मध्य प्रदेशमनोरंजन

महान गायक मो.रफी की जयंती पर रिदम संगीत संस्था ने गीतों में उनको याद किया

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । संगीत, कला को समर्पित रिदम संस्था ने प्रसिद्ध गायक स्व. मो. रफी का जन्मदिन उनके यादगार गीतों को गाकर मनाया।
कार्यक्रम का शुभारंभ माँ सरस्वती की आराधना से किया गया। ग्रुप के संयोजक रमेश भार्गव ने रफी साहब के जीवन वृत को बताते हुए कहा कि उनकी आवाज जहाँ कर्णप्रिय थी वहीं उनकी संगीत साधना भी गीतों में स्पष्ट झलकती थी। सुख के सब साथी, दुख में न कोय गीत गाकर उन्होंने रफी साहब की भजन प्रियता को व्यक्त किया। प्रदीप सोनी ‘शून्य’ ने बताया कि रफी साहब का व्यक्तित्व बहुत सहज और सरल था। उन्होंने हर तरह के गीत गाये। आज भी उनके गीतों की मिठास और कशिश आदमी को गीत गुनगुनाने पर मजबूर कर देती है। कार्यक्रम में उनके सदाबहार गीतों में से रमेश भार्गव ने जब ” चाहे कोई मुझे जंगली कहे ” गाया तो श्रोता झूम उठे ।रामेंद्र सिंह ठाकुर ने “एक था गुल और एक थी बुलबुल ” गाया। प्रदीप सोनी शून्य ने ” ख़ुदा भी आसमाँ से जब जमीं पर देखता होगा ” गाकर वाह वाही लूटी। मनीष सोनी, पवन सोनी, धर्मेश साहू, गौरव शर्मा, अंशुल शर्मा, अभिलाष श्रीवास्तव ने भी रफी साहब को दिल से याद करते हुए उनके गीतों को गुनगुनाया। कायर्क्रम के अतिथि ऋषिराज शर्मा, अजय नेमा, रामगोपाल नेमा ने भी गीतों का भरपूर आनंद उठाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे संतोष कंडया ने भी जब गाना गाया तो श्रोता विस्मित हो गए।
कार्यक्रम में शिवशंकर भार्गव, संतोष अवस्थी, देवनारायण शर्मा, राजेश साहू , दसरथ सिंह ठाकुर, मनोज पाठक, सचिन चौरसिया, हरि नामदेव सहित कई संगीत प्रेमी उपस्थित थे।

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