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माघ गुप्त नवरात्रि : रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू होंगी, जानिए तिथि, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
◈〣• जय माता दी •❥〣◈
🔮 रवि और सर्वार्थ सिद्धि योग में शुरू होंगी माघ गुप्त नवरात्रि, जानिए तिथि, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त और महत्व
🥏 HEADLINES
♦️ 10 फरवरी 2024 दिन शनिवार को शुरू हो रही है माघ गुप्त नवरात्रि।
♦️ गुप्त नवरात्रि पर पूजा किसी को बिना बताए गुप्त तरीके और गुप्त स्थान में ही करें।
♦️ कितने दिन चलेगी गुप्त नवरात्रि।
♦️ घटस्थापना किस दिन और किस मुहूर्त में करें।
♦️ गुप्त नवरात्र की पूजा से प्राप्त की जाती हैं सिद्धियां।
🌏 हिंदू धर्म में नवरात्रि का विशेष महत्व है. माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से नवमी तक गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है. गुप्त नवरात्रि को गुप्त साधना और विद्याओं की सिद्धि के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. गुप्त नवरात्रि में मां दुर्गा के इन स्वरूपों की पूजा होती है. तारा देवी, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, माता चित्रमस्ता, त्रिपुर भैरवी, मां धूम्रवती, माता बगलामुखी, मातंगी, कमला देवी की पूजा होती है. बता दें कि नवरात्रि वर्ष में चार बार आती है, जिसमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि के अलावा दो गुप्त नवरात्रि पड़ती है. पहली गुप्त नवरात्रि माघ मास में और दूसरी आषाढ़ मास में आती है. गुप्त नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के अलावा मां भगवती दुर्गा के दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है.
📆 माघ गुप्त नवरात्रि 2024 डेट
माघ गुप्त नवरात्रि 10 फरवरी 2024 से शुरू हो रही है। इसका समापन 18 फरवरी 2024 को होगा। यह नवरात्रि माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को आती है। गुप्त नवरात्रि को तंत्र साधना के लिए सुनहरा अवसर माना जाता है।
👣 माघ गुप्त नवरात्रि 2024 मुहूर्त
माघ मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 10 फरवरी 2024 को सुबह 04:28 बजे शुरू होगी और 11 फरवरी 2024 को सुबह 12:47 बजे समाप्त होगी.
🥥 गुप्त नवरात्रि घट स्थापना
गुप्त नवरात्रि में भी देवी पूजा के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है और पूरे नौ दिनों तक सुबह-शाम देवी की पूजा की जाती है।
💮 माघ गुप्त नवरात्रि में घटस्थापना का शुभ मुहूर्त का समय
▶️ 10 फरवरी को सुबह 08 बजकर 45 मिनट से शुरू होकर सुबह 10 बजकर 10 तक रहेगा.
▶️ कलश स्थापना के लिए अभिजित मुहूर्त का समय- दोपहर 12 बजकर 13 मिनट से शुरू होकर दोपहर 12 बजकर 58 मिनट तक शुभ मुहूर्त समाप्त हो जाएगा।
❄️ बेहद खास हैं ये दो शुभ योग
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, इस बार गुप्त नवरात्रि के पहले ही दिन रवियोग और सर्वार्थसिद्धि योग बन रहे हैं. इससे नवरात्रि के महत्व और भी बढ़ गया है. इस योग में माता की पूजा अर्चना करने पर दोगुना लाभ प्राप्त होता है. व्यक्ति को जीवन में सभी तरह की सुख और संपत्ति की प्राप्ति होती है.
☝🏽 गुप्त नवरात्रि का धार्मिक महत्व
नवरात्रि में देवी दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है, लेकिन गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं की पूजा की जाती है। ये महाविद्याएं हैं मां काली, मां तारा देवी, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां ध्रूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी। गुप्त नवरात्रि में शक्ति की पूजा बहुत ही गुप्त रूप से की जाती है इसलिए इसे गुप्त नवरात्रि कहा जाता है। ऐसा माना जाता है कि गुप्त नवरात्रि की पूजा जितनी गोपनीयता से की जाती है, मां दुर्गा उतनी ही अधिक कृपा बरसाती हैं।
⚛️ गुप्त नवरात्रि पूजा विधि
▫️ गुप्त नवरात्रि के दिन साधक को ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान-ध्यान करना चाहिए।
▫️ देवी दुर्गा की तस्वीर या मूर्ति को लाल रंग के कपड़े में रखें और लाल रंग का वस्त्र या चुनरी आदि चढ़ाएं।
▫️ इसके साथ ही मिट्टी के बर्तन में जौ के बीज बो दें। इसमें प्रतिदिन उचित मात्रा में पानी का छिड़काव किया गया है।
▫️ इसके साथ ही मंगल कलश में गंगा जल, सिक्का आदि डालकर आम्रपल्लव और श्रीफल रखकर शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
▫️ फिर प्रतिदिन देवी की फल, फूल आदि चढ़ाकर विधि-विधान से पूजा करें।
▫️ इसके बाद अष्टमी या नवमी के दिन देवी का पूजन करने के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें।
▫️ उन्हें पूड़ी, चना, हलवा आदि का प्रसाद खिलाकर और कुछ दक्षिणा देकर विदा करें।
▫️ पूजा समाप्ति के बाद कलश को किसी पवित्र स्थान पर विसर्जित कर दें।
👉🏽 गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि में दस महाविद्याओं का आराधना की जाती है। साथ ही मां दुर्गा की पूजा गुप्त रूप से की जाती है। इस नवरात्रि में तंत्र-मंत्र और सिद्धि प्राप्त करने का भी विशेष महत्व माना गया है। मान्यता है जो भक्त गुप्त रूप से मां दुर्गा की पूजा- अर्चना करता है, उसकी सही मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही सुबह और शाम की पूजा में दुर्गा मां को बताशे और लौंग का भोग लगाने का विधान है।

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