आरक्षक 5 हजार रिश्वत लेते लोकायुक्त ने किया ट्रैप, पीड़ित को गुनाहगार बनाने की धमकी देकर मांग रहे थे 25 हजार रुपए

ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिला में अंधेरेदेव के रहने वाले अभिषेक चौरसिया की शिकायत पर लोकायुक्त टीम जबलपुर के द्वारा ओमती थाना में पदस्थ आरक्षक नीतेश शुक्ला को 5000 हजार रुपए की रिश्वत लेते रंगे हांथो ट्रैप किया गया।
देखा जाय तो शहर एवं ग्रामीण थानों में भ्रष्टाचार चरम पर हैं । जहां देखो हर काम का पैसा लगने लगा हैं। चाहे किसी के चरित्र का सत्यापन कराना है तो पैसा, लेनदेन का विवाद निपटाना है तो पैसा, चालान के बाद भी ऊपर से पैसा वसूलना आम बात है।
ऐसे ही एक मामलें मे जबलपुर ओमती थाने में पदस्थ एक आरक्षक को सोमवार की शाम 5 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए लोकायुक्त की टीम ने रंगे हाथो ट्रैप किया है।
लोकायुक्त अधिकारी संजय साहू ने बताया कि अंधेर देव निवासी शुभम चौरसिया ने शिकायत दर्ज कराई की थी । कि उसका किसी का लेन देन का विवाद चल रहा है।
जिसके बदले में उसकी मोटर सायकिल बुलट और जेवर थाने में रखे हुए थे। दोनों मामलों को थाने से निपटाने के लिए ओमती थाने के आरक्षक नितेश शुक्ला ने फरियादी शिवम चौरसिया से 25 हजार रुपए रिश्वत की मांग की । जिसकी शिकायत लोकायुक्त में की गई।
शिकायत के बाद लोकायुक्त की टीम ने जांच पड़ताल के बाद जाल बिछाया और रिश्वत की पहली रकम 5 हजार रुपए जैसे ही आरक्षक ने ली वैसे ही लोकायुक्त की टीम ने उसे दबोच लिया। ट्रैप करने के बाद आरक्षक को सर्किट हाउस ले जाया गया। जहां फरियादी और उसके बयान दर्ज किए गए।
लोकायुक्त पुलिस ने भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है।घटना – 2 जून भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधन) 2018 की धारा-7, 13(1)B, 13(2) के अंतर्गत कार्यवाही की जा रही है।
ट्रेप दल में-उप पुलिस अधीक्षक सुरेखा परमार निरीक्षक शशि मर्सकोले निरीक्षक कमल सिंह उइके सहित अन्य कर्मचारीगण मौजूद रहें।
पुलिस सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक कई सालों से थाने में पदस्थ पुलिस के आरक्षक के साथ प्रधान आरक्षक, एसआई, सहित शहर और ग्रामीण थानों में जमे हुए हैं। जिनका 6 साल में ट्रांसफर होना चाहिए वह अपनी बलबूते में थाने में जमे हुए हैं, जिनके ट्रांसफर हो गए है। लेकिन उन्हें थाने से जाने नहीं दिया जा रहा है। और जिन अधिकारियों और आरक्षकों के थानों से ट्रांसफर होना चाहिए लेकिन उनका ट्रांसफर अभी तक नहीं हुआ है।
वर्तमान में कुछ समय पहले पुलिस के अधिकारियों ने यह आदेश निकाला था कि 6 साल से ऊपर थाने में पदस्थ पुलिस कर्मियों के ट्रांसफर होना है, लेकिन अभी तक किसी अधिकारी ने इस मामले को संज्ञान में नहीं लिया अब देखना यह है कि पुलिस के अधिकारी इन पुलिस कर्मियों के ट्रांसफर कब तक करेंगे और थानों में हो रहे भ्रष्टाचारियों के खिलाफ पुलिस के अधिकारी पर क्या कार्यवाही होगी।



