भगवान के चरणो में प्रेम नही हैं तो काहे का जीवन : जगतगुरु रामभद्राचार्य जी
किसान का कण और विद्वान का क्षण नष्ट नहीं करना चाहिये
श्रीरामानन्द सम्प्रदाय में 70 लाख से ज्यादा संत हैं मै उनका नेतृव करता हूं।
तीन ग्रंथो पर भाष्य लिखा प्रधानमंत्री ने लोकार्पण किया – जगतगुरु रामभद्राचार्य जी महाराज
पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल, पूर्व राज्यमंत्री लोक विजय शाह ने कथा श्रवण की
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
सिलवानी। सिलवानी नगर के रघुकुल भवन पर डॉक्टर रामाधार जी की पुण्य स्मृति में शिववरण सिंह रघुवंशी, प्रशांत सिंह रघुवंशी के द्वारा भव्य श्रीमद भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा वेदाचार्य पंडित रामकृपालु उपाध्याय द्वारा व्यास पीठ की पूजा अर्चना की गई।
पांचवे दिन की कथा में जगत गुरु राम भद्राचार्य जी ने श्रीकृष्ण बाल लीला का प्रसंग श्रवण कराया।
धर्मचक्रवर्ती पदम् विभूषण जगतगुरु स्वामी श्रीरामभद्राचार्य जी महाराज जी ने कथा का वाचन करते हुए कहा की भारत माता का आशीर्वाद और सभी धर्म प्रेमी बंधुओ के पुण्य से मैने 1998 में तीनों ग्रंथो पर भाष्य लिखा था, 6 अप्रैल 1998 को भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री स्व अटल विहारी वाजपेयी ने लोकार्पण किया था। जगतगुरु वही है जो तीनों ग्रंथो पर सिद्धांत पूर्वक भाष्य लिखें।
वही जगतगुरु ने कहा की श्रीरामानन्द सम्प्रदाय में 70 लाख से ज्यादा संत हैं मै उनका नेतृव करता हूं, साधु ही तो हमारी सेना है, श्रीमद भागवत जी में 12 स्कंध हैं वो पुराणों के तिलक है। जगतगुरु रामभद्राचार्य ने कहा की मैं अभी 50 बर्ष और हिंदुत्व का नेतृव करूंगा घवड़ाने की जरूरत नहीं है। शास्त्र चर्चा के लिए जब बुलाओगे में उपस्थित हो जाऊंगा।
संसार में कथा भगवान की सब करते है, ग्रहस्थ संसार का व्यक्ति और भगवान का भक्त संत भी, पर संसार के गृहस्थ संसार के व्यक्ति के मुख से वासना निकलेगी और भक्त संत के मुख से उपासना निकलेगी, इसलिए मन लगाकर संतो भक्तो की कथा श्रवण करना चाहिए। जीव बुद्धि का उपयोग भगवान के भजन में लगाना चाहिए और भगवान से प्रार्थना करना चाहिए कि हमारी बुद्धि आप के श्री चरणों में लगी रहे।
जगतगुरु ने कहा की श्रीमद भागवत के चौथे स्कंद में बहुत ही सुंदर बात का वर्णन है। क्या गृहस्थ व्यक्ति को भगवान के दर्शन हो सकते है। तो भगवान कहते है यदि जीव सभी बुरे आचरण कार्यों को छोड़कर समय निकाल कर भगवान का भजन करे भगवान पर चर्चा करें, तो ग्रहस्थ व्यक्ति को तीर्थ नही जाना पड़ेगा उसके घर ही अयोध्या, मथुरा, वृंदावन, चित्रकूट सभी तीर्थ आ जाएंगे ।
जगतगुरु ने कहा कि किसान का कण और विद्वान का क्षण नष्ठ नहीं करना चाहिये, किसान देश की शान है। विद्वान से जितना भजन शास्त्र सीखना है सीख लो ये भजन ही तो भगवान धाम ले जाएगा।
जिनका मन भगवान के चरणो में लग जाए तो उनका विघ्न भी कुछ नही कर सकते जितने विघ्न आयेंगे उतना ही हरी भजन ज्यादा होगा। जैसे की मीरा जी ने भजन नही छोड़ा।
यदि भगवान भजन से प्रेम नही है उनके चरणों से प्रेम नही है तो काहे का जीवन जीव का चाहे वह ग्रहस्त जीवन हो या विरक्त जीवन। भगवान भजन के लिए तो जीवन मिला है। ये उनका ही दिया हुआ शरीर है जीव आत्मा भी उनकी है। अत भगवान का भजन प्रत्येक व्यक्ति को करना चाहिए । धर्म की रक्षा करना चाहिए वही तो सनातन धर्म का जीव है।
कांग्रेस के पूर्व मंत्री राजकुमार पटेल, पूर्व दर्जा प्राप्त राज्यमंत्री उद्यमी विकास निगम अध्यक्ष राजा लोकविजय शाह, किसान नेता महेंद्र सिंह रघुवंशी वर्धा ने कथा श्रवण कर जगतगुरु से आशीर्वाद प्राप्त किया। मंच संचालन प्रोफ़ेसर डॉ आचार्य ब्रजेश दीक्षित ने किया।
हजारों की संख्या में श्रद्धालु कथा श्रवण कर जगतगुरु के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त कर रहे है।
वही एसडीओपी राजेश तिवारी, थाना प्रभारी भारत सिंह, एव समिति के सहयोगी द्वारा चुस्त व्यवस्था बनाई जा रही है जिससे किसी भी श्रद्धालु को कोई परेशानी ना हो।




