मध्य प्रदेश

कलेक्टर न्यायालय ने कटनी एसडीएम के नियम विरुद्ध नामांतरण आदेश को किया खारिज

कटनी एसडीएम ने नियम विरुद्ध तरीके से सरकारी जमीन का कर दिया नामांतरण
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । शासन से पट्टे पर कृषि कार्य हेतु प्राप्त रीठी तहसील के ग्राम धरमपुरा स्थित दो खसरा नंबरों की शासकीय तौर पर दर्ज अलग – अलग दो भूखंडों के खरीद-फरोख्त के बाद नामांतरण के प्रकरण को कलेक्टर अवि प्रसाद ने स्व- प्रेरणा से पुनरीक्षण मे लेकर कटनी के अनुविभागीय अधिकारी राजस्व प्रदीप मिश्रा द्वारा नियम विरूद्ध तरीके से किये गये भूमि के नामांतरण आदेश को स्थगित कर दिया है । साथ ही कलेक्टर ने मध्यप्रदेश शासन के नाम भूमि को शासकीय दर्ज किये जाने का अंतरिम आदेश पारित किया है ।
कलेक्टर ने सभी तथ्यों का सूक्ष्म अवलोकन कर बिना सक्षम अनुमति के भूमि विक्रय कर भू-राजस्व संहिता के प्रावधानों का उल्लंघन पाये जाने पर ग्राम धरमपुरा के खसरा नंबर 136 रकवा 0.37 हेक्टेयर और खसरा नंबर 137 रकवा 0.40 हेक्टेयर भूमि को राजस्व अभिलेख मे शासकीय पट्टेदार के रूप मे दर्ज इस भूमि के अनुविभागीय अधिकारी कटनी द्वारा किये गये नामांतरण आदेश को कलेक्टर ने स्थगित करते हुए इस भूमि को मध्यप्रदेश शासन के नाम शासकीय दर्ज किये जाने का अंतरिम आदेश जारी किया है ।
दरअसल पर अनुविभागीय अधिकारी राजस्व कटनी द्वारा ग्राम धरमपुरा के उल्लेखित दो खसरों के शासकीय पट्टेदार के तौर पर दर्ज होने पर भी अवैध नामांतरण के पारित आदेश के संबंध में तहसीलदार रीठी द्वारा 4 जुलाई 2024 को कलेक्टर श्री प्रसाद से राजस्व रिकार्ड में दर्ज किये जाने के संबंध मे मार्गदर्शन चाहा गया था । इसके बाद इस मामले को कलेक्टर अवि प्रसाद की कोर्ट द्वारा स्वप्रेरणा से इसे पुनरीक्षण में लिया गया था ।
यह है मामला धरमपुरा गांव की उल्लेखित दोनों खसरा की शासकीय पट्टे की जमीनों की, की गई ब्रिकी के बाद नायब तहसीलदार बिलहरी ने नामांतरण आवेदन को खारिज कर दिया था । लेकिन एसडीएम कटनी ने नियम विरूद्ध तरीके से शासकीय पट्टे की भूमि का नामांतरण आदेश जारी कर दिया था।
भूमि खसरा नंबर 136 रकवा 0.37 हेक्टेयर और खसरा नंबर 137 रकवा कुल 0.40 हैक्टेयर भूमि को राशि छाबरा निवासी हेमू कालानी वार्ड शांति नगर माधवनगर कटनी ने रजिस्टर्ड विक्रय पत्र के माध्यम से अतुल कुमार चेलानी से भूमि क्रय की थी । हल्का पटवारी संजीत कुमार धुर्वे ने नायब तहसीलदार बिलहरी के न्यायालय में प्रस्तुत प्रतिवेदन में विक्रित भूमि को राजस्व अभिलेख में शासकीय पट्टेदार के तौर पर दर्ज होने की जानकारी दी । इस आधार पर नायब तहसीलदार बिलहरी ने नामांतरण आवेदन खारिज कर दिया था ।
इन नियमों का उल्लंघन
सक्षम अनुमति प्राप्त किये बिना पट्टे में प्राप्त भूमि के विक्रय से मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा का उल्लंघन हुआ है । जिससे स्पष्ट है कि अपवादों को छोडकर अन्य कोई व्यक्ति पट्टे या आवंटन की तारीख से 10 वर्ष की कालावधि के भीतर ऐसी भूमि अंतरित नहीं करेगा । साथ ही कलेक्टर की अनुज्ञा के बिना किया गया विक्रय भी पूर्णतः अवैधानिक माना है व उससे कोई भी अधिकार उद्भूत नहीं होते । इस प्रकार बिना अनुमति पट्टे में प्राप्त भूमि का विक्रय किया जाना अवैधानिक माना गया है।

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