आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 28 अगस्त 2024
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🌐 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📅 तिथि – बुधवार भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष दशमी तिथि 01:19 AM तक उपरांत एकादशी
🖍️ तिथि स्वामी : दशमी तिथि के देवता हैं यमराज। इस तिथि में यम की पूजा करने से नरक और मृत्यु का भय नहीं रहता है। यह सौम्य अर्थात शांत तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र म्रृगशीर्षा 03:53 PM तक उपरांत आद्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – म्रृगशीर्षा नक्षत्र का स्वामी मंगल होता है। वहीं इसके देवता चंद्रमा है।
⚜️ योग – वज्र योग 07:11 PM तक, उसके बाद सिद्धि योग
⚡ प्रथम करण : वणिज – 01:22 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 01:19 ए एम, अगस्त 29 तक बव
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:41:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:20:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:50 ए एम से 05:57 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:22 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:47 पी एम से 07:09 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:47 पी एम से 07:54 पी एम
💧 अमृत काल : 06:59 ए एम से 08:36 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:45 ए एम, अगस्त 29
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 05:57 ए एम से 03:53 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻 आज का उपाय-किसी बटुक को धर्मशास्त्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
❄️ पर्व एवं त्यौहार – भद्रा/सर्वार्थसिद्धि योग/व्यापार मुहूर्त/ राष्ट्रीय चिंतन दिवस, राष्ट्रीय रेड वाइन दिवस, राष्ट्रीय चेरी टर्नओवर दिवस, ला टोमाटीना, राष्ट्रीय बो टाई दिवस, क्रैकर्स ओवर द कीबोर्ड दिवस, राष्ट्रीय पावर रेंजर्स दिवस, न्यायाधीश जगदीश सिंह खेहर जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी झावेरचंद या जावेरचंद कालिदास मेघानी जयन्ती, भारतीय राजकुमारी विजया देवी जन्म दिवस, भारत के महान संत एवं समाज सुधारक नारायण गुरु जयंती, राष्ट्रीय नेत्रदान पखवाड़ा
✍🏼 विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देने वाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं। यह दशमी तिथि धर्म प्रदान करने वाली तिथि भी माना जाता है। अर्थात इस दिन धर्म से संबन्धित कोई बड़े अनुष्ठान वगैरह करने-करवाने से सिद्धि अवश्य मिलती है। इस दशमी तिथि में वाहन खरीदना उत्तम माना जाता है। इस दशमी तिथि को सरकारी कार्यालयों से सम्बन्धित कार्यों को आरम्भ करने के लिये भी अत्यंत शुभ माना जाता है।
🗽 Vastu tips 🗼
सुनने में आपको थोड़ा अजीब भी लग सकता है लेकिन वास्तु शास्त्र में यह आजमाया हुआ नुस्खा है। यह कोई टोना-टोटका नहीं है। अगर आपको लगता है कि आपके घर पर किसी की बुरी नजर लग गई है और नकारात्मक ऊर्जा घर में आ रही है। आपने घर के द्वार दोष और वेध दोष को दूर करने के लिए शंख या सीप मौली में बांधकर दरवाजे पर लटकानी है। बस इतना सा उपाय है और आपका घर सकारात्मक ऊर्जा से सराबोर हो जाएगा।
अगर आपने घर में पूजा स्थल बना रखा है तो वहां शुद्ध देसी घी का दीपक हर रोज जलाएं। अगर घर में शंख भी रखा है तो उसकी ध्वनि तीन बार सुबह-शाम नियमित रूप से करें। घर से नकारात्मक ऊर्जा बाहर निकल जाएगी।
घर के देवालय में देवी-देवताओं पर फूलों के हार चढ़ा रखे हैं तो हर दूसरे दिन पुराने हार हटाकर, नए हार भगवान को अर्पित करने चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
जरूर कर लें ये उपाय
सफेद आकड़े की जड़ ले आएं
शंकर भगवान के शिवलिंग से 21 बार घूमा लें
पीरिड्स खत्म होने पर इस जड़ को लाल धागे में बांध ले
जड़ बंधे लाल धागे को अपनी कमर में बांध लें
भगवान शिव का रोज सुबह ध्यान करें
भगवान शिव के आशीर्वाद से मिलेगी खुशखबरी
🍂 आरोग्य संजीवनी 🍁
वजन बढ़ाने हेतु🔹
🔹क्या खायें : मधुर व स्निग्ध पदार्थ, जैसे देशी गाय या भैंस का दूध-घी, मक्खन, ताजा मीठा दही, गेहूँ, दालें, चावल, उड़द, चने, लाल चौलाई, शकरकंद, चुकंदर, मूँगफली, गोंद, तिल, फलों में आम, केला, चीकू, सीताफल, सेवफल, नारियल, खजूर, बादाम, काजू, अखरोट, अंजीर, मखाना आदि सूखे मेवे ।
🔹2 ग्राम अश्वगंधा चूर्ण घी मिश्रित दूध अथवा आँवले के 20 मि.ली. रस के साथ सुबह लेना पुष्टिकारक है । साथ में भिगोये हुए 5-7 खजूर ले सकते हैं ।
🔹 सुवर्ण-सिद्ध जल : 4 लीटर पानी में 4-5 ग्राम शुद्ध सुवर्ण डाल के पानी को उबालकर आधा करें । इसका सेवन विशेष लाभदायी है ।
🔹क्या न खायें : कड़वे, कसैले तीखे, रूखे-सूखे पदार्थ, जौ, ज्वार, मूँग, अरहर, करेला, मेथीदाना, सहजन, शहद, त्रिफला, हरड़, गोमूत्र आदि न लें।
📘 गुरु भक्ति योग 🕯️
प्रार्थना का उद्देश्य लाभ के लिए याचना करना नहीं है। ऐसी याचना या तो यह दर्शाती है कि ईश्वर को नहीं पता कि हम क्या चाहते हैं, जो उसकी सर्वज्ञता के विरुद्ध होगा, या यह कि वह पूछे जाने का इंतजार करता है और प्रशंसा में आनंदित होता है, जो उसे सामान्य मनुष्य के स्तर पर गिरा देगा। फिर हम प्रार्थना क्यों करते हैं? यद्यपि सर्वज्ञ ईश्वर प्रत्येक प्राणी में व्याप्त है और वह जानता है कि प्रत्येक व्यक्ति के हृदय में क्या है, फिर भी, यदि हम प्रार्थना में जो कहना चाहते हैं वह अनकहा रह जाता है, तो यह हमारे हृदय को पीड़ा पहुँचाता है और इसलिए प्रार्थना उस पीड़ा को ठीक करती है। प्रार्थना के द्वारा हम ईश्वर द्वारा निर्धारित नियमों को बदलने का प्रयास नहीं करते हैं; वास्तव में, हम ऐसा कर ही नहीं सकते हैं। हम अपनी अशुद्धियों को दूर करने के लिए उनके पास जाते हैं। जैसा कि तिरुवल्लुवर ने कहा, हम अपने आसक्तियों से छुटकारा पाने के लिए स्वयं को उनसे जोड़ते हैं, जिनका कोई आसक्ति नहीं है। ईश्वर के अस्तित्व के बारे में एक भक्तिपूर्ण चेतना स्वयं ही हमें प्रकृति की शुद्धता में परिवर्तित करने का चमत्कार करेगी। हम उनकी उपस्थिति में होने से अपने शरीर में एक आध्यात्मिक आवेश प्राप्त करते हैं।
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⚜️ दशमी तिथि के देवता यमराज जी बताये जाते हैं। यमराज दक्षिण दिशा के स्वामी माने जाते हैं। इस दशमी तिथि में यमराज के पूजन करने से जीव अपने समस्त पापों से छुट जाता है। पूजन के उपरान्त क्षमा याचना (प्रार्थना) से जीव नरक कि यातना एवं जीवन के सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। इस दशमी तिथि को यम के निमित्ति घर के बाहर दीपदान करना चाहिये, इससे अकाल मृत्यु के योग भी टल जाते हैं।
दशमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है, वो लोग देशभक्ति तथा परोपकार के मामले में बड़े तत्पर एवं श्रेष्ठ होते हैं। देश एवं दूसरों के हितों के लिए ये सर्वस्व न्यौछावर करने को भी तत्पर रहते हैं। इस तिथि में जन्म लेनेवाले जातक धर्म-अधर्म के बीच के अन्तर को अच्छी तरह समझते हैं और हमेशा धर्म पर चलने वाले होते हैं।

