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समुद्र मंथन से सत्ता मंथन तक : मोदी सरकार , संघर्ष और संभावित भविष्य

दिव्य चिंतन : हरीश मिश्र, लेखक वरिष्ठ पत्रकार
पौराणिक कथा अनुसार दुर्वासा ऋषि ने देवराज इन्द्र को श्री हीन हो जाने का श्राप दिया था।
भगवान विष्णु ने इंद्र को श्राप मुक्ति के लिए असुरों का साथ लेकर ‘समुद्र मंथन’ का उपाय बताया। भगवान विष्णु ने कहा कि समुद्र मंथन से जो अमृत कलश प्राप्त होगा, उसके रसपान से सभी अमर हो जाएंगे। तब दो अलग-अलग विचारधाराओं, देवताओं और असुरों ने मिलकर महागठबंधन बनाकर, मंदार पर्वत को मथनी की छड़ी और वासुकी को मथनी की रस्सी बनाकर समुद्र मंथन किया।
समुद्र मंथन के तेरहवें क्रम में अमृत कलश निकला। भगवान विष्णु ने मोहिनी रूप धारण कर देवताओं को अमृत पान कराया, लेकिन एक राक्षस देवताओं की पंक्ति में जाकर बैठ गया और अमृत पान कर लिया। यह देखकर विष्णु भगवान ने सुदर्शन चक्र से उसका गला काट दिया। वह अमृत पान कर चुका था, इसलिए मरा नहीं और उसके दो टुकड़े राहु और केतु कहलाए। अमृत वितरण में भेदभाव के कारण महागठबंधन टूट गया था।
स्वतंत्र भारत में अलग-अलग विचारधाराओं के राजनेताओं, दलों के मध्य कई बार सत्ता अमृत मंथन के लिए महागठबंधन हुआ। अव्वल दर्जे के बेईमान-भ्रष्ट नेताओं ने कुर्सी को मथनी की छड़ी और मतदाताओं की भावनाओं को मथनी की रस्सी बनाकर सत्ता की कुर्सी का दोहन कर अमृत पान किया।
गंठबंधन का नेतृत्व कितना भी ईमानदार नायक करे, लेकिन समर्थन दे रहे अव्वल दर्जे के बेईमान-भ्रष्ट नेताओं की अति महत्वाकांक्षाओं, नाजायज मांगों को पूरा करते-करते सरकारें बिखर गईं। मोरारजी देसाई, वी.पी. सिंह, चौधरी चरण सिंह, अटल बिहारी वाजपेयी, इंद्रकुमार गुजराल, चंद्रशेखर, एच.डी. देवगौड़ा ने भानुमति का कुनबा तो जोड़ लिया लेकिन राहु-केतु की नकारात्मक परिणाम की धमकी के कारण निर्भीक होकर कार्य नहीं कर सके। समुद्र मंथन से लेकर आज तक जीतने भी गठबंधन हुए हैं, टूटे ही हैं।
2014 और 2019 में भी एन.डी.ए. गठबंधन की सरकार बनी। मोदी सरकार को पूर्ण बहुमत से अधिक सीटें प्राप्त होने के कारण भाजपा के असंतुष्ट नेता और सहयोगी दलों के नेता सौदेबाजी नहीं कर सके। लेकिन 2024 में परिस्थितियां बदल गई हैं। भाजपा की 240 सीटें हैं, जो बहुमत से 32 सीटें कम हैं।
मोदी सरकार के लिए 3.0 सरकार चलाना आसान नहीं होगा। भाजपा के असंतुष्ट नेता गिरोह बनाएंगे, छुपकर शिकार करेंगे, समर्थन देने वाले रुलाएंगे, कदम-कदम पर रोकेंगे-टोकेंगे, डील-नो-डील चलती रहेगी।
चिराग को सत्ता के मोह का मधुमेह रोग विरासत में मिला है। चिराग कब तक रोशन रहे कह नहीं सकते। बाबू अच्छी तरह जानते हैं टेबल के नीचे से लिफाफा कैसे लिया जाता है। पलटू दास की अंतिम इच्छा एक बार प्रधानमंत्री बनने की है। वह कभी भी, कहीं भी वंदे भारत ट्रेन में ब्रेक लगाकर पलट सकते हैं।
अन्य छोटे-छोटे दल सत्ता की वह साले-सालियां हैं जो जीजा जी के जूते चुरा कर पैसे लेते रहेंगे और जूते वापस देते रहेंगे।
पिछले 10 साल में बबूल के पेड़ पर ऑपरेशन लोटस के तहत लाल कपड़े में लोटे में टंगी अनाथ हुई लोकतांत्रिक सरकारों की आत्माएं मुक्ति के लिए भटक रही हैं, उनका अभी तक क्षिप्रा, नर्मदा, गंगा में तर्पण नहीं हुआ। मध्यप्रदेश में अनाथ हुई आत्मा भटक रही है। महाराष्ट्र में एकनाथ ने रायता फैला कर छोड़ दिया, समेटा नहीं और कर्नाटक के अकाल मृत्यु प्राप्त स्वामी की बद्दुआएं फलीभूत करने के लिए इंडिया गठबंधन के तांत्रिक एन.डी.ए. के घटक दलों को प्रलोभन देकर प्राण हरण करेंगे। नेताओं के लिए राष्ट्रवाद, वचन और ईमान के लिए कोई संवैधानिक लक्ष्मण रेखा नहीं है।
भाजपा सरकार बना रही है। शपथ दिनांक 9 जून से नौटंकी प्रारंभ होगी। भरपूर मनोरंजन देखने को मिलेगा। 3.0 अर्थात 3 वर्ष में राहु-केतु सत्ता का अमृत पान करने के लिए सौदेबाजी करेंगे या सरकार गिराएंगे। इन परिस्थितियों में भाजपा द्वारा सरकार न बनाना शुभ होता। यदि भाजपा सरकार न बनाती तब इंडिया गठबंधन जोड़-तोड़ कर सरकार तो बना लेती, लेकिन उसकी आयु एक वर्ष से अधिक नहीं होती। 10 वर्ष से कुपोषण का शिकार इंडिया गठबंधन के नेता छीना झपटी जरूर करते। सरकार अल्प आयु में कुपोषण के कारण, अपने ही कुकर्मों से अकाल मृत्यु को प्राप्त होती। ऐसी परिस्थितियों में मध्यावधि चुनाव होते और भाजपा की पुनः वापसी भारी बहुमत से होती । वापसी में पुनः सुनामी आएगी अर्थात भाजपा को पूर्ण बहुमत हासिल होता। इसलिए भाजपा को सरकार नहीं बनाना चाहिए था।

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