मध्य प्रदेश

नगर पालिका परिषद अध्यक्ष की कुर्सी पर नपा अध्यक्ष के पतिदेव के बैठने पर तूल पकड़ा, कांग्रेसी पार्षदों ने कलेक्टर को दिया ज्ञापन

कलेक्टर से हस्तक्षेप कर उचित दिशा निर्देश देने का अनुरोध किया है
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन।
कलेक्टर को सौपे ज्ञापन में कांग्रेस के सभी आठ पार्षदों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए बोले कि असंवैधानिक तरीके से नपाध्यक्ष सविता सेन की कुर्सी पर उनके पतिदेव बैठकर नपा सीएमओ सहित अन्य अधिकारियों व बीजेपी के पार्षदों के साथ बैठकर निर्देश देते हुए वीडियो जारी किया गया है। जबकि यह मामला नियम विरुद्ध और असंवैधानिक तरीका है। भाजपा के पार्षदों द्वारा अप्रत्यक्ष तरीके से वोट देकर नपाध्यक्ष सविता सेन को चुना है। वह शिक्षित और नगर सरकार के लिए निर्णय लेने योग्य सक्षम महिला जनप्रतिनिधि हैं। लेकिन उनके पतिदेव असंवैधानिक तरीके से हर मामले में हस्तक्षेप कर उनकी मर्जी के खिलाफ फैसले ले रहे हैं। उनकी नपाध्यक्ष की कुर्सी पर हमेशा पतिदेव बैठे नजर आते हैं।
नगर के सभी कांग्रेसी पार्षदो ने इस मामले में नाराजगी जताई है ।और आपत्ति उठाते हुए सभी कांग्रेस पार्षदों द्वारा एकजुट होकर बुधवार को दोपहर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे ।इसके बाद नारेबाजी करते हुए कलेक्टर अरविंद दुबे को ज्ञापन दिया गया । इस सारे मामले में बचाव करते हुए उनके पतिदेव व पूर्व नपाध्यक्ष जमना सेन का कहना है कि नपाध्यक्ष की कुर्सी संवैधानिक होती है। मैं भूलवश कुर्सी पर बैठ गया था। मैं इस गलती पर माफी चाहता हूं।
रायसेन नगर ब्लॉक कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष मनोज अग्रवाल के नेतृत्व में बुधवार को दोपहर कांग्रेस के सभी 8 पार्षदों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया है।नगर कांग्रेस अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, पार्षद किरण राजकिशोर सोनी, प्रभात राज चावला, रवि यादव, दीपक थौरात असरीन खान, गोवर्धन सेहरिया, सलीम बी कुरैशी, राजू माहेश्वरी, दौलत सेन एडवोकेट का यह खुला आरोप है कि जहां एक तरफ सरकारें राजनैतिक दलों के नेता महिलाओं को 50 फीसदी आरक्षण की वकालत कर महिलाओं के सशक्तिकरण संबल बनाने की बातें कर रही हैं। वहीं देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, मप्र बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष बीडी शर्मा सीएम शिवराज सिंह चौहान कहते हैं कि आरक्षण देकर महिला जनप्रतिनिधियों को ही कुर्सी पर बैठकर प्रतिनिधित्व करना चाहिए । दूसरी तरफ चाहे नगर सरकार गांव की सरकार व जनपद पंचायत अध्यक्ष नपाध्यक्ष हों उनकी कुर्सी पर उनके पतिदेव का सीधा हस्तक्षेप और कुर्सी पर बैठकर विकास सहित अन्य मसलों को सुलझाते नजर आ रहे हैं। ऐसे लोगों का बैठकों में हिस्सा लेकर विकास संबंधी निर्णय ले रहे हैं। उनके यह फैसले नियम विरुद्ध असंवेधानिक हैं। यह नीति बर्दाश्त के काबिल नहीं है।यह मामला संविधान के विरुद्ध है।
इस संबंध में धीरज सिंह नपा परिषद सीएमओ रायसेन का कहना है कि बैठक में भूल से नपाध्यक्ष सविता सेन के पति जमना सेन उनकी कुर्सी पर बैठकर नपा कर्मचारियों और भाजपा पार्षदों से बातचीत कर रहे थे। इस गलती पर उन्होंने माफी भी मांग ली थी। लेकिन उनकी यह गलती असंवैधानिक है। उन्हें ऐसा कतई नहीं करना चाहिए था।

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