वर्षों से निवासरत आदिवासी परिवार मूलभूत सुविधाओं से हैं वंचित
ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बण्डा । सागर जिले की शाहगढ़ तहसील के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बसौना में निवासरत आदिवासी परिवार मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं ग्राम बसौना से एक किलोमीटर दूर उसी गाँव के निवासी पापेट मार्ग पर विगत 20 वर्षों से एक अलग अपने समुदाय का मुहल्ला बनाकर रह रहे हैं जिसमे 15 आदिवासी परिवार निवासरत हैं इनमें से 6 परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत कुटीर प्राप्त हो चुकी हैं और इसी स्थान के 13 आदिवासियों को रहने के लिए मकान के पट्टे भी प्राप्त हो चुके हैं इन परिवारों को 20 वर्ष बीत जाने के बाद भी रोशनी के लिए विद्युत सुविधा, आवागमन के लिए सी. सी. रोड, पीने के लिए स्वच्छ पेय जल की भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं इस संदर्भ में गाँव के निवासी हीरालाल आदिवासी जो कक्षा 12वीं प्रथम श्रेणी से पास है ने बताया कि मेरे द्वारा क्षेत्रीय विधायक, विद्युत विभाग के आला अधिकारियों और सी.एम. हेल्पलाइन नंबर पर बार – बार शिकायत के बाद भी आज तक हमें विद्युत सुविधा प्रदान नहीं की गयी भैयाराम आदिवासी ने बताया कि हम सभी मजदूर वर्ग हैं दूर खेतों से पानी लाते हैं धनीराम आदिवासी ने बताया कि हम सभी गाँव से हटकर एकांत में रहते हैं वर्षात के मौसम में हमें आवागमन में बहुत परेशानी होती है इन शिकायतों के संदर्भ में जब हमारे प्रतिनिधि ने जब ग्राम पंचायत बसौना के सरपंच संतोष सिंह बुंदेला से पूँछा तो उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायत के प्रस्ताव के माध्यम से हम इन सभी समस्याओं के निराकरण की माँग क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों से करेंगे एक ओर जहाँ मध्यप्रदेश के शासन प्रशासन द्वारा आदिवासियों के उत्थान के लिए अनेक योजनाएं चलाईं जा रहीं हैं वहीं दूसरी ओर इस गाँव के आदिवासी परिवार समस्त मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। जिससे प्रदेश सरकार की घोषणाओं का माखौल उड़ा रहा हैं। आदिवासियों के उत्थान की बात जोर-शोर से उठाने वाली सरकार की आवाज शायद बंडा क्षेत्र के अधिकारियों के कानों तक नहीं पहुंच पाई है।



