दुकान कम्प्यूटर्स स्टेशनरी की, बिल लग रहे ईट, गिटृटी, रेत, सीमेंट के
जीएसटी रजिस्टेशन के बाद चालू होता है फर्जी बिल लगाने का सिलसिला
ढीमरखेड़ा के सोनी कम्प्यूटर्स स्टेशनरी एवं सायबर कैफे का मामला
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायतों में एक ही व्यक्ति के बिल लग रहे है। इस संबंध में कई लोगों के द्वारा हमारे संवाददाता से शिकायत की गई तब इस संबंध में पता लगाया गया कि आखिर ढीमरखेड़ा जनपद में ऐसी कौन सी दुकान है जहां पर हर तरह की सामग्री उपलब्ध हो रही है।
मिली जानकारी के आधार पर जब हमनें संबंधित दुकान सोनी कम्प्यूटर्स स्टेशनरी एवं सायबर कैफे दुकान का मुआयना किया तो वहां पर मात्र कापी, किताब सहित जनरल सामग्री ही मिली । उक्त दुकान का संचालन विष्णु प्रजापति के द्वारा किया जाता है और ग्राम पंचातयों में जो फर्जी बिल लगाये जा रहे है वह भी विष्णु प्रजापति के नाम से ही लगते है जहां पर इनके द्वारा रेत, गिट्टी, सीमेंट, लोहा सहित सभी तरह की सामग्रियों के बिल लगाकर राशि आहरित की जा रही है लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े व्यापक पैमाने में फर्जी बिल लगाने का सिलसिला जारी है इसके बावजूद भी संबंधित अधिकारियों द्वारा कभी भी जांच करने की हिमाकत नहीं की जाती है । लिहाजा वर्तमान समय में ढीमरखेड़ा जनपद में कई ऐसे व्यक्तियों के द्वारा वेंडर बनवाया गया है जिनकी न तो दुकान है और न ही संबंधित व्यक्ति द्वारा व्यापार किया जा रहा है इसके बाद भी धड़ल्ले से उनके द्वारा बिल लगाये जा रहे है ।
कम कमीशन का चक्कर
मामला सामने आने के बाद जब हमने उक्त मामले की पतासाजी की तो एक और हैरानी वाली बात सामने आई। नाम नहीं छापने की शर्त पर तीन-चार ग्राम पंचायतों के सरपंच-सचिव ने बताया कि अन्य दुकानदारों की अपेक्षा विष्णु प्रजापति द्वारा कम कमीशन लिया जा रहा है, जिसके कारण अधिकांश ग्राम पंचातयों के बिल यही से लगते है । ढीमरखेडा में यह दुकान ऐसी है जहां हर तरह की सामग्री के बिल लग जाते है । अधिकारियों द्वारा कभी भी इस संबंध में जांच नहीं की जाती है कि पंचायतों में जो बिल लग रहे है उसकी फर्म रजिस्टर्ड है या नहीं है मात्र कागज में बिल बुक छपवाकर कराकर धड़ल्ले से फर्जी बिल लगाने का काम जारी है ।
जीएसटी का रजिस्टेशन, रिटर्न नहीं करते जमा
कमीशन के चक्कर में संबंधित दुकानदार नियमों कायदो को रौंदकर कार्य कर रहे है और उनके द्वारा दिखावे के लिये जीएसटी रजिस्टेशन करा लिया जाता है लेकिन उनके द्वारा रिटर्न जमा नहीं किया जाता है जिससे सरकार को भारी राजस्व की हानि हो रही है तो वहीं बिना संबंधित फर्म के कागजों में दर्शाकर बिल काटे जा रहे है। लिहाजा यह कोई पहला मामला नहीं है इसके बाद भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके है जिसमें संबंधित व्यक्ति द्वारा वह कार्य ही नहीं किया जा रहा है इसके बाद भी बिल लगाने का काम जारी है ।



