
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 28 फरवरी 2026
28 फरवरी 2026 दिन शनिवार को फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष कि द्वादशी तिथि है। आज से पहले अर्थात 27 फरवरी को अमल अथवा रंगभरी एकादशी का पावन व्रत था। तो आज द्वादशी को एकादशी व्रत का पारण समय भी जान लेते हैं। जैसा कि आप जानते हैं 27 फरवरी की रात्रि में 00.35 ए एम पर एकादशी तिथि का शुभारंभ हुआ था। और 27 फरवरी को ही रात्रि 22.35 पी एम तक एकादशी था। इसीलिए आज 28 फरवरी दिन शनिवार को प्रातः काल एकादशी व्रत का पारण 07.01 से 09.21 ए एम के बीच कर लेना चाहिए। आज शनिवार को गोविंद द्वादशी का व्रत भी है। आज की द्वादशी को नरसिंह द्वादशी का भी व्रत है। आज यायीजययोग एवं त्रिपुष्कर योग भी है। आप सभी स्नातनियों को “गोविंद द्वादशी एवं नरसिंह द्वादशी व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ *दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए। *शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
*शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है । शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए। शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है । 🔮 *शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – फाल्गुन मास
🌓 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष द्वादशी तिथि 08:43 PM तक उपरांत त्रयोदशी
✏️ तिथि स्वामी – द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र- नक्षत्र पुनर्वसु 09:34 AM तक उपरांत पुष्य
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुनर्वसु नक्षत्र का ग्रह देवता या शासक ग्रह बृहस्पति है, इस नक्षत्र के देवता अदिति हैं।
⚜️ योग – सौभाग्य योग 05:02 PM तक, उसके बाद शोभन योग
⚡ प्रथम करण : बव 09:36 AM तक
✨ द्वितीय करण : बालव 08:43 PM तक, बाद कौलव
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए
🌞 सूर्योदयः – प्रातः06:31:00
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:59:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : शाम को 29:08 मिनट से शाम को 29:58 बजे तक
🌆 प्रातः सन्ध्या : शाम को 29:33 बजे से सुबह 06:47 ए एम तक
🌟 अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 12:11 मिनट से दोपहर 12:57 तक
✡️ विजय मुहूर्त: दोपहर 02:29 बजे से दोपहर 03:15 बजे तक
🐃 गोधूलि मुहूर्त : शाम को 18:18 पी एम से 18:43 पी एम तक
🌃 सायाह्न सन्ध्या : शाम को 18:20 पी एम से 19:35 पी एम तक
💧 अमृत काल : सुबह को 07:18 सुबह से 08:49 ए एम तक
🗣️ निशिता मुहूर्त : रात्रि 24:08 से 24:58 रात्रि 26:26 से रात्रि 27:58 तक
🌸 त्रिपुष्कर योग : सुबह 06:47 से 09:35 तक
☄️ वरीयान योग : आज दोपहर 2 बजकर 26 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शनि मंदिर में सरसों का तेल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – आमलकी एकादशी पारण/ त्रिपुष्कर योग/ याज्ञवल्क्य जयंती/ गोविन्द द्वादशी/ जयंती महा द्वादशी व्रत/ मेला श्याम बाबा खाटू समाप्त (राज.)/ डाँ.राजेन्द्र प्रसाद पुण्य दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, राष्ट्रीय टूथ फेयरी दिवस, राष्ट्रीय सार्वजनिक नींद दिवस, राष्ट्रीय चॉकलेट सूफ़ले दिवस, राष्ट्रीय विज्ञान दिवस, दुर्लभ रोग दिवस, भारतीय वैज्ञानिक चंद्रशेखर वेंकटरमन जन्म दिवस, कमला नेहरू स्मृति दिवस, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह जन्म दिवस, भूतपूर्व उपराष्ट्रपति कृष्णकांत जयन्ती
✍🏼 तिथि विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह मसूर से बना सभी व्यंजन इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण भगवान को बताया गया है। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ अवश्य करने चाहिए। नाम के पाठ एवं जप आदि करने से व्यक्ति के जीवन में धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति सहज ही होने लगती है।
🗺️ Vastu tips🗺️
अब बात करते हैं खिड़कियों और बालकनी की। खिड़कियों का वास्तु में विशेष महत्व बताया गया है। आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, फ्लैट में मुख्य द्वार से भी ज्यादा ध्यान खिड़कियों और बालकनी की दिशा पर देना चाहिए, क्योंकि इन्हीं के माध्यम से ऊर्जा का प्रवेश और प्रवाह होता है।
*जिस फ्लैट की अधिकतर खिड़कियां पूर्व, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा में खुलती हों, वह फ्लैट बेहद शुभ माना जाता है, चाहे उस घर का मुख्य दरवाजा पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में न भी खुलता हो। यही नियम बालकनी के लिए भी लागू होता है। *उत्तर दिशा, पूर्व दिशा और उत्तर-पूर्व दिशा में बनी बालकनी को अत्यंत शुभ माना गया है। वहीं, दक्षिण-पूर्व और दक्षिण दिशा में बालकनी होना भी स्वीकार्य है, लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि उनके विपरीत दिशा में उतनी ही बड़ी या उससे बड़ी बालकनी मौजूद हो, ताकि ऊर्जा संतुलित बनी रहे।
♻️ जीवनपयोगी कुंजियां ⚜️
पेट की गर्मी दूर करने का घरेलू उपचार क्या है?
“पेट की गर्मी” आमतौर पर इन लक्षणों से जुड़ी होती है:
जलन, एसिडिटी, खट्टी डकार, मुँह में छाले, कब्ज, या पेट में भारीपन। नीचे सुरक्षित और असरदार घरेलू उपाय साफ-साफ बताए गए हैं:
ठंडा दूध* 1 गिलास ठंडा (उबला-ठंडा किया हुआ) दूध*
सुबह खाली पेट या जलन होने पर
👉 दूध एसिड को न्यूट्रल करने में मदद करता है।
सौंफ का पानी 1 चम्मच सौंफ रात में पानी में भिगो दें सुबह छानकर पी लें
👉 गैस, जलन और बदहजमी में फायदेमंद।
*नारियल पानी *दिन में 1 बार
*👉 शरीर को ठंडक देता है और एसिडिटी कम करता है। ✅ *ठंडी छाछ (मठा)* 1 गिलास छाछ + थोड़ा भुना जीरा* 👉 पाचन सुधरता है, जलन कम होती है।
एलोवेरा जूस (सीमित मात्रा में) 20–30 ml सुबह
*👉 पेट की सूजन और जलन में आराम।
💉 *आरोग्य संजीवनी* 🌡️
विभिन्न रोगों में लहसुन का उपयोग
*क्षय रोग 10, 12 तुर्रियों को पाव भर दूध में अच्छी तरह उबाल लें। तुर्रियों को खाकर दूध पीने से तपेदिक व क्षय रोग में आराम मिलता है।
*फेफड़े के रोग यदि फेफड़े के पर्दे पर अधिक तरल जमा होने से सांस लेने में कठिनाई हो और ज्वर हो तो लहसुन पीसकर आटे में इसकी पुलटिस बनाकर दर्द वाले स्थान पर बांधने से आराम मिलता है। *दमा रोग लहसुन का रस गुन-गुने पानी में मिलाकर पीने से सांस का दर्द दूर होता है। लहसुन की दो तुर्रियों को देशी घी में भूनकर दिन में दो बार खाने से श्वांस के कष्ट दूर होते हैं। शहद में लहसुन का रस मिलाकर चाटने से भी रोगी को आराम मिलता है। दमे के दौरे में भी लहसुन का रस व शहद मिलाकर चाटने से दौरे का कष्ट दूर होता है।
*लहसुन दूध में उबालकर रात को पीने से दमा में लाभ होता है। *लहसुन को सिरके में उबालकर ठंडा कर शहद मिलाकर पीने से दमे के रोगी को लाभ होता है।
*लहसुन छाती के सभी रोगों में लाभदायक है, यह सांस व दमे पर नकेल डालता है। *पाचन तंत्र पेट के रोग के लिए लहसुन बहुत लाभदायक है। यह गैस और अम्लता की शिकायत दूर करता है। लहसुन के प्रयोग से आंतों में पाचक रस उत्पन्न होते हैं तथा पेट के रोगों को समाप्त करने में सहायता मिलती है। इसका प्रभाव शरीर में विद्यमान विष को दूर करता है। आंतों और पेट में किसी भी प्रकार से संक्रमण से उत्पन्न सूजन समाप्त हो जाती है। लहसुन में पाया जाने वाला एन्टीसेप्टिक तत्व संक्रामक रोगों से रोकथाम करता है।
📖 *गुरु भक्ति योग* 🕯️
गुरु का जीवन पर प्रभाव
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गुरु को नैसर्गिक शुभ ग्रह कहा जाता है जिसकी प्रकृति कफ प्रधान है । गुरु धनु और मीन राशि का स्वामी है और ज्योतिष अनुसार जन्म कुण्डली के नवम भाव का कारक ग्रह है, जबकि ज्योतिष अनुसार गुरु का अध्ययन पुत्र कारक ग्रह के रूप में किया जाता है । कर्क राशि में गुरु उच्च का होकर बलि और मकर राशि में नीच होने से कमज़ोर होकर शुभ फल देने में असमर्थ होता है । जबकि वृषभ, मिथुन, कन्या, और तुला शत्रु राशियां हैं इस नाते इन राशियों में भी गुरु कमज़ोर होने की वजह से शुभ फल देने में असमर्थ होता है। शास्त्र अनुसार गुरु ग्रह बड़े भाई, गुरु, सही समझ, उच्च शिक्षा, सलाहकार, मोटापा, धार्मिक ग्रंथ, ईश्वर के प्रति आस्था, पुत्र सुख, धर्म और दान पुन्य का कारक है ।
*मजबूत और शुभ गुरु के लक्ष्ण : कुण्डली में यदि गुरु मजबूत या शुभ फल दे रहा हो तो जातक को परिवार यानि जीवनसाथी और संतान के अच्छे सुख, आर्थिक सुख, ईश्वर में विश्वास, दान पुन्य में रूचि, और समाज में खूब सम्मान मिलता है । *कमजोर और अशुभ गुरु के लक्ष्ण : कुण्डली में यदि गुरु कमज़ोर या अशुभ फल दे रहा हो तो जातक की शिक्षा प्राप्ति में बाधा, पढ़ा हुआ भूल जाना, तरक्की प्राप्ति में बाधा, शुभ कार्यो में देरी, विवाह और संतान संबंधी बाधा, शरीर दुबला पतला, कफ जनित रोग से पीड़ित होता है ।
*स्वास्थ्य : यदि जन्म कुंडली में गुरु अशुभ फल दे रहा हो तो जिगर, गुर्दे, पेट संबंधी, थाईराइड रोग, साँस और कफ जनित रोग और महिलाओ में संतान प्राप्ति में बाधा आती है । *करियर : यदि जन्म कुंडली में गुरु शुभ होकर कर्म या लाभ भाव से योग करे तो उच्च शिक्षा प्राप्त करके अध्यापक, किसी संस्थान के संचालक, सलाहकार या प्रमुख कार्यकर्ता, धर्म और अध्यात्म से जुड़े कार्य जैसे ज्योतिष, कर्म कांड, मेडिकल विषय, वित और प्रबंधन कार्य, लेखन कार्य, खाद्य पदार्थ, रस और फलों संबंधी कारोबार लाभ देते हैं ।
*_शुभ फल : यदि जन्म कुंडली में गुरु 1, 2, 4, 5, 9 या 12वे भाव में हो , अन्य भाव में यदि गुरु कर्क, धनु या मीन राशि का हो तो भी शुभ फल होते हैं ।
विशेष : यदि जन्म कुंडली में गुरु शुभ हो तो जातक को संतान सुख जरुर मिलता है और बुढ़ापा सुख से बीतता है। इस के इलावा 36 और 48वे वर्ष में तरक्की का योग बनता है ।
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⚜️ द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।।


