धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 26 सितम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 26 सितम्बर 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌧️ मास – आश्विन मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शुक्रवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 09:33 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र विशाखा 10:09 PM तक उपरांत अनुराधा
🪐 नक्षत्र स्वामी – विशाखा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बृहस्पति (गुरु) है। विशाखा नक्षत्र के देवता इंद्र और अग्नि दोनों हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से इंद्राग्नि के रूप में जाना जाता है।
⚜️ योग – विष्कुम्भ योग 10:50 PM तक, उसके बाद प्रीति योग
प्रथम करण : विष्टि – 09:32 ए एम तक
द्वितीय करण : बव – 10:48 पी एम तक बालव
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:11:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:13:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:36 ए एम से 05:24 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:00 ए एम से 06:11 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:48 ए एम से 12:36 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:12 पी एम से 03:00 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:13 पी एम से 06:37 पी एम
🌌 सायाह्न सन्ध्या : 06:13 पी एम से 07:25 पी एम
💧 अमृत काल : 12:15 पी एम से 02:03 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:48 पी एम से 12:36 ए एम, सितम्बर 27
सर्वार्थ सिद्धि योग : 10:09 पी एम से 06:12 ए एम, सितम्बर 27
❄️ रवि योग : 10:09 पी एम से 06:12 ए एम, सितम्बर 27
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मन्दिर में खीर चढ़ाएं।
🪵 *वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ ललिता पंचमी/ उपांग ललिता व्रत/ भारत के पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह (पंजाबी: ਮਨਮੋਹਨ ਸਿੰਘ जन्म दिवस, विश्व गर्भनिरोधक दिवस, अंतर्राष्ट्रीय दिवस, विश्व पर्यावरण स्वास्थ्य दिवस, राष्ट्रीय स्थिति जागरूकता दिवस, राष्ट्रीय डंपलिंग दिवस, फिल्मी अभिनेता चंकी पांडे जन्म दिवस, ईश्वर चंद्र विद्यासागर जन्म दिवस, समाज सुधारक; गुलाम कबीर नायरंग जयन्ती, भारतीय अभिनेता देव आनंद जन्म दिवस, विराम चिह्न दिवस, राष्ट्रीय पैनकेक दिवस, सी.एस.आई.आर. स्थापना दिवस, विश्व मूक बधिर दिवस,परमवीर चक्र से सम्मानित सूबेदार जोगिन्दर सिंह जयन्ती ✍🏼 तिथि विशेष – पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। पञ्चमी तिथि को खट्टी वस्तुओं का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य है। पञ्चमी तिथि धनप्रद अर्थात धन देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि अत्यंत शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस पञ्चमी तिथि के स्वामी नागराज वासुकी हैं। यह पञ्चमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह पञ्चमी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ और कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायीनी मानी जाती है। 🗼 *Vastu tips* 🗽 पश्चिम दिशा में गलती से भी आपको किचन नहीं बनवाना चाहिए। इस दिशा में किचन बनाने से घर में आर्थिक परेशानियां आती हैं। साथ ही घर के लोगों की सेहत भी बार-बार खराब हो सकती है। पश्चिम दिशा में किचन होने से अन्न की कमी घर में हो सकती है। पश्चिम दिशा में घर का मंदिर बनाने से भी आपको बचना चाहिए। इसकी वजह से भी आपके जीवन में दिक्कतें आती हैं। खासकर घर के बड़े सदस्य को करियर क्षेत्र में उतार-चढ़ाव झेलने पड़ते हैं और परिवार के लोगों की आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं रहती। शनि ग्रह इस दिन बेडरूम बनाने से भी बचना चाहिए। यहां बनाया गया बेडरूम उसक कमरे में रहने वाले लोगों के बीच मनमुटाव पैदा कर सकता है। पश्चिम दिशा में अगर पति-पत्नी का कमरा हो तो उनके बीच अलगाव की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए गलती से भी यहां सोने का कमरा न बनाएं। इस दिशा में आपको टूटी हुआ सामान रखने से भी बचना चाहिए। टूटा हुआ सामान यहां रखने से शनि क्रोधित होते हैं। इसके चलते आपके जीवन में हमेशा परेशानियां आ सकती हैं, बने बनाए काम भी बिगड़ सकते हैं। ❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
यदि तुम्हें खाँसी है और ऊपर से खट्टा खाने की लत है, तो जल्दी ही तुम्हें कुत्ता खाँसी हो जाएगी, तब तुम रात भर कुत्ते की तरह खाँसते रहोगे। स्वयं भी जागोगे, घर वालों को भी जगाए रखोगे। तो जब सभी जागते हुए ही पड़े रहेंगे, सोएँगे ही नहीं, तो ऐसे घर में चोर आएगा ही कैसे?
और यों लगातार खाँसते-खाँसते जब तुम्हारा शरीर और अधिक निर्बल हो जाएगा, पाँव काँपने लगेंगे, तब तुमसे बिना लाठी के चला नहीं जाएगा। और तुम स्वयं विचार करो कि जिसके हाथ में हर समय लाठी रहेगी उसे कुत्ता कैसे काटेगा?
फिर जब खाँसी से तुम्हारे फेफड़े बिल्कुल ही खत्म हो जाएँगे और शरीर सूख कर काँटा हो जाएगा। तब तुम इस जवानी में ही मर जाओगे, तब तुम्हारे लिए बुढ़ापा आएगा ही कैसे? तो खाँसी में तो खट्टा खाना बहुत लाभदायक है।
यह सब सुन कर वह युवक रोने लगा। वैद्य जी ने बड़े ही प्रेम से उसके सिर पर हाथ फिराया और कहा- मेरे प्यारे बेटे! मेरी बात मानो तो जिद छोड़ दो। कुछ ही दिनों की बात है। जब तक खाँसी पूरी तरह से ठीक न हो जाए, तब तक पूर्ण परहेज रखना ही चाहिए। फिर तो जैसा सामान्यतया सभी खाते हैं, तुम भी खा लेना। बस मात्रा का ध्यान रखना। तब तुम्हें कोई परेशानी नहीं होगी।
मैं कहता हूं कि जैसे खाँसी ठीक होने में खट्टा बाधा है, भवरोग ठीक होने में सांसारिक इच्छाएँ बाधा हैं।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
आज मैं आपको एक ऐसा नुस्खा बताने जारहा हुँ जिसका उपयोग अगर कोई गठिया पीड़ित लगातार 1 महीने करेगा तो 1 महीने बाद उसका गठिया जड़ से समाप्त हो जाएगा।
इस नुस्खे के लिए हम एक वस्तु की जरूरत पड़ेगी और वो है पारिजात की पत्तियां अगर आप पारिजात के पौधे के बारे में नही जानते तो नीचे दिए चित्र को देख कर आप उसकी पहचान कर सकते है । हमे इसके 10 से 12 पत्ती लेनी है और उसको आपको पीस लेना है
पीसने के बाद एक बर्तन में एक गिलास गर्म पानी डालने है और उसी में पिसी हुई पारिजात की पत्तियों को डाल देना है फिर पानी को तब तक उबालना है जब तक पानी आधा न बचे जब पानी आधा बच जाए तो पानी को उतार लें । इसके बाद रोज़ सुबह खाली पेट इस पानी को पीना है आपको लाभ तो 7 से 8 दिन में ही दिख जाएगा लेकिन अगर इस रोग को जड़ से खत्म करना है तो इस नुस्खे को लगातार एक महीने करना है। आपको लाभ जरूर होगा।
📖 गुरु भक्ति योग
🕯️
बच्चा एक न एक दिन मर जाएगा।ʼ और बच्चे का जन्म उसी रात हुआ था जिस रात बुद्ध ने महल छोड़ा। उसके जन्म के कुछ घंटे ही हुए थे। बुद्ध उसे अंतिम बार देखने के लिए अपनी पत्नी के कमरे में गए। पत्नी की पीठ दरवाजे की तरफ थी और वह बच्चे को अपनी बांहों में लेकर सोई थी। बुद्ध ने अलविदा कहना चाहा, लेकिन वे झिझके। उन्होंने कहा : ‘ क्या प्रयोजन है? ‘एक क्षण उनके मन में यह विचार कौंधा कि बच्चे के जन्म के कुछ घंटे ही हूए हैं, मैं उसे अंतिम बार देख तो लूं। लेकिन उन्होंने फिर कहा : ‘क्या प्रयोजन है ? सब तो बदल रहा है। आज बच्चा पैदा हुआ है,कल वह मरेगा। एक दिन पहले वह नहीं था,अभी वह है,और एक दिन फिर नहीं हो जाएगा। तो क्या प्रयोजन है ? सब कुछ तो बदल रहा है।ʼवे मुड़े और विदा हो गए। जब किसी ने पूछा कि आपने क्यों सब कुछ छोड़ दिया ?* *बुद्ध ने कहा: ‘मैं उसकी खोज में हूं जो कभी नहीं बदलता, जो शाश्वत है। यदि मैं परिवर्तनशील के साथ अटका रहूंगा तो निराशा ही हाथ आएगी। क्षणभंगुर से आसक्त होना मूढ़ता है; वह कभी ठहरने वाला नहीं है।
मैं मूढ़ बनूंगा और हताशा हाथ लगेगी। मैं तो उसकी खोज कर रहा हूं जो कभी नहीं बदलता,जो नित्य है। अगर कुछ शाश्वत है तो ही जीवन मैं अर्थ है,जीवन में मूल्य है। अन्यथा सब व्यर्थ है।ʼ बुद्ध की समस्त देशना का आधार परिवर्तन था।
यह सूत्र सुंदर है। यह सूत्र कहता है : ‘परिवर्तन के द्वारा परिवर्तन को विसर्जित करो। ‘बुद्ध कभी दूसरा हिस्सा नहीं कहेंगे; यह दूसरा हिस्सा बुनियादी रूप से तंत्र से आया है…। बुद्ध इतना ही कहेंगे कि सब कुछ परिवर्तनशील है, इसे अनुभव करो और तब तुम्हें आसक्ति नहीं होगी।और जब आसक्ति नहीं रहेगी तो धीरे-धीरे अनित्य को छोड़ते-छोड़ते तुम अपने केंन्द्र पर पहुंच जाओगे, उस केंद्र पर आ जाओगे जो नित्य है, शाश्वत है। परिवर्तन को छोड़ते जाओ और तुम अपरिवर्तिन पर, केंद्र पर,चक्र के केंद्र पर पहुंच जाओगे।
इसलिए बुद्ध ने चक्र को अपने धर्म का प्रतीक बनाया, क्योंकि चक्र चलता रहता है,लेकिन धुरी, जिसके सहारे चक्र चलता है, ठहरी रहती है, स्थाई है। तो संसार चक्र की भांति चलता रहता है,तुम्हारा व्यक्तित्व चक्र की भांति बदलता रहता है; और तुम्हारा अंतरस्थ तत्व अचल धुरी बना रहता है जिसके सहारे चक्र गति करता है। धुरी अचल रहती है।
बुद्ध कहेंगे कि जीवन परिवर्तन है; वे सूत्र के पहले हिस्से से सहमत होंगे। लेकिन दूसरा हिस्सा तंत्र से आया है
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⚜️ पञ्चमी तिथि में शिव जी का पूजन सभी कामनाओं की पूर्ति करता है। आज पञ्चमी तिथि में नाग देवता का पूजन करके उन्हें बहती नदी में प्रवाहित करने से भय और कष्ट आदि की सहज ही निवृत्ति हो जाती है। ऐसा करने से यहाँ तक की कालसर्प दोष तक की शान्ति हो जाती है। अगर भूतकाल में किसी की मृत्यु सर्पदंश से हुई हो तो उसके नाम से सर्प पूजन से उसकी भी मुक्ति तक हो जाती है।।

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