मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश मांझी जनजाति संयुक्त संघर्ष समिति पन्ना, पेसा एक्ट का किया विरोध

जल अधिकार को लेकर माझी जनजाति संयुक्त समिति ने सौंपा ज्ञापन
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
पन्ना । मध्य प्रदेश मांझी जनजातीय संयुक्त संघर्ष समिति के जिला अध्यक्ष संजय रैकवार के नेतृत्व में 2 दिसंबर को पन्ना कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर पेसा एक्ट के तहत मांझी जनजातीय वर्ग के लोगों के पारंपरिक जल अधिकार को छीनने का विरोध करते हुए इस कानून को वापस लेने की मांग उठाई गई है, जिला अध्यक्ष ने बताया कि नदियों तालाबों और बांधों में मछली पालन सिंघाड़ा उत्पादन, नौका संचालन इत्यादि मांझी समाज का आदिकाल और रामायण काल से लेकर अब तक पारंपरिक व्यवसाय रहा है जिसे सरकार द्वारा पेशा एक्ट के तहत छीनने का प्रयास किया जा रहा है, जो कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, संजय रैकवार ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा है कि हमारा समाज एकजुट होकर इस कानून के विरोध में संघर्ष करेगा उन्होंने कहा कि हमारे ही वोटों से सरकार बना कर हमारे ही अधिकारों को छीनने वाली सरकार को मध्य प्रदेश मांझी जनजाति संयुक्त संघर्ष मोर्चा चेतावनी देता है कि शीघ्र ही यह कानून वापस नहीं लिया गया तो उग्र आंदोलन होगा।
मध्य प्रदेश माझी जनजाति संयुक्त संघर्ष समिति वर्षों से माझी आरक्षण को लेकर मध्य प्रदेश सरकार से मांग करती आ रही है पर सरकार द्वारा माझी के अधिकारों की बात को नकारा जा रहा है एवं मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पूर्व में किए गए आदेशों को भी दरकिनार किया जा रहा है एवं प्रदेश में तकरीबन लाखों की संख्या में माझी समझा समुदाय निवासरत है जो अपने अधिकारों के लिए निरंतर मांग रहा है मध्य प्रदेश सरकार द्वारा लगातार माझी अधिकारों का हनन किया जा रहा है इसी तारतम्य में 15 नवंबर 2022 को मध्य प्रदेश सरकार द्वारा पैसा एक्ट लागू करके आदि काल से माझी समुदाय जल से संबंधित व्यवसाय पर जीवन यापन करता रहा रहा है एवं रामायण काल में भी इसका विस्तृत वर्णन मिलता है फिर भी मध्य प्रदेश सरकार द्वारा माजी समुदाय का परंपरागत जल व्यवसाय को खत्म किया जा रहा है एवं एक आदेश के तहत मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जल का अधिकार आज पूर्णता आदिवासियों के हाथ में किया गया है जो मध्य प्रदेश माझी समाज इसका विरोध करता है एवं मध्य प्रदेश सरकार से मांग करता है कि तुरंत ही इस आदेश को वापस लिया जाए नहीं तो मध्यप्रदेश माझी जनजातीय संयुक्त संघर्ष समिति सड़कों पर उतर कर जन आंदोलन करेगी एवं अपने अधिकारों को लेने तक संघर्षरत रहेगी।
मध्य प्रदेश माझी समुदाय दिनांक 1 जनवरी 2018 के आदेश में संशोधन कर संशोधन आदेश जारी करने मध्य प्रदेश की पिछड़ा वर्ग की सूची ग्राम 12 से विलोपित करने का आदेश जारी करें और वंशानुगत मछुआरों को ही तालाब आवंटित किए जाएं इन मांगों को लेकर समुदायिक धरना पर बरसों से मांग करता आ रहा है मध्य प्रदेश सरकार ने माझी समुदाय के संदर्भ में आरक्षण विशेषज्ञ समिति गठित की थी उस समिति ने दिनांक 6 अगस्त 2018 को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत की थी उस समिति ने विंध्य प्रदेश सरकार के पत्र सन 1950 एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर ढीमर केवट निषाद मल्लाह जातियों को अनुसूचित जनजाति माजी के अंतर्गत स्वीकार किया था इस रिपोर्ट को मध्य प्रदेश सरकार ने स्वीकार भी कर लिया था इसके बाद भी मध्य प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश पिछड़ा वर्ग की सूची क्रमांक 12 से विलोपित करने का आदेश नहीं किया है मछुआ नीति 2008 के अनुसार तालाब आवंटन एवं पूर्ण संगत मछुआरों को प्राथमिकता देने की नीति बनाई गई थी किंतु वर्तमान में मछुआरों को तालाब आवंटित कर पुन आवंटन किया जा रहा है।

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