
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 16 जनवरी 2026
16 जनवरी 2026 दिन शुक्रवार को माघ मास के कृष्ण पक्ष कि त्रयोदशी तिथि है। आज प्रदोष व्रत भी है। और आज मास शिवरात्रि का परम पावन व्रत भी है। आज की त्रयोदशी को मेरुत्रयोदशी भी जैन लोगों कहते हैं। केरल में आज मट्टपोंगल (कानूव) का व्रत भी मनाया जाएगा। आप सभी सनातनियों बंधुओं को “प्रदोष व्रत एवं मासशिवरात्रि के परम पावन व्रत” की बहुत बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त अनन्त बधाइयां।।
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 *दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं। *शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
*शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए । *शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌦️ मास – माघ मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार माघ माह के कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 10:22 PM तक उपरांत चतुर्दशी
✒️ तिथि स्वामी – त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी हैं। कामदेव प्रेम के देवता माने जाते है ।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र मूल पूर्ण रात्रि
🪐 नक्षत्र स्वामी – मूल नक्षत्र के देवता निरिती देव जी और स्वामी केतु हैं। वहीं राशि स्वामी गुरु है।
⚜️ योग – ध्रुव योग 09:06 PM तक, उसके बाद व्याघात योग
⚡ प्रथम करण गर 09:22 AM तक
✨ द्वितीय करण : वणिज 10:22 PM तक, बाद विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:54:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:29:00
👸🏻 ब्रह्मा मुहूर्त: सुबह 5 बजकर 27 मिनट से 6 बजकर 21 मिनट तक
🔱 प्रदोष काल (पूजा मुहूर्त): सायं 05:47 से रात्रि 08:28 तक (भगवान शिव की पूजा के लिए)
✡️ विजय मुहूर्त : 2 बजकर 16 मिनट से 2 बजकर 58 मिनट तक
🌟 अभिजीत मुहूर्त : 12 बजकर 10 मिनट से 12 बजकर 52 मिनट तक
💧 अमृत काल – 01:13 ए एम – 02:59 ए एम तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त: शाम 5 बजकर 44 मिनट से 6 बजकर 11 मिनट तक
💥 भद्रा: सुबह 09:18 से रात्रि 10:14 तक (भद्रा में शुभ कार्य वर्जित होते हैं)
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग: पूरे दिन (सूर्योदय से अगले दिन सुबह 07:15 तक)
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – मेरु त्रयोदशी/ शुक्र प्रदोष व्रत/ मासिक शिवरात्रि/ भद्रा/ गण्ड मूल/ विडाल योग/ राष्ट्रीय स्टार्टअप इंडिया स्थापना दिवस, भारतीय वैज्ञानिक सुभाष मुखर्जी जन्म दिवस, राष्ट्रीय कुछ न करने का दिवस, पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जयन्ती, राष्ट्रीय मौन दिवस, राष्ट्रीय फिग न्यूटन दिवस, लोकपाल समारोह दिवस, जगदगुरु रामभद्राचार्य जयन्ती, राष्ट्रीय अंजीर न्यूटन दिवस, राष्ट्रीय बिना स्केलपेल दिवस, अपने ग्राहकों को जानें दिवस, राष्ट्रीय शून्य दिवस, राष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता दिवस, अंतर्राष्ट्रीय तीखा और मसालेदार भोजन दिवस, सिखों के, गुरु हर राय जयन्ती, प्रसिद्ध संगीतकार ओ. पी. नैय्यर जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय), राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा सप्ताह 11 जनवरी- 17 जनवरी तक
✍🏼 तिथि विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
शनिवार या मंगलवार को मुख्य द्वार पर नींबू और सात हरी मिर्च लटकाएं। वास्तु के अनुसार, यह उपाय बुरी नजर को सोखने में कारगर माना जाता है और साइंस कहता है इसकी गंध कीड़ों को दूर भगाती है। हालांकि, हर सप्ताह इसे बदल देना चाहिए।
काला धागा बांधने का उपाय मुख्य द्वार के हैंडल या दहलीज पर काला धागा बांधना भी नजर दोष से बचाव करता है। काला रंग नकारात्मक ऊर्जा को अवशोषित करने में मदद करता है।
कपूर और गुग्गल से करें धूनी रोज शाम कपूर और गुग्गल की धूनी पूरे घर में दें। इसकी खुशबू वातावरण को शुद्ध करती है और नकारात्मक शक्तियों का नाश करती है।
नमक-फिटकरी से करें ऊर्जा शुद्ध वास्तु में नमक और फिटकरी नेगेटिव एनर्जी सोखने वाले तत्व माने जाते हैं। सप्ताह में दो बार पोंछे के पानी में सेंधा नमक मिलाकर घर साफ करें। साथ ही बाथरूम के कोने में कांच के कटोरे में फिटकरी रखें, इससे नजर दोष कम होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
ठंड में गुड़ खाने से मिलते हैं ये फायदे:
शरीर को डिटॉक्स करता है: सर्दियों में गुड़ खाने से आंतों, पेट और फेफड़ों की सफाई होती है। यह धूल के कणों और विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है। गुड़ फेफड़ों में ऑक्सीजन का लेवल बढ़ाता है, जिससे शरीर में नमक और पोटेशियम का लेवल बढ़ता है। सोडियम-पोटेशियम बैलेंस एसिडिक रिएक्शन को कंट्रोल करके खून की शुद्धता बनाए रखता है।
*जोड़ों के दर्द से दिलाए राहत: अगर इस मौसम में जोड़ों में दर्द और अकड़न रहती है तो गुड़ आपके लिए फायदेमंद हो सकता है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि अदरक और गुड़ को एक साथ लेने से सूजन काफी कम हो सकती है। गुड़ के साथ नियमित रूप से दूध पीने से हड्डियां मजबूत होती हैं और गठिया और हड्डियों और जोड़ों की दूसरी बीमारियों को रोकने में मदद मिलती है।
*सर्दी और खांसी कंट्रोल होती है: सर्दी और खांसी के लक्षणों को कम करने के लिए गुड़ खाने की सलाह दी जाती है। गुड़ गले की अंदरूनी परत पर एक परत बना लेता है, जिससे खुजली और गले में खराश जैसे लक्षण कम हो जाते हैं। अपनी गर्म तासीर के कारण, गुड़ एक बेहतरीन चीज़ है जो सर्दी और फ्लू के इलाज में मदद करता है। 🫘 आरोग्य संजीवनी 🩸
बालों के लिए हेल्दी: काला चना प्रोटीन, जिंक और विटामिन B6 का एक समृद्ध स्रोत है, ये सभी बालों के लिए ज़रूरी हैं। यह जड़ों को पोषण देने और बालों का झड़ना कम करने में मदद करता है, साथ ही बालों को घना बनाता है। इसमें मौजूद मैंगनीज समय से पहले बालों के सफेद होने और पिगमेंटेशन की समस्याओं को रोकने में मदद करता है।
ऊर्जा प्रदान करता है: भिगोए हुए काले चने से धीरे-धीरे और लगातार ऊर्जा मिलती है, जिससे आप पूरे दिन एक्टिव रहते हैं। इसमें कॉम्प्लेक्स कार्ब्स होते हैं जो आपके शरीर को बिना किसी अचानक उतार-चढ़ाव के ऊर्जा देते हैं। नियमित सेवन से आप मज़बूत महसूस करते हैं और थकान से लड़ते हैं, खासकर लंबी सुबह या शारीरिक गतिविधि के दौरान यह बहुत मददगार होता है।* हीमोग्लोबिन को बढ़ाता है: भिगोया हुआ चना आयरन से भरपूर होता है। इसे सुबह खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ाने में मदद मिलती है, जिससे यह एनीमिया या कम ऊर्जा वाले लोगों के लिए आदर्श है। यह गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए सप्लीमेंट्स के बिना रक्त स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आयरन का एक प्राकृतिक स्रोत भी है। 📚 गुरु भक्ति योग🕯️
पुराणों में कल्पवास के नियम
धर्म शास्त्रों में कल्पवास के 21 नियम बताए गए हैं। इसमें शामिल हैः* असत्य (झूठ) न बोलना, 2. हर परिस्थिति में सत्य बोला, 3. घर-गृहस्थी की चिंता से मुक्त होना, 4. गंगा में सुबह, दोपहर व शाम को स्नान करना, 5. शिविर के बाहर तुलसी का बिरवा रोपना व जौ बोना, 6. तुलसी व जौ को प्रतिदिन जल अर्पित करना, 7. ब्रह्मचर्य का पालन करना, 8. खुद या पत्नी का बनाया सात्विक भोजन करना, 9. सत्संग में भाग लेना, 10. इंद्रियों में संयम रखना, 11. पितरों का पिंडदान करना, 12. हिंसा से दूर रहना, 13. विलासिता से दूर रहना, 14. परनिंदा न करना, 15. जमीन पर सोना, 16. भोर में जगना, 17. किसी भी परिस्थिति में मेला क्षेत्र न छोड़ना, 18. धार्मिक ग्रंथों व पुस्तकों का पाठ करना, 19. आपस में धार्मिक चर्चा करना, 20. प्रतिदिन संतों को भोजन कराकर दक्षिणा देना, 21. गृहस्थ आश्रम में लौटने के बाद कल्पवास के नियम का पालन करना। कल्पवास के चार सख्त नियम
कल्पवास के दौरान 21 नियम बताए गए हैं, लेकिन चार नियम ऐसे हैं जिनका सख्त तौर पर पालन अनिवार्य होता है।
इसमें से पहला है पवित्र नदी के तट पर साधारण तंबू या झोपड़ी में निवास।*
दूसरा है प्रतिदिन सूर्योदय से पहले सहित दिन में तीन बार स्नान।* तीसरा दिन में केवल एक बार शुद्ध सात्विक भोजन, जिसमें मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज का त्याग हो। चौथा है नियमित पूजा, ध्यान और भजन-कीर्तन के साथ संयमित जीवन। ══❖═══▩ஜ ۩۞۩ ஜ▩═══❖══ ⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्। *आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।।



