बुरे कर्म न हों, प्रायश्चित करें : ब्रह्मचारी जी महाराज
सिलवानी । पापों से बचने हेतु सच्चे मन से प्रायश्चित हो जाए तो व्यक्ति पाप कर्म को बार बार नहीं करता। मन की अशुद्धि से ही जन्म मरण के चक्रव्यूह में हम फंसते रहते हैं, इस चक्रव्यूह से निकलने के लिए अपने समय व मन को शिवकथा के सुनने व मनन करने में लगाएं।
उक्त उदगार ग्राम बम्होरी वर्धा में आयोजित श्री शिव महापुराण कथा के प्रथम दिवस श्री ब्रम्हचारी जी महाराज माँगरौल आश्रम ने व्यास गादी से कही। शिवपुराण के अंतर्गत रुद्र संहिता का महत्त्व बताते हुए पूज्य ब्रम्हचारी जी महाराज ने कहा कि इस संहिता का पाठ पितृ पक्ष में विल्व वृक्ष के नीचे करने से पितृ उच्च लोकों में निवास करते हैं व मोक्ष को प्राप्त कर लेते हैं। अगर रुद्र संहिता का पाठ भैरव मंदिर में किया जावे तो व्यक्ति की मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
शनिवार से ग्राम बम्होरी बर्धा में शिवपुराण कथा का आयोजन प्रारंभ हुआ है, कथा के प्रारंभ में कलश यात्रा निकाली गई जो गाँव के श्रीराधा कृष्ण मन्दिर से प्रारंभ होकर पूरे गाँव में गाजे वाजे के साथ घूम कर कथा स्थल पर पहुंची यात्रा में यजमान रमाकांत शुक्ला अपने सिर पर शिवपुराण को धारण किये हुए थे, व रथ पर सवार श्री जी महाराज विराजमान रहे। इस कलश यात्रा में आसपास के गाँवों से ग्रामवासी सम्मलित हुए। जहाँ पुराण पूजन के पश्चात शिव पुराण कथा प्रारंभ हुई।
व्यासगादी से कथा विस्तार कर ब्रह्मचारी जी ने बताया कि व्यक्ति अगर अपने भोजन को आधा, पानी पीने को दुगना, मेहनत को तीन गुना एवं सकारात्मकता को चार गुना बढ़ा ले तो वह पुराणों में वर्णित कलयुग में अपनी एक सौ पच्चीस वर्ष की आयु को जी सकता है।
मनुष्य को ताश, चौपड़ में समय खराब न कर उस समय को शिव चरणों के भजनों, उनके ध्यान में लगाना चाहिए। कलियुग में नियमों के पालन द्वारा सफल व स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है।
शिवकथा का आयोजन आगामी छह जनवरी तक होगा। यजमान परिवार ने समस्त क्षेत्र वासियों से विनम्र आग्रह किया है कि शिवकथा श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित करें।



