन गए मोबाइल टॉवर, बांट रहे लोगों को गंभीर बीमारीअधिकांश लगे हैं बगैर अनुमति के

प्रशासन के अधिकारियों ने अपनी आंख पर बांध रखी है पटटी
सिलवानी। सरकार ने भले ही मोबाइल टावर लगाने के लिए सख्त नियम कानून बना दिए हैं लेकिन इसका पालन कराने के प्रति प्रशासन कतई गंभीर नहीं है। नतीजतन नगर की हर गली मोहल्ले से लेकर घनी बस्तियों में बहुमंजिला इमारतों पर भी मोबाइल टावर लग चुके हैं।
इन मोबाइल टॉवरों को लेकर लोगों को डर है कि कहीं बीमारी के शिकार न हो जाएं, इससे डर कर लोग शिकायत भी कर रहे हैं लेकिन प्रशासन के अधिकारी लोगों की शिकायत सुनने को तैयार नहीं हैं। इससे लगता है कि प्रशासन को मोबाइल टॉवर से होने वाली बीमारियों के लोगों को शिकायत होने का बेसब्री से इंतजार है। नगर के बरेली रोड सागर रोड मैन मार्केट बस स्टैंड सहित कई घनी बस्तियों में नियम विरुद्ध टावर लगे हुए हैं। जबकि इन इलाकों में कई स्कूल भी मौजूद हैं। गौर करने वाली बात है कि रेडिशन का खतरा सबसे ज्यादा बच्चों को रहता है। एक्सपर्ट की मानें तो मोबाइल टावर के 300 मीटर एरिया में सबसे ज्यादा रेडिएशन होता है। एंटीना के सामने वाले हिस्से में सबसे ज्यादा तरंगें निकलती हैं। मोबाइल टावर से होने वाले नुकसान में सबसे महत्वपूर्ण बात है कि घर, टावर पर लगे एंटीना के सामने है या पीछे। टावर के एक मीटर के एरिया में 100 गुना ज्यादा रेडिएशन होता है। टावर पर जितने ज्यादा एंटीना लगे होंगे, रेडिएशन भी उतना ज्यादा होगा। मोबाइल टावर लगाने के लिए जमीन से पांच मीटर की ऊंचाई बेस का निर्माण करना जरूरी है।
आबादी वाले इलाके से टावर की दूरी कम से कम 35 मीटर अनिवार्य है। एंटीना संख्या के आधार पर दूरी निर्धारण किया है। नगर में जिस तेजी के साथ मोबाइल टॉवरों की संख्या बढ़ी है, उससे लोगों की सेहत पर भी विपरीत असर पड़ रहा है। वही
चिकित्सकों का मानना है कि मोबाइल के रेडिएशन से कैंसर और न्यूरो संबंधी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। बीते कुछ वर्षों में जिस तेजी से इन बीमारियों के मरीजों में इजाफा हुआ है, उससे चिंता बढ़ गई है और मोबाइल टॉवरों को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।

Related Articles

Back to top button