दशको से जमे अंगदो पर शासन इतना मेहरबान क्यों, कब होगा इनका ट्रांसफर
रिपोर्टर : राजेन्द्र सिंह
पाटन । जबलपुर जिले की पाटन तहसील में कई दशको से जमे अधिकारी कर्मचारियों को क्यों इतना रास आता है पाटन, आपको जानकर हैरानी होगी ये पाटन में जमें रहने के लिए लाखों रुपए पानी की तरह बहाने से भी पीछे नहीं हटते है। पाटन के शासकीय कार्यालय में बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता यहां हर काम का दाम इन अंगदो ने फिक्स करके रखे है कुछ विभाग तो ऐसे है जिनका मंथली पैसा फिक्स है और हर माह इन गैर ज़िम्मेदार अधिकारी कर्मचारियों के पास वह रिश्वत का पैसा पहुंच जाता है। यही प्रमुख वजह है पाटन में जमें रहने की, जबकि एक ईमानदार अधिकारी, कर्मचारी को किसी स्थान से कोई लगाव नहीं होता वह अपनी नौकरी से ही मतलब रखता है और शासन प्रशासन जहा भी उस अधिकारी कर्मचारी को सेवा देने निर्देशित करता है वह खुशी खुशी अपनी सेवा देने उस स्थान पर पहुंच जाता है।
अंगदो की सूची में प्रथम पायदान पर सहायक लेखा अधिकारी बीपी सोनी जनपद पंचायत पाटन का नाम आता है जिसने दैनिक वेतन भोगी कर्मचारी से अपनी नौकरी की शुरुवात अपने ग्रह नगर पाटन से की और आज दिनांक तक लगभग तीन दशको की नौकरी में लगभग 3 माह के लिए मझौली जनपद में चहल कदमी करके पुनः पाटन जनपद में आकर जम गया और इन तीन दशको में बेहतशा कमाई करके जिले में आलीशान बंगला एवं फार्म हाउस का मालिक बन बैठा। जिसका ट्रांसफर करने में शासन ने अपने हाथ खड़े कर दिए अभी विधान सभा चुनाव में कुछ माह ही शेष बचे हैं क्या चुनाव आयोग कई दसको से जमे इन अंगदो पर स्वयं संज्ञान लेकर इनको जिले से बाहर ट्रांसफर करेगा या फिर मौन धारण करेगा।
वही दूसरे पायदान पर इंद्रा त्रिपाठी एसडीओ कृषि विभाग पाटन का नाम आता है इनको भी लगभग दो दशक से भी अधिक समय से पाटन कृषि विभाग में एसडीओ के पद पर विराजमान है। पाटन नगर एवं ग्रामीण इलाकों में संचालित खाद्य उर्वरक की दुकान मालिकों से बेहद घनिष्ठ संबंध होने की वजह से उक्त उर्वरक दुकानों में इनको कोई खामी नजर नहीं आती है। वही समीप की शहपुरा भिटोनी तहसील क्षेत्र में कृषि विभाग के द्वारा लगातार कार्यवाही करते हुए कई उर्वरक दुकानदारों के लाइसेंस रद्द किए गए और कुछ लोगों को कारण बताओं नोटिस भी जारी किए है इसे दुर्भाग्य ही कहे कि पाटन उर्वरक दुकानदारों पर कोई कार्यवाही न करते हुए एक प्रकार से नकली खाद,बीज और कीटनासक दवाएं बेचने की खुली छूट कृषि विभाग के द्वारा पाटन के ऊर्वरक विक्रेताओं को दी जा रही है। सूत्रों ने बताया कि कृषि विभाग को इन दुनकदारो के द्वारा मंथली पैसा फिक्स किया गया है जो विभाग को हर महीने मिल जाता है। यदि शासन स्तर पर नियमानुसार अधिकारियों के ट्रांसफर होते रहे तो कोई भी अधिकारी क्षेत्र में अपनी जड़ें मजबूत नहीं कर सकता है। इसका सीधा लाभ क्षेत्र की जनता को मिलेगा और इन भ्रष्ट अधिकारियों की वजह से सरकार की भी छवि धूमिल होने से बचेगी। इसलिए शासन को तय समय पर एक ही स्थान पर विराजमान इन अंगदो का ट्रांसफर करना जानता जनार्दन के हित में है।



