धार्मिक

माटी से कलश बनने की यात्रा मूकमाटी : दृढ़ मति माताजी

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
ग़ौरझामर । परम पूज्य संत शिरोमणि आचार्य विद्यासागर जी महराज के परम प्रभावक़ शिष्या ज्येष्ठ श्रेष्ठ आर्यका माँ दृढ़मती मति माताजी ससंघ का मंगल बर्षायोग धर्मनगरी गौरझामर में हो रहा है। महा विदुषी आर्यका दृढ़ मति माताजी द्वारा आचार्य विद्यासागर महराज द्वारा लिखित महान रचना मूकमाटी महाकाव्य की प्रवचन माला प्रातःकालीन वेला में चल रही है विशाल जनसमूह मूकमाटी के मर्म को सुन रही है । आज रविवारीय कार्यक्रम के दौरान गुरुजी की संगीतमय पूजन हुई गुगवारा जैन मंदिर समाज द्वारा बहुत ही सुंदर अष्ट द्रव्य सजाकर लाई गई। समाज के संचालक भाई दीपक चौधरी ने बताया मूकमाटी महाकाव्य को भारत के बहुत से महाविद्यालयो द्वारा पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है । इस महाकाव्य को भारतीय विद्यापीठ द्वारा प्रकाशित किया गया है। दुनिया की अनेकों भाषाओं में इस महाकृति का अनुवाद किया गया है।पूजनीय आर्यका माताजी ने बताया जिस प्रकार कुम्भकार मूक माटी को तपा तपा कर उसकी परीक्षा लेकर एक सुंदर कलश बनाता है उसी प्रकार गुरु अपने शिष्य को तपा तपा कर परीक्षा लेकर एक कुशल साधक बनाते है। ऐसे पूज्य गुरुवर के चरणों मे कोटिश नमन वंदन ।

Related Articles

Back to top button