ज्योतिषधार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 26 जनवरी 2026

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🇮🇳 आज का पंचाग 🇮🇳
सोमवार 26 जनवरी 2026
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्‌। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
🚩 दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
*सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है। *सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
*जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है। *सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352 प्रारम्भ
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
🌧️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
⛈️ मास – माघ मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – सोमवार माघ माह के शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 09:18 PM तक उपरांत नवमी
📝 तिथि स्वामी – अष्टमी के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र अश्विनी 12:32 PM तक उपरांत भरणी
🪐 नक्षत्र स्वामी – अश्विनी नक्षत्र का स्वामी केतु होता है। देवताओं के चिकित्सक अश्विनी कुमारों से जोड़ा जाता है।
⚜️ योग – साध्य योग 09:11 AM तक, उसके बाद शुभ योग 06:19 AM तक, उसके बाद शुक्ल योग
प्रथम करण : विष्टि 10:17 AM तक, बाद बव 09:18 PM तक
द्वितीय करण : बालव पूर्ण रात्रि तक
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः – प्रातः 06:55:30
🌅 सूर्यास्तः – सायं 05:36:00
🚓 यात्रा शकुन-मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ सौं सौमाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का दुग्धाभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ *पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ सर्वार्थ सिद्धि योग/ भीष्म अष्टमी/ मासिक दुर्गाष्टमी/ भद्रा/ गण्ड मूल/ आडल योग/ गणतंत्र दिवस/ भारतीय संविधान लागू दिवस, अशोक स्तंभ को भारत का ‘राष्ट्रीय का प्रतीक दिवस, भारत में हिंदी राजभाषा घोषणा दिवस, अमर जवान ज्योति स्थापित दिवस, पूर्व पेशेवर बास्केटबॉल खिलाड़ी कोबे ब्रायंट स्मृति दिवस, मुगल सम्राट हुमायूँ पुण्य तिथि, भारतीय पार्श्वगायक प्रदीप सोमासुंदरन जन्म दिवस, जैन धर्म आचार्य आचार्य चंदना प्राकट्योत्सव, भारतीय क्रिकेटर शिवलाल यादव जन्म दिवस, भारतीय क्रिकेटर अशोक मल्होत्रा जन्म दिवस, अंतर्राष्ट्रीय सीमा शुल्क दिवस ✍🏼 तिथि विशेष – अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। 🗺️ *_Vastu tips* 🗽
ज्योतिष शास्त्र में नमक को सिर्फ मसाला नहीं, बल्कि “चंद्रमा” और “शुक्र” का प्रतीक माना जाता है।
*अगर आपके घर में पैसा नहीं टिकता या लगातार क्लेश (झगड़े) होते हैं, तो यह छोटा सा उपाय करें: *कांच की एक कटोरी लें (स्टील या प्लास्टिक नहीं)।
*उसमें समुद्री नमक (Sea Salt) या खड़ा नमक भर दें। *इसे अपने घर के टॉयलेट (Bathroom) में या घर के किसी कोने में छुपाकर रख दें।
*चमत्कार:- यह नमक घर की सारी नेगेटिव एनर्जी (नकारात्मक ऊर्जा) को सोख लेगा 15 दिन बाद पुराने नमक को सिंक में बहा दें और नया नमक भर दें। *आप देखेंगे कि घर का माहौल शांत हो जाएगा और धन के रास्ते खुलने लगेंगे।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आज मैं आपको खांसी ठीक करने का एक ऐसा आयुर्वेदिक नुस्खा बता रही हूं जिसे अपनाकर एक या 2 दिन में आप खाँसी ठीक कर सकते हैं।यह आयुर्वेदिक नुस्खा आजमाया हुआ नुस्खा है मैंने इस नुस्खे को बहुत लोगों पर आजमाया है। आप भी जब भी खांसी लगे तो इस नुस्खे को जरूर अपनाइए।
*खांसी ठीक करने के लिए आपने भूरी मिर्च और बादाम लेने हैं दोनों को बराबर बराबर मात्रा में लेना है।मान लिया कि आपने अगर 5 बादाम लिए हैं तो 5 ही भूरी मिर्च ले लीजिए। इन दोनों को बराबर मात्रा में पीस लेना है।इस तरह से इन दोनों को अच्छी तरह से पीसकर किसी डिब्बे में रख ले और दिन में दो या तीन बार चाय के साथ आधा-आधा चम्मच पाउडर ले ले। *आप देखेंगे कि आपकी पुरानी से पुरानी खांसी भी 1 या 2 दिन में ही ठीक हो इस पाउडर को खाने के बाद आपको रात को नींद भी अच्छी तरह से आएगी और खांसी भी नहीं सताएगी। आपने ध्यान यह रखना है कि जब भी खांसी लगी हो ठंडा पानी या कोई भी ठंडी और खट्टी चीज नहीं खानी है ।
🫁 आरोग्य संजीवनी 👃🏼
बंद नाक से राहत पाने के लिए तत्काल क्या उपाय करे? बंद नाक (Stuffy Nose) से तुरंत राहत पाने के लिए आप ये प्रभावी उपाय अपना सकते हैं:
*भाप लें (Steam): गर्म पानी के कटोरे से 5-10 मिनट तक भाप लेना सबसे असरदार है। इससे बलगम ढीला होता है और सूजन कम होती है। *गर्म सिकाई: एक कपड़े को गर्म पानी में भिगोकर अपने माथे और नाक पर रखें।
*हाइड्रेटेड रहें: खूब गुनगुना पानी या हर्बल चाय पिएं। *सेलाइन स्प्रे: नमक के पानी वाले स्प्रे (Saline Spray) का उपयोग करें।
*सोने का तरीका: सोते समय सिर को थोड़ा ऊंचा रखें, जिससे ड्रेनेज में मदद मिलती है। 🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌸
⚜️ भगवान विष्णु के नाम ‘नारायण’ और ‘हरि’ का रहस्य. भगवान श्री विष्णु को करोड़ो नामोंसे जाना जाता है, और ये हम सभी जानते है जिनमें हरि और नारायण उनके प्रसिद्द नामों में से एक हैं। वैसे तो भगवान विष्णु के अनंत नाम हैं पर इन नामों का रहस्य सचमुच बहुत खास है। आईये जानते हैं आचार्य श्री गोपी राम से–
*पुराणों में भगवान विष्णु के दो रूप. पुराणों में भगवान विष्णु के दो रूप बताए गए हैं. एक रूप में तो उन्हें बहुत शांत, प्रसन्न और कोमल बताया गया है और दूसरे रूप में प्रभु को बहुत भयानक बताया गया है. जहां श्रीहरि काल स्वरूप शेषनाग पर आरामदायक मुद्रा में बैठे हैं. लेकिन प्रभु का रूप कोई भी हो, उनका ह्रदय तो कोमल है और तभी तो उन्हें कमलाकांत और भक्तवत्सल कहा जाता है. *भगवान विष्णु का शांत स्वाभाव कहा जाता है कि भगवान विष्णु का शांत चेहरा कठिन परिस्थितियों में व्यक्ति को शांत रहने की प्रेरणा देता है. समस्याओं का समाधान शांत रहकर ही सफलतापूर्वक ढूंढा जा सकता है. शास्त्रों में भगवान विष्णु के बारे में लिखा है. “शान्ताकारं भुजगशयनं”। पद्मनाभं सुरेशं ।विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम् । इसका अर्थ है भगवान विष्णु शांत भाव से शेषनाग पर आराम कर रहे हैं. भगवान विष्णु के इस रूप को देखकर मन में ये प्रश्न उठता है कि सर्पों के राजा पर बैठकर कोई इतना शांत कैसे रह सकता है? लेकिन वो तो भगवान हैं और उनके लिए सब कुछ संभव है. श्री विष्णु के पास कई अन्य शक्तियां हैं, जो आपको आश्चर्यचकित कर सकती हैं.
*क्या है भगवान के “हरि” नाम के पीछे का भाव:- आपने भगवान विष्णु का ‘हरि’ नाम भी कई बार जाने-अनजाने में बोला और सुना होगा। किंतु यहां बताए जा रहे इसी नाम के कुछ रोचक अर्थों से संभवतः अब तक आप भी अनजान होंगे। ये मतलब जानकर आप यह नाम बार-बार बोलने का कोई मौका चूकना नहीं चाहेंगे –शास्त्रों के मुताबिक भगवान विष्णु के ‘हरि’ नाम का शाब्दिक मतलब हरण करने लेने वाला होता है। कहा गया है कि ‘हरि: हरति पापानि’ जिससे यह साफ है कि हरि पाप या दु:ख हरने वाले देवता है। सरल शब्दों में ‘हरि’ अज्ञान और उससे पैदा होने वाले कलह को हरते या दूर कर देते हैं। क्योंकि सच्चे मन से श्रीहरि का स्मरण करने वालों को कभी निऱाशा नहीं मिलती है. कष्ट और मुसीबत चाहें जितनी भी बड़ी हो श्रीहरि सब दुख हर लेते हैं.‘हरि’ नाम को लेकर एक रोचक बात भी बताई गई है, जिसके मुताबिक हरि को ऐश्वर्य और भोग हरने वाला भी माना है। चूंकि भौतिक सुख, वैभव और वासनाएं व्यक्ति को भगवान और भक्ति से दूर करती है। ऐसे में हरि नाम स्मरण से भक्त इन सुखों से दूर हो प्रेम, भक्ति और अंत में भगवान से जुड़ जाता है।यही वजह है कि ‘हरि’ नाम को धार्मिक और व्यावहारिक रूप से सुख और शांति का महामंत्र माना गया है। क्या है भगवान के “नारायण” नाम के पीछे का भाव. भगवान विष्णु अपने भक्तों पर हर रूप और हर स्वरूप से कृपा बरसाते हैं और इसीलिए वो जगत के पालनहार कहलाते हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भगवान विष्णु का नाम नारायण क्यों है? उनके भक्त उन्हें नारायण क्यों बुलाते हैं? भगवान विष्णु को “नारायण” भी पुकारा जाता है। सांसारिक जीवन के लिए तो नारायण नाम की महिमा इतनी ज्यादा बताई गई है कि इस नाम का केवल स्मरण भी सारे दुःख व कलह दूर करने वाला बताया गया है।पौराणिक प्रसंगों में भगवान विष्णु के परम भक्त देवर्षि नारद क नारायण-नारायण भजना भी इस नाम की महिमा उजागर करता है। इसी तरह भगवान विष्णु के कई नाम स्वरूप व शक्तियों के साथ नारायण शब्द जोड़कर ही बोले जाते हैं। जैसे– सत्यनारायण, अनंतनारायण, लक्ष्मीनारायण, शेषनारायण, ध्रुवनारायण आदि।इस तरह नारायण शब्द की महिंमा तो सभी सुनते और मानते हैं, किंतु कई लोग भगवान विष्णु को नारायण क्यों पुकारा जाता है, नहीं जानते। *भगवान विष्णु के सोने का क्या रहस्य है, आखिर क्या कहता है हिन्दू धर्म. असल में, पौराणिक मान्यता है कि जल, भगवान विष्णु के चरणों से ही पैदा हुआ। गंगा नदी का नाम “विष्णुपादोदकी’ यानी भगवान विष्णु के चरणों से निकली भी इस बात को उजागर करता है।वहीं पानी को नीर या नार कहा जाता है तो वहीं जगतपालक के रहने की जगह यानी अयन क्षीरसागर यानी जल में ही है। इस तरह नार और अयन शब्द मिलकर नारायण नाम बनता है। यानी जल में रहने वाले या जल के देवता। जल को देवता मानने के पीछे यह भी एक वजह है।पौराणिक प्रसंगों पर गौर भी करें तो भगवान विष्णु के दशावतारों में पहले तीन अवतारों (मत्स्य, कच्छप व वराह) का संबंध भी किसी न किसी रूप में जल से ही रहा। सीलिए भगवान विष्णु को उनके भक्त ‘नारायण’ नाम से बुलाते हैं.
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।।
*_मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।।

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