धनवाही पशु- चिकित्सालय नौ माह से बंद, पशुपालक हो रहे परेशान
न दवा, न डॉक्टर कैसे बचेगे पशु
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । धनवाही पशु चिकित्सालय नौ माह से बंद पड़ा हुआ है। न ही कोई डॉक्टर, न ही लाईट की व्यवस्था, यहां तक कि बिल्डिंग भी क्षतिग्रस्त हो गई है। पशु चिकित्सालय का नौ माह से ताला तक नहीं खुला हुआ है। डॉक्टर न होने के कारण एवं ताला न खुलने के कारण पशुपालक बेहद परेशान हैं। धनवाही के आस- पास के ग्रामीण क्षेत्र बेहद आबादी कृषि व पशुपालन से जुड़ी हुई है। इसके बावजूद भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। पशु चिकित्सालय बंद होने की वजह से दवाइयां भी मिलना बंद हो गई हैं जिससे पशुपालक बेहद चिंतित हैं। कई राज्यों में इन दिनों लंपी वायरस से गायों की मौत हो रही है. स्थिति को देखते हुए पशुपालन विभाग अलर्ट मोड पर है, परंतु जब धनवाही का पशु चिकित्सालय ही बंद पड़ा हुआ है तो विभाग कोई भी अलर्ट करें सारे नियमों में ताला बंद नजर आ रहा है। वही सूत्रों के द्वारा बताया गया कि लंपी वायरस ने भयंकर तबाही मचाई हुई है. देशभर में इस वायरस से 60 हजार से ज्यादा गायों की मौत हो चुकी है. पशुपालकों का व्यवसाय तबाह हो गया है। प्रशासन की तरफ से निर्देश दिया गया है कि अगर किसी भी पशुपालक को अपनी गायों में इस बीमारी का लक्षण दिखे तो वह तत्काल पशु चिकित्सा विभाग को सूचित करें और इलाज कराएं, लेकिन पशुपालक कैसे पशु चिकित्सा विभाग को जानकारी देंगे जबकि पशु चिकित्सालय में न डॉक्टर है, न बिल्डिंग है, न ही ताला खुलता है बेचारे पशुपालक यहां वहां भटकते नजर आ रहे हैं पशुपालकों की गाय मौत के मुंह में समा रही हैं। विभाग में डॉक्टर न होने के कारण एवं पशु चिकित्सालय धनवाही का ताला बंद होने के कारण जिम्मेदारों के ऊपर प्रश्नचिन्ह खड़ा होता है कि आखिर लगातार गायों की मौतों का जिम्मेदार कौन है। शायद अगर धनवाही का पशु चिकित्सालय खुला होता तो या फिर डॉक्टर उपलब्ध होते तो बेजान जानवरों की मौते न होती।



