धार्मिक

सृष्टि पालन के आदि श्रोत महा विष्णु- श्रीभगवान रसिक विष्णु तत्त्व पालन का प्रतीक है

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
दमोह। विष्णु पुराण केवल ग्रंथ नहीं, वह चेतना की धारा है जो काल के प्रवाह में भी अविचल बहती रहती है। जहाँ तर्क मौन हो जाता है, वहाँ दर्शन ही बोल सकता है; और जहाँ शब्द थक जाते हैं, वहाँ अनुभूति स्वयं उपदेश बन जाती है। इसलिए व्यास ने 18 में से सबसे लघु पुराण जिसकी श्लोक संख्या अन्य पुराणों से एक चोथाई हैं। यह पुराण मनुष्य को स्मरण कराता है कि जीवन केवल भोग का उपक्रम नहीं, अपितु धर्म से अनुप्राणित उत्तरदायित्व है। जैसे सूर्य स्वयं जल को नहीं पीता, फिर भी वर्षा का कारण बनता है। उसी प्रकार महापुरुष स्वयं के लिए नहीं, लोक के लिए जीते हैं। जहां सृजन का गर्व, न संहार का उग्र रूप; बल्कि संतुलन की वह मर्यादा, जहाँ करुणा नीति बनती है और नीति करुणा में परिणत हो जाती है। यही दर्शन मनुष्य को सिखाता है कि शक्ति का सौंदर्य नियंत्रण में है और ज्ञान की शोभा विनय में, जिसे श्रीमहंत श्री भगवान वेदांतरसिकाचार्य ने कहीं जो कि मुख्य वक्ता हैं पुराण का संदेश अलंकार बनकर नहीं, आचरण बनकर उतरता तब धर्म  उपदेश नहीं, जीवन-पद्धति बन जाता है भक्ति भावना नहीं, चेतना की जागृति है; और ज्ञान संग्रह नहीं, आत्मबोध का प्रकाश है। जिस समाज में धर्म व्यवहार बन जाए, वहाँ नीति को दंड की आवश्यकता नहीं पड़ती। विष्णु पुराण इसी सत्य की घोषणा करता है कि जब अंतःकरण शुद्ध हो, तब राज्य स्थिर रहता है, और जब व्यक्ति संयमित हो, तब राष्ट्र सुरक्षित रहता है। यह वार्ता केवल श्रवण हेतु नहीं, आत्मसंरक्षण हेतु है ताकि मनुष्य अपने भीतर स्थित विष्णु-तत्त्व को पहचान सके और जीवन को लोकमंगल की दिशा में प्रवाहित कर सके। श्री लक्ष्मीनारायण महायज्ञ के अंतर्गत सुरेश चन्द्र शुक्ल (पप्पु गुरु जी) प्रमुख यजमान पं. आदित्य मिश्र प्रमुख यज्ञ आचार्य हैं डॉ दयाशंकर मिश्रा (दयालु गुरु जी) राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) आयुष, रामाकांत त्रिपाठी एवं औषधि प्रशासन उ.प्र सरकार, डॉ. डी.वी. मिश्र. डॉ. बी.डी. तिवारी. खाय सुरक्षा शुभम्कर चक्रवर्ती जी महाराज, पं. विजय शंकर शूक्ल, प्रो. डॉ बीएनमिश्रा, डॉ. गिरजाशंकर शुक्ला, पं. कृपाशंकर शुक्ला, पं. जगदीश प्रसाद सहित यज्ञ नारायण सेवा समिति के सदस्यों ने महती भूमिका निभाई।

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