पत्थर की नाव पानी में तैर नही सकती है, आधा अधूरा धर्म ज्ञान बनता है विनाश का कारण :- संयम शास्त्री
जैन चैत्यालय में जयपुर से आए सयंम शास्त्री व अमन शास्त्री, समाजजनो को धर्म कार्य करने कर रहे है प्रेरित।
सांस्कृतिक कार्यक्रम भी किए जा रहे है आयोजित
सिलवानी । तालाब, जलाशय, समुद्र के पानी में कभी भी पत्थर से तैयार नाव तैर नही सकती है। एैसी नाव में जो कोई भी व्यक्ति सवार होगा उसका पतन होना तय है। अतः संयम का परिचय देकर धर्म का ज्ञान अर्जित कर जीवन में किसी भी नाव पर सवार हो । कोई डूब नही सकता है ना ही पतन होगा।
यह उद्गार श्रीतारण तरण जैन चैत्यालय में आयोजित व्याख्यान की कड़ी में रविवार को सुबह के समय जयपुर से आए संयम शास्त्री ने व्यक्त किए । श्री शास्त्री बीते 5 दिनो से लगातार सुबह व रात्रि में धर्म उपदेश देकर समाजजनो को श्रीमद् जिन तारण तरण मंडलाचार्य महाराज के द्वारा विरचित ग्रंथो का रसा स्वादन करा कर जीवन को सात्विकता के मार्ग पर अग्रसर करने को प्रेरित कर रहे हैं। यहां पर अमन शास्त्री जयपुर के द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित कराए जा रहे हैं ।
उन्होने बताया कि अधूरा ज्ञान विनाष का कारण बनता है। द्रष्टांत के माध्यम से उन्होने कहा कि ज्ञान कभी भी अधूरा नही होना चाहिए। जव तक पूरा ज्ञान प्राप्त ना कर ले तव तक कोशिश करना नही छोड़ना चाहिए। धर्म ग्रंथो का निरंतर स्वाध्याय करने से ज्ञान में बृृृद्वि होती है। यह भी व्याख्यान के दौरान बताया कि सच्चे देव गुरु शास्त्र के स्वरुप को समझना होगा। कषाय, विकारी भावो को छोड़ने के बाद ही धर्म किया जा सकता है।
शनिवार की रात्रि को चैत्यालय में वर्ग पहेली प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इस प्रतियोगिता में करीब 150 समाज जनो ने सहभगिता कर अपने ज्ञान कौशल की प्रस्तुति दी। सवालो का सही सही जवाब देने पर 25 प्रतिभागियो को पुरुष्कार देकर सम्मानित किया गया ।



