ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 09 जनवरी 2024

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 09 जनवरी 2024

09 जनवरी 2024 दिन मंगलवार को पौष मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि है। आज सोमवार की मासशिवरात्रि व्रत है। आज पहला घी का दीप शिवमन्दिर में जलाएं। दूसरा विल्ववृक्ष के जड़ में और तीसरा दीपक आंवले के नीचे अवश्य जलाना चाहिये। इससे आपकी कोई भी विशिष्ट मनोकामना हो वो पूरी अवश्य हो जाएगी। आज प्रदोष व्रत भी है। आज के लिए लिखा है:- ऋणापकर्णाय श्रेयस्करम्।। अर्थात आपका चाहे कितना भी और कैसा भी कर्जा हो अवश्य ही पूर्ण हो जायेगा अर्थात कर्जा उतर जाएगा। अगर आज ग्रहदोषों की शांति कर्म आदि करवाया जाय, तो सफलता की गारंटी होती है। साथ ही आज शिवलिंग के ऊपर पहले पञ्चामृत और बाद में शहद का लेपन अवश्य करें। इससे आपके जटिल-से-जटिल रोग सहज ही समाप्त हो जायेंगे। आज भौमे-जया सिद्धियोग भी है। आप सभी सनातनियों को “मासशिवरात्रि व्रत और प्रदोष व्रत” की हार्दिक मंगलकामनाएँ।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर शिशर ऋतु
⛈️ मास – पौष मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथी – मंगलवार पौष माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 10:25 PM तक उपरांत चतुर्दशी
📝 तिथि स्वामी – त्रयोदशी तिथि के देवता हैं त्रयोदशी और शिव। त्रयोदशी में कामदेव की पूजा करने से मनुष्य उत्तम भार्या प्राप्त करता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र ज्येष्ठा 09:11 PM तक उपरांत मूल
🪐 नक्षत्र स्वामी – ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं।
🔊 योग – वृद्धि योग 12:22 AM तक, उसके बाद ध्रुव योग
प्रथम करण : गर – 11:17 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 10:24 पी एम तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:13 बजे से 16:35 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:45:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:15:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:15 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:07 पी एम से 12:49 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:12 पी एम से 02:54 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:38 पी एम से 06:06 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:41 पी एम से 07:02 पी एम
💧 अमृत काल : 12:42 पी एम से 02:15 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:01 ए एम, जनवरी 10 से 12:55 ए एम, जनवरी 10
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का अनार के रस से अभिषेक करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/ मासशिवरात्रि व्रत/ भौमे-जया सिद्धियोग/ राष्ट्रीय खुबानी दिवस, राष्ट्रीय रविवार भोज दिवस, राष्ट्रीय गुब्बारा उदगम दिवस, राष्ट्रीय स्थैतिक बिजली दिवस, राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन प्रशंसा दिवस, (भारतीय स्वतंत्रता सेनानी) सर छोटूराम पुण्य तिथि, प्रसिद्ध पार्श्व गायक महेंद्र कपूर जन्म दिवस, नेशनल क्लीन ऑफ योर डेस्क डे, राष्ट्रीय कानून प्रवर्तन प्रशंसा दिवस, राष्ट्रीय स्थैतिक विद्युत दिवस, राष्ट्रीय गुब्बारा आरोहण दिवस, संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर स्मृति दिवस, डॉ. हरगोविंद खुराना जन्म दिवस, निबंधकार वृंदावनलाल वर्मा जन्म दिवस, प्रमुख नेता सुन्दरलाल बहुगुणा जन्म दिवस
✍🏼 विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🌷 Vastu tips 🌸
बात करें हिंदू धर्म में पीपल के पेड़ कि तो यह बहुत ही पूज्यनीय वृक्ष की श्रेणी में आता है। यहां तक की गीता में श्री कृष्ण ने स्वयं को वृक्षों में पीपल कहा है लेकिन फिर भी कुछ हद तक इसका घर में उगना वास्तु के लिहाज से शुभ नहीं माना जाता है। पीपल के पेड़ की हम अक्सर पूजा करते हैं शनिवार के दिन इसके वृक्ष के नीचे शनि देव को दीपदान भी करते हैं। तो वहीं माना जाता है कि पूर्वजों को भी इस वृक्ष के नीचे जल देने से उन्हें तृप्ति मिलती। इस वृक्ष की पूजा शास्त्रों में सर्वोपरी बताई गई है। लेकिन घर में पीपल के पेड़ का होना फिर भी शुभ नहीं माना जाता है। आइए जानते हैं यदि घर में पीपल का पेड़ उग आए तो क्या करना चाहिए।
पीपल के पेड़ का उगना देता है इस बात का संकेत मान्यता है कि पेड़-पौधे घर में लगाना शुभ होता है लेकिन उनमें से कुछ पौधे बिल्कुल शुभ नहीं होते हैं इसलिए इन्हें घर में नहीं लगाया जाता है। बात करें पीपल की यदि यह पेड़ अचानक से घर में कहीं निकलने लगे तो वास्तु के अनुसार इसका यह संकेत माना जाता है कि आपके पूर्वज आपसे प्रसन्न नहीं हैं और किसी न किसी बात को लेकर वह नाराज हैं। यह भी माना जाता है कि जिस घर में पीपल का पेड़ बार-बार निकलता है उसका कारण पितृ दोष लगना होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां⚜️
👉🏽 अगर आप किसी भी उद्देश्य के लिए अश्वगंधा ले रहे हैं तो इन बातों का ध्यान जरूर रखें :
कभी भी खाली पेट अश्वगंधा ना ले.
अगर आपको कब्ज की शिकायत है या लिवर में गर्मी है तो अश्वगंधा न ले
कभी भी पानी के साथ अश्वगंधा न लें क्योंकि यह कब्ज कर सकता है.
भोजन करने के तुरंत बाद अश्वगंधा न लें क्योंकि भोजन करने के तुरंत बाद लेने से एसिडिटी की समस्या हो सकती है.
अश्वगंधा लेने के बाद कम से कम एक घंटे तक पानी न पीयें.
अश्वगंधा को हमेशा गुनगुने या गरम दूध के साथ ले.
एक दिन में 05–06 ग्राम से ज्यादा अश्वगंधा की मात्रा ना ले.
🍁 आरोग्य संजीवनी ☘️
आंखों की रोशनी कम हो जाए तो क्या करना चाहिए?
दिन में कम से कम 3 बार कीजिए ,
आँखों की रौशनी तेज करने का रामबाण उपाय है ,बहुत ही शानदार एक्सेर्साइज़ है।
मुंह में इतना पानी भर लें की गाल फूल जाये ,2 से 3 सेकंड में आँखों पर दबाव पड़ेगा उस समय ,दोनों आँखों में पानी के छींटे मारें।
ऐसा करने से आँखों में रक्त संचार बढ़ता है। इससे एक महीने में यदि छोटा नंबर हो तो चश्मा भी उतर सकता है ,और आँखों की रौशनी भी तेज होती है ।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
मनुष्य का जन्म क्यों हुआ? क्या हम धरती पर कमाने और खाने के लिए पैदा हुए हैं?
मनुष्य का जन्म केवल कमाने और खाने के लिए तो बिलकुल नहीं हुआ था। मनुष्य का जन्म हिंदू मान्यता के अनुसार चौरासी लाख योनिए के बाद होता है। इसलिए मनुष्य का जन्म महत्वपूर्ण है। लेकिन हम मनुष्य इस महत्वपूर्ण जन्म को भी केवल कमाने और खाने में व्यर्थ कर रहे हैं।
असल में इस मानुष जन्म का असली उद्देश्य तो सत्कर्म कर के इस जन्म और मृत्यु के बन्धनों से मुक्ति पाना है। और इसीलिए यह मनुष्य तन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह केवल मनुष्य तन हीं ऐसा जन्म है जिसमें वह सत्कर्म कर सकता है। बाकी योनियों में तो क्षुधापूर्ति और संसर्ग हीं करते हैं जिससे वंश वृद्धि कर सके। लेकिन मनुष्य तन में वह अच्छे बुरे का फर्क समझ कर अपने लिए अच्छे कर्म चुनता है और अपने जीवन को सार्थक करता है।
लेकिन आज के इस सामाजिक जीवन शैली में यह सत्कर्म प्रत्यक्ष रूप से जीवन का एक मात्र लक्ष्य नहीं बना पाता। इसलिए कमाने खाने के साथ उसे सत्कर्म को भी अपने जीवन में जगह देनी चाहिए। जीवन केवल कमाने खाने के लिए नहीं होता है। इसका लक्ष्य तो सत्कर्म के जरिये मोक्ष पाना होना चाहिए। और संतात्मायें इसी लक्ष्य को पाने के लिए मनुष्य जन्म लेते हैं।
धरती पापों का प्रायश्चित करने के लिए कुछ दिन आराम करने की जगह नहीं है। यहाँ रह कर मनुष्य को सत्य, न्याय, और दया के भाव के साथ अपने अंदर सत्कर्म के बीज बोना चाहिए। यह पूर्णता के शिखर पर पहुँचने का एक जरिया है। मन कर्म और वचन से ईश्वर का यश संसार में फैलाना उसके लिए पवित्र कर्म होना चाहिए।
गीता में भगवान श्री कृष्ण ने कहा था, कर्म कर, फल की चिंता न कर। कर्म प्रधान है। कर्म से मनुष्य अपने कल को सुधार सकता है। और यही कर्म उसे जीवन की पूर्णता की ओर ले जाते हैं।
कुछ लोग अपने कमाने खाने के साथ ऐसे उदहारण प्रस्तुत करते हैं कि वे संसार के लिए कभी मदर टेरेसा जैसे रूप में जन्म लेते हैं। ढेरों ऐसे नाम हैं जिन्होंने कमाने खाने के अलावा भी अपने जीवन का उपयोग सत्कर्मो को समर्पित कर दिया।
इसलिए सिर्फ कमाना खाना नहीं, बल्कि अपने जीवन के लक्ष्य को पहचान कर उसी राह पर चलना चाहिए जिससे उस लक्ष्य को पा सके।
❖ॐ∥▩∥श्री∥ஜ ۩۞۩ ஜ∥श्री∥▩∥ॐ❖
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।

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