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Today Panchang आज का पंचांग बुधवार, 03 जून 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
         *_जय श्री हरि_*
🧾 *_आज का पंचांग_* 🧾
        बुधवार  03 जून  2026
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ *_दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
*_बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
*_बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 *_शुभ हिन्दू नववर्ष 2026 विक्रम संवत : 2083 सिद्धार्थी विक्रम : 1969 शर्वरी_*
🌐 *_रौद्र संवत्सर विक्रम संवत 2083,_*
✡️ *_शक संवत 1948 (पराभव संवत्सर), चैत्र_*
☮️ *_गुजराती सम्वत : 2082 पिङ्गल_*
☸️ *_काली सम्वत् 5127_*
🕉️ *_संवत्सर (बृहस्पति) पराभव_*
☣️ *_आयन –  उत्तरायण_*
☂️ *_ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु_*
☀️ *_मास – शुद्ध ज्यैष्ठ मास_*
🌔 *_पक्ष – कृष्ण पक्ष_*
📅 *_तिथि – बुधवार ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 09:21 PM तक उपरांत चतुर्थी_*
✏️ *_तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।_*
💫 *_नक्षत्र- नक्षत्र पूर्वाषाढ़ा 12:59 AM तक उपरांत उत्तराषाढ़ा_*
🪐 *_नक्षत्र स्वामी – पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह है। नक्षत्र के देवता जल (अप) या वरुण देव (वर्षा के देवता) हैं।_*
⚜️ *_योग – शुभ योग 08:11 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग_*
⚡ *_प्रथम करण : वणिज 08:12 AM तक_*
✨ *_द्वितीय करण: विष्टि 09:21 PM तक, बाद बव_*
🔥 *_गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 11:10 से 12:35 बजे तक ।_*
⚜️ *_दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।_*
🤖 *_राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:35 से 2:00 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |_*
🌞 *_सूर्योदयः – प्रातः 05:22:24_*
🌅 *_सूर्यास्तः – सायं 19:15:36_*
👸🏻 *_ब्रह्म मुहूर्त : प्रातः काल 04:02 ए एम से 04:43 ए एम_*
🌆 *_प्रातः सन्ध्या : प्रातः काल 04:22 ए एम से 05:23 ए एम_*
🌟 *_अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं_*
✡️ *_विजय मुहूर्त : दोपहर 02:38 पी एम से 03:34 पी एम_*
🐃 *_गोधूलि मुहूर्त : संध्या काल 07:14 पी एम से 07:34 पी एम_*
🌌 *_सायाह्न सन्ध्या : संध्या काल 07:15 पी एम से 08:16 पी एम_*
💧 *_अमृत काल : संध्या काल 07:37 पी एम से 09:24 पी एम_*
🗣️ *_निशिता मुहूर्त : रात्रि काल 11:59 पी एम से 12:40 ए एम, जून 04_*
🚓 *_यात्रा शकुन- बुधवार को हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।_*
👉🏼 *_आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।_*
🤷🏻‍♀️ *_आज का उपाय-किसी बटुक को सवाकिलो साबुत मूंग परिपूरित कांस्य पात्र भेंट करें।_*
🪵 *_वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।_*
⚛️ *_पर्व एवं त्यौहार – पुरुषोत्तम मास का 18वाँ दिन/ विभुवन संकष्टी/ भद्रा/ विडाल योग/ मां धूमावती जयन्ती/ ईसाई पर्व दिवस/ गणेश संकट चतुर्थी चन्द्रोदय 09.52/ हरियाणा के कुशल राजनीतिज्ञ श्री भजन लाल जी स्मृति दिवस, बिहार के मुख्यमंत्री कृष्ण बल्लभ सहाय स्मृति दिवस, साहित्यकार गोविन्द शंकर कुरुप जन्म दिवस, गुजरात के भूतपूर्व मुख्यमंत्री  चिमनभाई पटेल जयन्ती, कीट निवारक जागरूकता दिवस, विश्व साइकिल दिवस, (भारत के पूर्व रक्षा मंत्री) जॉर्ज फर्नांडिस जन्म दिवस, (तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री) एम. करुणानिधि जन्म दिवस
✍🏼 *_तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।        
🗼 *_Vastu tips_* 🛟
विनाश से जुड़ी तस्वीरें कुछ लोगों को घर में युद्ध, बर्बादी या हिंसा से जुड़ी पेंटिंग और मूर्तियां सजाने का शौक होता है। वास्तु मान्यताओं के अनुसार ऐसी तस्वीरें घर की सकारात्मक ऊर्जा को प्रभावित करती हैं। इससे घर में तनाव और बेचैनी का माहौल बन सकता है।
*_बंद घड़ी और पुराने कैलेंडर वास्तु और फेंगशुई में बंद घड़ी को रुकी हुई तरक्की का संकेत माना जाता है। वहीं पुराने कैलेंडर को लंबे समय तक दीवार पर टांगकर रखना भी शुभ नहीं माना जाता। कहा जाता है कि इससे जीवन में ठहराव बढ़ सकता है। इसलिए समय-समय पर कैलेंडर बदलना और खराब घड़ी हटाना जरूरी माना गया है।
*_टूटे हुए शीशे आजकल कई लोग टूटे या डिजाइनर क्रैक वाले ग्लास को सजावट के रूप में इस्तेमाल करते हैं। लेकिन वास्तु शास्त्र में टूटे हुए शीशे को अशुभता और नकारात्मक ऊर्जा से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इससे घर के सदस्यों के मानसिक संतुलन और रिश्तों पर भी असर पड़ सकता है।
*_कांटेदार पौधों से बढ़ता तनाव घर में कैक्टस और अन्य कांटेदार पौधे लगाने का चलन तेजी से बढ़ा है, लेकिन वास्तु के अनुसार ऐसे पौधे रिश्तों में तनाव और मतभेद बढ़ाने वाले माने जाते हैं। कहा जाता है कि ये घर की सकारात्मक ऊर्जा को कम कर सकते हैं।        
♻️ *जीवनोपयोगी कुंजियां* ⚜️
इस मौसम में शरीर को क्या सूट करता है? हल्का और थोड़ा द्रव भोजन।
*_मूंग की दाल, पतली खिचड़ी, लौकी, तोरी, परवल, कुंदरू जैसी सब्ज़ियाँ। थोड़ा घी। छाछ। सत्तू। बेल का शरबत। नारियल पानी।
*_सत्तू आज भी सबसे काम की चीज़ों में है। गाँवों में लोग यूँ ही लू में सत्तू नहीं पीते थे। उसमें शरीर को टिकाए रखने की क्षमता है।
*_छाछ भी सही तरीके से ली जाए तो बहुत अच्छी चीज़ है। लेकिन आजकल लोग पिज्जा के साथ कोल्ड ड्रिंक छोड़कर “बटरमिल्क” पी लेते हैं और उसे स्वास्थ्यवर्धक मान लेते हैं। शरीर सिर्फ़ नाम से भ्रमित नहीं होता।
*_और एक चीज़, गर्मी में बार बार बहुत ठंडा पानी पीना बहुत समझदारी नहीं है। सामान्य पानी या मटके का पानी शरीर को ज़्यादा संतुलित तरीके से सूट करता है।
*_ग्रीष्म ऋतु में दिन में थोड़ी देर सोने की अनुमति आयुर्वेद देता है। क्योंकि इस समय शरीर जल्दी थकता है और जल की कमी होती रहती है। लेकिन थोड़ी देर का मतलब बीस से तीस मिनट है, पूरा दोपहर नहीं।
*_व्यायाम भी इस मौसम में हल्का रखना चाहिए। हर दिन शरीर को पूरी तरह थका देना स्वास्थ्य नहीं है। हल्का योग, टहलना, शरीर को थोड़ा खींचना काफी है। शीतली और शीतकारी प्राणायाम कई लोगों को सच में राहत देते हैं।           
🫒 *आरोग्य संजीवनी* 🍋‍🟩
बालों के लिए अमृत बाल झड़ना बंद, सफेद बाल काले, नई ग्रोथ। लिवर साफ करती है तो बाल अपने आप ठीक तेल: भ्रिंगराज का तेल रात को लगाओ। रस: 10ml पत्तों का रस सुबह खाली पेट
*_लिवर डिटॉक्स फैटी लिवर, पीलिया, लिवर की सूजन में No.1। लिवर सेल्स को रीजेनरेट करती है 1 चम्मच चूर्ण + शहद, खाना खाने के बाद दिन में 2 बार
*_दिमाग तेज करे मेध्य रसायन है। याददाश्त, फोकस बढ़ाती है। छात्रों को वैद्य देते हैं ब्राह्मी + शंखपुष्पी + भ्रिंगराज चूर्ण = 1/2 चम्मच दूध के साथ
*_नींद की दिक्कत तनाव, अनिद्रा में दिमाग को शांत करती है रात को सोते समय 1 चम्मच चूर्ण गुनगुने दूध से
*_स्किन प्रॉब्लम एक्जिमा, दाद, खाज-खुजली में खून साफ करती है पत्तों का लेप लगाओ + 3gm चूर्ण रोज खाओ
पाचन ठीक करे भूख बढ़ाती है, कब्ज-अपच-गैस में काम की होती है। 5ml रस + अदरक रस + काला नमक, खाने से 30 मिनट पहले_*           
📚 *_गुरु भक्ति योग_* 🔮
     सबसे पहले यह जान लें कि ज्योतिष में सत्ताईस नक्षत्रों में से छह नक्षत्र “गण्डान्त” नक्षत्र कहलाते हैं। ये वे नक्षत्र हैं जो एक राशि के अन्त और दूसरी राशि के आरम्भ की सन्धि पर स्थित हैं। ये छह हैं, अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल और रेवती। इनमें से विशेष रूप से तीन, आश्लेषा, मघा और मूल, “मूल संज्ञक नक्षत्र” कहे जाते हैं। बृहत् पाराशर होरा शास्त्र में गण्डान्त का वर्णन करते हुए कहा गया है, “जलाग्नयोः सन्धिः गण्डान्तम्, तत्र जातस्य विचारणीयम्”।
        *_जल राशि और अग्नि राशि की सन्धि पर जन्म लेने वाले जातक के विषय में विचार करना आवश्यक है। यहाँ “विचारणीयम्” शब्द पर ध्यान दीजिए, शास्त्र ने कहा, विचार करो, यह नहीं कहा, भय करो या बच्चे को दूर करो।
       *_मूल नक्षत्र स्वयं पूर्णतः धनु राशि में ०°००’ से १३°२०’ तक फैला है। इसका स्वामी केतु है और यह निर्ऋति देवता का क्षेत्र है। निर्ऋति का अर्थ विघटन और विनाश की शक्ति है, पर साथ ही यह अधर्म के नाश और गहन आध्यात्मिक खोज का भी प्रतीक है। मूल का शाब्दिक अर्थ “जड़” होता है। जड़ तक जाना, किसी चीज़ को बुनियाद से हिला देना, यह इस नक्षत्र की मूल प्रवृत्ति है।
  अब बात करते हैं उस भय की जो “कुल नाशक” कहलाने से उपजता है। यह विचार मुख्यतः लोक परम्पराओं से आया है, शास्त्र से नहीं। ज्योतिष सार संग्रह में कहा गया है,_*
*_“मूलजातकः पितृनाशकः, आश्लेषाजातकः मातृनाशकः, मघाजातकः कुलनाशकः”।_*
       *_अर्थात् मूल में जन्मा पिता के लिए कष्टकारी, आश्लेषा में जन्मा माता के लिए, मघा में जन्मा कुल के लिए। परन्तु यह एक सामान्य लक्षण वर्णन है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
       *_शास्त्र में इसके तुरंत बाद यह भी कहा गया है कि अन्य ग्रह स्थितियाँ, लग्न, दशा और गोचर इस फल को पूर्णतः बदल सकते हैं। कुछ ज्योतिष ग्रन्थों में मूल नक्षत्र के चारों चरणों के अलग-अलग फल बताए गए हैं, प्रथम चरण पिता के लिए, द्वितीय माता के लिए, तृतीय धन के लिए और चतुर्थ स्वयं जातक के लिए कष्टदायी। पर इसका अर्थ यह कदापि नहीं कि उस बच्चे के जन्म से किसी की मृत्यु निश्चित है या कुल का सर्वनाश हो जाएगा। यह केवल एक ग्रहस्थितिजन्य संकेत है, जिसका प्रभाव सम्पूर्ण कुंडली के योगों और दशा से घटता-बढ़ता है। अकेले मूल नक्षत्र को आधार बनाकर भविष्यवाणी करना, वैसा ही है जैसे किसी एक अंग को देखकर पूरे शरीर की बीमारी बता देना।
        *_शास्त्रीय प्रमाण इस भय को पूरी तरह समाप्त कर देते हैं। स्कन्द पुराण के नक्षत्र माहात्म्य में स्पष्ट है, “मूलनक्षत्रजातस्य, यदि शुभग्रहदृष्टिः, तदा सर्वमंगलप्रदः”। यदि मूल नक्षत्र में जन्मे जातक की कुंडली में शुभ ग्रहों की दृष्टि हो, तो वह सर्वमंगलकारी होता है। और मुहूर्त चिंतामणि में तो और भी स्पष्ट कहा गया, “गण्डान्तजातस्य शान्तिः, यदि कृता विधिवत्, दोषो नश्यति निश्चितम्”। गण्डान्त नक्षत्र में जन्मे जातक की यदि विधिपूर्वक शान्ति की जाए, तो दोष निश्चित रूप से नष्ट हो जाता है। इसका सीधा अर्थ है कि शास्त्र ने स्वयं उपाय बताया, और जो चीज़ स्थायी या अटल होती, उसके लिए उपाय नहीं बताया जाता।
       *_मूल नक्षत्र की असली प्रकृति को समझना बहुत आवश्यक है। केतु मोक्ष, वैराग्य और गहन आध्यात्मिक खोज का कारक है, और निर्ऋति विनाश और परिवर्तन की शक्ति। इसलिए यह नक्षत्र विनाशक नहीं, परिवर्तनकारी है। मूल में जन्मे जातक जो भी करते हैं, उसकी जड़ तक जाते हैं। ये सतही नहीं होते, और जहाँ भी जाते हैं, वहाँ की पुरानी व्यवस्था को हिला देते हैं। यह विनाश नहीं, यह वह रूपान्तरण है जो किसी भी परिवार या समाज को आगे ले जाती है। इतिहास में मूल नक्षत्र के अनेक महान व्यक्तित्व हुए हैं, चाहे ऋषि हों, योद्धा हों या वैज्ञानिक। असाधारण ऊर्जा को असाधारण व्यक्तित्व ही धारण करते हैं। रावण का जन्म भी मूल नक्षत्र में हुआ था, और वह अपने काल का अप्रतिम विद्वान था, पर अहंकार के कारण उसका पतन हुआ। अर्थात् सब कुछ कुंडली के समग्र ग्रह-गुण और व्यक्ति के अपने कर्मों पर निर्भर करता है।
       *_शान्ति की विधि शास्त्रसम्मत है, परन्तु इसका उद्देश्य भय नहीं, सन्तुलन है। बृहत् संहिता में वराहमिहिर ने कहा है, “गण्डान्तजातस्य जन्मतः त्रिंशद्दिनान्तर्गते शान्तिः कर्तव्या”।
       *_जन्म के तीस दिनों के भीतर शान्ति करवाना उचित है। यह शान्ति मूलतः एक ऊर्जा-सन्तुलन का अनुष्ठान है जिसमें केतु की शान्ति, नक्षत्र देवता निर्ऋति की पूजा, केतु मंत्रों का जाप और दान किया जाता है। पीपल वृक्ष की जड़ में दूध-जल चढ़ाना, गरीबों को भोजन कराना और पितरों का तर्पण भी इस विधि का भाग है। पर यह शान्ति इसलिए नहीं करवाई जाती कि बच्चा अशुभ है, ठीक वैसे ही जैसे नए घर में गृह प्रवेश पूजा शुभारम्भ की भावना से करवाई जाती है।
        *_प्रबंधन और विज्ञान का अध्ययन, पर ज्योतिष मेरे रक्त में है। और चौदह वर्षों के अपने अभ्यास में मैंने मूल नक्षत्र में जन्मे अनेक जातकों की कुंडलियाँ देखी हैं। कुछ में पिता को कष्ट हुआ, पर उसके पीछे कारण उनकी अपनी कुंडली की दशा थी, बच्चे का जन्म नक्षत्र नहीं। कुछ में परिवार में बड़ा परिवर्तन आया जो अन्ततः उन्नति का कारण बना। और कुछ में कुछ नहीं हुआ, बिल्कुल सामान्य जीवन रहा। केपी पद्धति में देखें तो, यदि मूल नक्षत्र के जातक का सब लॉर्ड शुभ भावों को सिग्निफ़ाय करे, तो वह जातक परिवार के लिए वरदान सिद्ध होता है।
       *_दादाजी हमेशा कहते थे, “ज्योतिष भविष्य का भय नहीं, कर्म का मार्गदर्शन है।” और शास्त्र का सार यही है, “पितृदोषः मातृदोषः, स्वकर्मणि आश्रितः, न बालके”। पिता या माता को जो कष्ट होता है, वह उनके अपने कर्मों पर आश्रित है, बच्चे के जन्म नक्षत्र पर नहीं। यदि आपके घर में मूल नक्षत्र में कोई बच्चा पैदा हुआ है, तो शान्ति अवश्य करवाएं, परन्तु भय के साथ नहीं, शुभ भावना के साथ।
       *_उस बच्चे को “अशुभ” का लेबल कभी मत लगाइए, क्योंकि बच्चे वही बन जाते हैं जो हम उन्हें मानते हैं। जिस बच्चे को जन्म से ही परिवार अपशकुन मानता रहे, वह मानसिक रूप से टूट सकता है। यह विज्ञान भी कहता है और सामान्य समझ भी। मूल नक्षत्र का बच्चा आपके वंश में कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी और एक नई जड़ लेकर आया है, बशर्ते आप उसे प्रेम, शिक्षा और संस्कारों से सींचें।
       *_इसलिए अन्त में बस यही कहूँगी: मूल नक्षत्र में जन्मा बच्चा कुल नाशक नहीं होता। वह एक तीव्र, गहरी और परिवर्तनकारी ऊर्जा लेकर आता है। यह नक्षत्र जड़ से उखाड़ता तो है, लेकिन कुल का नाश नहीं, बुराइयों का, मिथ्याओं का और ढोंग का नाश करता है। बस दृष्टि और समझ की आवश्यकता है। डर बेचना आसान है, सच बताना कठिन, और आज मैंने सच बताना चुना है।
▬▬▬▬▬ஜ۩۞۩ஜ▬▬▬▬▬
⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

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