मध्य प्रदेश

विस्थापन वाले तानाशाही फरमान को हम हर हाल में नहीं मानेंगे : कवि चन्द्रभान लोधी

रिपोर्टर : अर्जुनसिंह लोधी
दमोह। जिले में विस्थापन का मुद्दा अब जोर पकड़ता नजर आ रहा है, सोशल मीडिया पर आए दिन लोग विस्थापन रोकने के समर्थन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। प्रदेश में अगले महीना विधानसभा का चुनाव होना है और आचार संहिता लागू हो चुकी है। आचार संहिता में भी लोग अपने हक अधिकारों की लड़ाई लड़ने के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं। इसी बीच बीते दिन ग्राम सर्रा में करीब 18 गांव के लोग एकत्रित हुए औऱ एक जनसभा का आयोजन किया। विस्थापन रोको अभियान का नेतृत्व कर रहे कवि चन्द्रभान सिंह लोधी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि यदि विस्थापन का दर्द समझना है तो लोगों को देश के बंटवारे का इतिहास देखना चाहिए। सरकार ने भले ही अपना फरमान जारी कर दिया हो लेकिन हम लोग किसान हैं हम जमीन को खोदकर फसल उगाते है। फिर सरकार के इस तानाशाही फरमान को कैसे स्वीकार कर लेंगे। यह जमीन हमारे पुरखों की है, यही हमारे नरा गड़े हैं और यही जन्म लिया है तो यही मरेंगे भी मगर अपना गांव नहीं छोड़ेंगे। सरकार और प्रशासन से हमारा निवेदन है कि इस प्रक्रिया को तत्काल प्रभाव से रोकना चाहिए। वरना आने वाले दिनों में हम लोग आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे।
बता दें कि इस मुद्दे को लेकर सियासी मामला भी गरमाया हुआ है, पूर्व विधायक प्रताप सिंह से लेकर दमोह विधायक अजय टंडन तक ने इस प्रक्रिया का विरोध किया है और कहा कांग्रेस की सरकार बनी तो हमेशा के लिए विस्थापित नहों होने देंगे। सभा में करीब 18 गांव के लोग शामिल हुए जिनमें मुख्य वक्ता के रूप में कवि चन्द्रभान सिंह लोधी, अर्जुन सिंह लोधी सहित नौने लाल परस्ते, देवी सिंह गौंड फुलर, परम सिंह गौड़ सारा, जगन सिंह गौंड सर्रा, अशोक सिंह गौड़ फुलर, हल्लाई गौंड माधो, टेक सिंग गौंड सर्रा, तुलसी राम कुदपुरा, कोमल चन्द बोरिया, गुलाब जैन मंझगवा सर्रा, लटोरी सिंग, राजकुमार सर्रा, कनई गौंड सर्रा, फागू कुतपुरा, प्रहलाद सिंह, सोनी सींग सनाई, बसोरी पटेल, खेत सिंग, कैलाश पटेल मझगवा, महेश सींग, शिवलाल, रमेश पटेल इत्यादि लोग सभा में उपस्थित रहे।

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